उमा भारती जी सुन तो रही हैं न आप ?
उमा भारती जी सुन तो रही हैं न आप ?
गंगा सफाई अभियान एक बहुत बड़ा षड्यंत्र और धोखा है
गंगा को साफ़ करना और गंदा करना एक चोखा धंधा बन चुका है
डॉ. पवन विजय
एक समाचार पत्र “दैनिक जागरण” में “गंगा जागरण यात्रा” के बारे में तीन पृष्ठ का संदर्भ पढ़ा। बाकी सब ठीक है पर एक पूर्वाग्रह है। गंगा सफाई के नाम पर रीडरशिप चमकाने का इरादा है या वाकई संजय मोहन जी को गंगा मैया की घोर चिंता हो रही? दरअसल अभी तक का अनुभव बताता है कि गंगा सफाई अभियान एक बहुत बड़ा षड्यंत्र और धोखा है। गंगा को साफ़ करना और गंदा करना एक चोखा धंधा बन चुका है जिसमें कार्पोरेट जगत, राजनेता, नौकरशाह, गैर सरकारी संगठन का कुत्सित गठजोड़ शामिल है। पहले गंगा में गन्दगी फेंकी जाएगी फिर उसे साफ़ करने के लिए फंड आएगा। इस फंड को जारी करने वाली मीटिंग और उसके प्रपोजल से लेकर जो पैसे खाने का सिलसिला चलता है वह अंत में स्वनाम धन्य गंगाप्रहरियो की तिजोरियो में जाकर विलीन हो जाता है। फिर ज्यादा से ज्यादा गंगा के घाटों पर साफ़ सफाई का काम करके गंगा सफाई की इति श्री कर ली जाती है। गंगा में गन्दगी पूर्ववत। फिर से इस गठजोड़ का रोना पीटना शुरू। फिर फंडिंग। फिर ऐश ही ऐश। ये अंत हीन सिलसिला है। जब तक गंगा की सफाई का कार्यक्रम बंद नही कर दिया जाता।
कुछ मेरा भी सुझाव है गौर फरमाइयेगा...
1- बहता हुआ जल अपनी सफाई स्वयं कर लेता है सो गंगा को सुरंगों और बांधों से यथासंभव मुक्ति मिलनी चाहिए।
2- गंगा के स्वच्छ रहने की सबसे बड़ी शर्त यह है कि उसमें गन्दगी न फेंकी जाय। गंगा को किसी भी हाल में गन्दा न किया जाय।
3- गंगा में गन्दगी फैलाने पर कठोरतम विधिक व्यवस्था की जानी चाहिए।
4- गंगा जिस भी शहर से होकर गुजरती है उसका मास्टर प्लान ऐसा हो जिससे शहर का कचरा गंगा में न गिरे बल्कि उसका निष्पादन वैज्ञानिक तरीके से हो।
5- एक बार गंगा पर बने बांधों का पानी छोड़ दिया जाय और गंगा को स्वाभाविक तरीके से कुछ समय के लिए बहने दिया जाय तो पानी के तीव्र बहाव से सारा कचरा बह जाएगा। एक बार हरहराती हुयी गंगा अपने पूरे वेग से बहेंगी तो समस्या अपने आप ख़त्म।
वास्तव में गंगा के सफाई करण में पैसे की कोई भूमिका नहीं है और न ही कोई नया तंत्र बनाने की जरूरत। हमारे पास जो पहले से चली आ रही व्यवस्था है वह पर्याप्त है।
उमा भारती जी सुन तो रही हैं न आप ?
गंगा से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े ...
1. गंगा में गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक प्रतिदिन 144.2 मिलियन क्यूबिक मलजल प्रवाहित किया जाता है।
2. गंगा में लगभग 3840 नाले गिरते हैं।
3. गंगा तट पर स्थापित औद्योगिक इकाईयां प्रतिदिन 430 मिलियन लीटर जहरीले अपशिष्ट का उत्सर्जन करती हैं जो सीधे गंगा में बहा दिया जाता है।
4. लगभग 172.3 हजार टन कीटनाशक रसायन और खाद हर वर्ष गंगा में पहुंचता है।
5. वर्तमान समय में गंगा में डालफिन लुप्तप्राय है। उत्तर प्रदेश में मात्र 100 बची हैं।
6. गंगा किनारे 3 किलोमीटर के दायरे में धोबीघाट पाए जाते हैं जो 40 से 60 प्रतिशत फास्फोरस डिटर्जेंट के माध्यम से पहुंचा रहे हैं।
7. गंगा बेसिन में केवल 14.3% वन शेष रह गए हैं।


