एड्स रोगी सुरक्षा गार्ड - सरकारी जन लोक पाल
एड्स रोगी सुरक्षा गार्ड - सरकारी जन लोक पाल
सुरेश शर्मा
केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए ऐसा लोकपाल बनाने की तैयारी की है जो - 2 G स्पेक्ट्रम और कामनवेल्थ गेम्स जैसे हजारों करोड़ के घोटालों में लिप्त मगरमच्छों पर कोई करवाई नहीं कर सकेगा I यह लोकपाल भ्रष्टाचार के महासागर में गोताखोरी के अभ्यस्त तैराकों पर भी कोई कारवाई नहीं कर सकेगा क्योंकि वे इसकी जाँच के दायरे में ही नहीं लाये जायेंगे I छुटभैये घोटालेबाज जरूर इसके दायरे में आयेंगे किन्तु उन्हें भी घबराने की जरूरत नहीं क्योंकि यदि दोष सिद्ध भी हुआ तो कांग्रेस सरकार के लोकपाल अधिकतम 6 माह की सजा दे संकेगे i हाँ भ्रष्टाचार की शिकायत करने वालों को जरूर भयभीत होना चाहिए क्योंकि उनके लिए भ्रष्टाचारी से 4 गुना ज्यादा अर्थात 2 साल की सजा का प्रावधान किया गया है i कुल मिलाकर यह सरकारी लोकपाल ऐसे एड्स रोगी की भांति होगा जिसकी शक्ति क्षीण हो चुकी है किन्तु उसे फिर भी सुरक्षा गार्ड की ड्यूटी भुगतनी होगी i
संसद में पेश किये गए लोकपाल विधेयक के मसौदे को देख कर साफ लगता है कि सरकार भ्रष्टाचार मिटाना ही नहीं बल्कि मिटाने के संकल्प का दिखावा करना चाहती है अन्यथा भ्रष्टाचारी कोई भी कितने बड़े पद पर हो उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए का सिद्धांत लोकपाल विधेयक के मसौदे में जरूर समाहित किया जाना चाहिए था i किन्तु जिस तरह से प्रधानमंत्री, उनके अधीन मंत्रालय, न्यायपालिका के जजों, सांसदों और बड़े अधिकारियों को बाहर कर दिया है, उससे सरकार की नीयत संदिग्ध है i इसी के साथ भ्रष्टाचार पर कोहराम मचाने वाली भाजपा का भी चाल, चरित्र और चेहरा एक बार फिर उजागर हो गया जब इस विधेयक के विरोध की मात्र औपचारिकता ही इस तथाकथित राष्ट्रवादी दल ने संसद में निभायी इस कारण सरकार कामयाब हुई i
यह मौजूदा संसदीय लोकतंत्र की विडम्बना है कि सत्ता और प्रमुख विपक्षी दल मिल कर कोई भी फैसला कर ले और उसे जनता पर थोप दें i अन्यथा भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आज देश की जनता अन्ना हजारे के साथ है और सिविल सोसायटी द्वारा प्रस्तावित जन लोकपाल विधेयक को लागू करना चाहती है तो सरकार, भाजपा अथवा इससे असहमत राजनैतिक दलों का विरोध महज़ इसलिए है कि उन्हें महासागर में तैराकी का आनंद नहीं मिल सकेगा i
वास्तव में सरकार द्वारा पेश किये गए लोकपाल विधेयक से जनता पूरी तरह निराश है i भ्रष्टाचार पर लगाम की उम्मीदें टूट चुकी हैं अब 16 अगस्त से प्रस्तावित अन्ना के अनशन पर सरकार की प्रतिक्रिया देखनी होगी यदि भारी जनसमर्थन के दबाव में सरकार विधेयक के मसौदे में प्रभावशाली बदलाव के लिए तैयार हो गयी तो भी जनता को कुछ राहत संभव है


