अपने मुख्य मंत्री जी को कोई शौक नहीं हैं । नीतीश कुमार सदा काम करते रहते हैं । हमें उन पर तरस आता है । कितना काम करते हैं । आराम ही नहीं करते । भला बताइए , इतना भी काम किया जाता है । मनुष्य आराम न करे तो उसका बीमार पड़ना भी जरूरी हो जाता है । नीतीश कुमार को भी एक भयंकर बीमारी है । इस बीमारी का अभी तक पटना में कोई इलाज भी नहीं है । वैसे भी किसी कायदे की बीमारी का कायदे का इलाज बिहार में नहीं है । मुख्य मंत्री जी की बीमारी का इलाज तो देश में एक ही डॉक्टर कर पाता है । यह ऐसा डॉक्टर है जो अपना ही इलाज नहीं कर पाता । फुरसत ही नहीं मिलती इस डॉक्टर को । मुख्य मंत्री ने इस डॉक्टर से समय मांगा है मिलने के लिए ।
हम आपको इस नीतीशीय बीमारी की जानकारी देने वाले हैं । इस बीमारी के कारण नीतीश जी बहुत चिड़चिड़े हो जाते हैं । इलाज नहीं हो पाता तो कहते हैं कि डॉक्टर ने ठीक से देखा नहीं । अब बेचारा वह डॉक्टर भी क्या करे । उसका मामला एक अनार सौ बीमार जैसा भी नहीं है । डॉक्टर के पास अनार ही नहीं है कि रोगी का इलाज कर सके । बीमार एक हो या सौ । पर बीमार को बीमारी है कि डॉक्टर के पास जाना ही है । आखिर बीमार को डॉक्टर के पास जाना ही पड़ेगा ।

नीतीश कुमार की चंपू कमिटी के प्रधान चंपू भी यही राय देते हैं कि इस बीमार के अलावा कोई इलाज नहीं कर सकता । यह तो आपको पता ही है कि नीतीश जी सुनते हैं सबकी ,पर करते हैं अपने मन की । असल में बीमारी के कारण नीतीश जी किसी की सुनते ही नहीं हैं । जब किसी की सुनेंगे ही नहीं तो करेंगे अपने मन की ही । चंपू कमिटी के अलावा यह भेद सिर्फ इसी कलमकार को मालूम है । कलमकार को तो बीमारी का इलाज भी पता है । पर नीतीश जी चंपू कमिटी की बात मानें कि कलमकार की । वैसे भी नीतीश जी की नजर में वही कलमकार कलमकार होता है जो उन्हें बताता है कि इलाज तो सिर्फ वही डॉक्टर कर सकता है ।

अब कोई किसी की खुशफहमी का क्या कर सकता है । कलमकार अपनी गलतफहमी का मारा , मुख्य मंत्री को अपनी खुशफहमी का सहारा । उप मुख्य मंत्री सुशील कुमार मोदी भी तो मुख्य मंत्री की हां में हां ही मिलाते हैं । जैसे ही मुख्य मंत्री डॉक्टर से दिल्ली में जा कर मिल आते हैं । उप मुख्य मंत्री आदतन गदगद हो जाते हैं । इसके कारण कभी कभी ही नहीं अकसर भद भद हो जाते हैं । हालांकि उप मुख्य मंत्री को भी एक बीमारी लगा दी है मुख्य मंत्री ने । बहुत जल्द ही उप मुख्य मंत्री अपना इलाज कराने दिल्ली जाया करेंगे । लौट कर सबके सामने झेंपी मुस्कराहट बिखराएंगे ।

जरा प्रॉटोकॉल का पालन किया जाए । पहले उप मुख्य मंत्री की बीमारी बता दें । उनकी बीमारी का नाम है पर्यावरण एवं वन विभाग , देश भर में खराब – पर बिहार यहां भी सबका बाप । इसका जूनियर डॉक्टर जयराम रमेश जब बड़े डॉक्टर की नहीं सुनता तो मोदी जी का सुनेगा । और मुख्य मंत्री की बीमारी है दिल्ली जा कर बड़ा डॉक्टर मनमोहन सिंह से मिलना । बड़े डॉक्टर के सामने मुख्य मंत्री को अपनी विरासत याद आती है । बौद्ध भिक्षु हो जाते हैं । है कोई इलाज इस एक नीतीशीय बीमारी का ।