एनजीओ के खिलाफ जनसंगठनों का विरोध प्रदर्शन
एनजीओ के खिलाफ जनसंगठनों का विरोध प्रदर्शन
लोकेश मालती प्रकाश
भोपाल। शिक्षा अधिकार की लड़ाई में स्वयंसेवी संस्थाओं (एनजीओ) की जनविरोधी व नकारात्मक भूमिका के खिलाफ शिक्षा अधिकार मंच, भोपाल व इसके सहयोगी संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन एम.पी. नगर स्थित एक होटल के बाहर किया गया जहां पर ‘आरटीई फोरम’ व अन्य कई एनजीओ की बैठक चल रही थी। मंच के कार्यकर्ताओं ने बताया कि जन-विरोधी चरित्र के एनजीओ में अग्रणी ‘आरटीई फोरम’ प्रदेश में अपने पांव पसारने की योजना बना रहा है। इस तरह के दलाल चरित्र वाले एनजीओ शिक्षा अधिकार विरोधी ‘शिक्षा अधिकार कानून’ का समर्थन तो करते ही हैं साथ ही बहुपरती शिक्षा व्यवस्था, शिक्षा में मुनाफाखोरी, कारपोरेट पूंजी के बढ़ते दखल व नवउदारवादी सुधारों जैसे महत्वपूर्ण मसलों को सतही व भ्रामक तर्कों से तोड़-मरोड़कर और शिक्षा में बराबरी और न्याय की बजाय नवउदारवादी ‘समावेषण’ जैसे जुमले उछाल कर शिक्षा की लड़ाई में भटकाव लाने और उसे तोड़ने का काम भी करते हैं।
प्रदर्शन कर रहे जन-संगठनों अखिल भारतीय क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन (एआइआरएसओ), भोपालय ऑल इण्डिया स्टूडेंट्स फेडेरेशन (एआइएसएफ), भोपाल, ऑल इण्डिया यूथ फेडेरेशन (एआइवाईफ), भोपाल, क्रांतिकारी भारत नौजवान सभा (आरवाइएफआइ), भोपाल, भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन, मध्य प्रदेश बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन, मिल्ली काउंसिल फार एजुकेशन, भोपाल, मुस्कान, सिटी ट्रेड यूनियन काउंसिल, भोपाल, सिटिजंस वेलफेयर फोरम, के कार्यकर्ताओं ने कहा कि दरअसल शिक्षा अधिकार कानून, 2009 देश के हर बच्चे को बिना किसी भी तरह के भेदभाव के पूरी तरह मुफ्त और समतामूलक गुणवत्ता की शिक्षा देने के लिए नहीं बल्कि सरकारी स्कूल व्यवस्था को बरबाद कर शिक्षा के बाजारीकरण और मुनाफाखोरी को बढ़ावा देने के लिए बना है। यही कारण है कि इस कानून के लागू होने के तीन साल बाद भी केंद्र व राज्य सरकारें इसके घटिया मापदंडों को भी नहीं लागू कर रही हैं बल्कि तेजी से सरकारी स्कूलों की तालाबंदी/ विलयन/ नीलामी/ आउटसोर्सिंग आदि के माध्यम से इन्हें निजी हाथों में सौंप रही हैं। असलियत यह है कि यह कानून देश की जनता के बुनियादी हकों को खत्म कर जन-जंगल-जमीन और ज्ञान के नवउदारवादी लूट को बढ़ावा देने की व्यवस्था का ही एक हिस्सा है।
प्रदर्शनकारियों ने आह्वान किया कि यह समय है कि वे सभी लोग जो भेदभाव से मुक्त, समतामूलक और पूरी तरह मुफ्त शिक्षा के अधिकार व राज्य द्वारा वित्त-पोषित समान स्कूल व्यवस्था के निर्माण की लड़ाई लड़ रहे हैं, सावधान हो जाएं और ऐसे जन-विरोधी व गद्दार संस्थाओं को जनता के सामने बेनकाब कर दें। और साथ ही अपने उन साथियों को भी सावधान करें जो अब तक ‘शिक्षा अधिकार कानून, 2009’ के असल चरित्र और इसमें एनजीओ की भूमिका को लेकर जनपक्षधर समझ विकसित नही कर पाए हैं।
ध्यान देने की बात है कि इन एनजीओ के इशारे पर इस शांतिपूर्ण कार्यक्रम को स्थानीय पुलिस ने चुनाव आचार संहिता के बहाने से जबरन बंद कराया।
इस प्रदर्शन में जे.पी.दूबे (मध्य प्रदेश बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन), मो. अफ्फाक (सिटिजंस वेलफेयर फोरम), विजय कुमार (क्रांतिकारी भारत नौजवान सभा), विवेक (अखिल भारतीय क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन), आशीष स्ट्रगल (ऑल इण्डिया स्टूडेंट्स फेडेरेशन) व अन्य लोग मौजूद थे।


