राजीव मित्तल

इस देश में सारा खेल क़िस्मत का है,

वो बुलंद है तो हत्यारा.. बलात्कारी.. माफिया... नरसंहारी... काले पीले कैसे भी हिरण को मारने वाला... अपनी कार से फुटपाथ पर सोते लोगों को कुचल मारने वाला बाइज़्ज़त बरी हो कर रहेगा, बस वो सलमान खान हो और क़िस्मत सलमान खान जैसी...
अगर कहीं आप हरीश दुलानी हुए तो सलमान खान की बुलंद
किस्मत मसल के रख देगी..तबाह कर देगी..क्योंकि अदालत को गवाह चाहिये तो चश्मदीद गवाह के मां- बाप को आप निरंतर धमकी उनके घर के आंगन में फिंकवाइये...वो हथगोले का काम करेगी...

राजस्थान में 1998 सितम्बर से आज 18 साल होने को आए कोई भी सरकार...कोई भी पुलिस और कोई भी अदालत चश्मदीद गवाह हरीश दुलानी को सुरक्षा नहीं दे सकी क्योंकि उसके सामने खड़ा सलमान प्रधानमंत्री के साथ कभी भी

पतंग उड़ा सकता है... और इस बीच कई सेलिब्रिटी सुंदरियों से ऐसा इश्क लड़ा सकता है जो अखबारों और चैनलों की रोजाना रसप्रिया बनेगी.. लेकिन हरीश के अट्ठारह साल धुआं हो गए.. अट्ठारह साल से कोई घर बार नहीं..मां बाप फूंके जा चुके..कोई मौसम नहीं कोई दिन रात नहीं...

जोधपुर पुलिस अपने चश्मदीद गवाह की तबाह ज़िंदगी से पूरी तरह गाफिल रही और राजस्थान का एक बड़ा अखबार पुलिस के कंधे थपथपा रहा कि उसने सलमान के गुंडों से बचाने को हरीश के चारो तरफ पुलिस फोर्स लगा दी है...

जिस किराये की जिप्सी में बैठ काले हिरन और चिंकारा को मार कर दोनों की बोटियां रात को चबाई गयीं.. उस जिप्सी का ड्राईवर था हरीश यानि की चश्मदीद गवाह..मजिस्ट्रेट के सामने जिसका बयान दर्ज है.. लेकिन धमकी मिलने और नौकरी से निकाल देने के बाद किस भारतीय के कलेजे में इतना दम है कि वो अगली पेशी में हाज़िर हो..
अब देखिये क्या होता है सलमान के काले हिरण वाले केस में...