एम्प्लाइमेंट एक्सचेंज नहीं होता है विश्वविद्यालय — प्रो. रतन लाल
एम्प्लाइमेंट एक्सचेंज नहीं होता है विश्वविद्यालय — प्रो. रतन लाल
एम्प्लाइमेंट एक्सचेंज नहीं होता है विश्वविद्यालय — प्रो. रतन लाल
"महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय शिक्षक संघ" मोतीहारी, ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाया है कि महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरविन्द कुमार अग्रवाल की फर्जी पीएच.डी. और अवैध नियुक्ति समेत कैग की नमूना जाँच में सामने आये कुलपति के तमाम तरह के भ्रष्टाचारों और अनैतिक कृत्यों के खिलाफ लोकतांत्रिक ढंग से अपने शैक्षणिक दायित्वों का निर्वाह करते हुए न्याय की गुहार लगाने वाले विश्वविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों पर कुलपति और उनके गुर्गों द्वारा लगातार जानलेवा हमले और हमलों की धमकियाँ जारी हैं। शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्त करने का डर दिखाया जा रहा है। उन्हें हिंदी दिवस मनाने से रोका गया है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुठाराघात करते हुए विगत 17 सितंबर को शिक्षक संघ को प्रतिरोध व्याख्यानों के पहले चरण के आयोजन तक को रोकने की कोशिश की गई, बावजूद कुलपति की तानाशाही के बाद भी शिक्षक संघ द्वारा बिल्कुल शांतिपूर्ण तरीके से 17 सितंबर को पटना विश्वविद्यालय में ‘उच्च शिक्षा और लोकतंत्र’ विषय पर इतिहास की प्रोफेसर और पीपुल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टीज़ की बिहार इकाई की अध्यक्षा प्रो. डैजी नारायण और वरिष्ठ पत्रकार श्री अनिल चमड़िया जी के व्याख्यान आयोजित किये गये।
लोकतंत्र और शिक्षा : चुनौतियाँ और संभावनाएँ
विज्ञप्ति में बताया गया है कि प्रतिरोध व्याख्यानों की उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए 24 सितंबर को दोपहर दूसरे चरण में संघ द्वारा चार व्याख्यानों का आयोजन किया गया जिनका विषय था – ‘लोकतंत्र और शिक्षा : चुनौतियाँ और संभावनाएँ।" जिसके मुख्य वक्ता थे – राजनीतिशास्त्र के प्रसिद्ध विद्वान और देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ के भूतपूर्व अध्यक्ष प्रो. एस.एन. मालाकार। दूसरे वक्ता थे – पूर्व पुलिस उपमहानिरीक्षक और वर्तमान में सर्वोच्च अदालत में अधिवक्ता के रूप में मानवाधिकारों के लिए कार्यरत श्री राकेश सिन्हा। तीसरे वक्ता के रूप में लब्धप्रतिष्ठित विद्वान और दलित कार्यकर्ता दिल्ली विश्वविद्यालाय के शिक्षक प्रो. रतनलाल ने कार्यक्रम में शिरकत की। वे एक इतिहासकार के रूप में तो जाने ही जाते हैं किंतु उससे ज्यादा हाशिये के तबकों की एक जुझारू आवाज़ के रूप में भी पहचाने जाते हैं। कार्यक्रम के एक और महत्वपूर्ण वक्ता थे – हरिश्चंद्र चौधरी।
दलित विरोधी शिक्षा का निजीकरण
अपने व्याख्यान में सार्वजनिक शिक्षा संस्थानों की व्यवस्थित हत्या की साजिशों पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रो. रतन लाल ने शिक्षा के निजीकरण को दलित विरोधी बताया। उन्होंने विश्वविद्यालय को चमचागिरी का केंद्र बना देने वाले कुलपतियों की आलोचना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में वैचारिक बहुलता का सम्मान होना चाहिए। कैम्पस सलेक्शन के पीछे की बाज़ारवादी ताकतों की जनविरोधी राजनीति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि विश्वविद्यालय एम्प्लाइमेंट एक्सचेंज नहीं होता है।
राष्ट्रविरोधी पूंजीवादी ताकतों को चेतावनी
प्रो. एस.एन.मालाकार ने अंगूठाकटवा द्रोणाचार्यों का सम्मान करने वालों की दलित विरोधी मनुवादी मानसिकता को आड़े हाथों लेते हुए भारतीय दर्शन की विभिन्न परंपराओं के संदर्भ में बताया कि कैसे हमारे यहाँ शास्त्रों के नाम पर शूद्रों और स्त्रियों को शिक्षा से वंचित रखने की साजिशें होती आई हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के व्यवसाय और संपत्ति को बेचने वाले लोग राष्ट्र की वास्तविक समस्याओं से आम जन का ध्यान हटाने के लिए राष्ट्रवाद का झुनझुना हमें पकड़ाते रहते हैं। प्रो. एस.एन.मालाकार ने अपने व्याख्यान में शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रविरोधी पूंजीवादी ताकतों को चेतावनी दी कि बेरोजगार समाज की आरक्षी सेना होते हैं।
आज कॉरपोरेट द्वारा मैनेज्ड डेमोक्रेसी में रहने को मजबूर - राकेश सिन्हा
व्याख्यान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री राकेश सिन्हा ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारी समस्या यह है कि बिना पर्याप्त तैयारी के सामंती समाज से सीधे लोकतांत्रिक समाज में हमारा रूपांतरण कर दिया गया है। उन्होंने अंबेडकर को उद्धृत करते हुए बताया कि बिना आर्थिक-सामाजिक बराबरी के हमें राजनीतिक समानता संविधान द्वारा प्रदान कर दी गई है। हम आज कॉरपोरेट द्वारा मैनेज्ड डेमोक्रेसी में रहने को मजबूर हैं।
राकेश सिन्हा ने सावधान किया कि शिक्षा को कॉरपोरेट हाथों में नहीं सौंपना चाहिए क्योंकि कॉरपोरेट गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को खत्म करने का लक्ष्य लेकर चलता है ताकि उसके लूटतंत्र पर पढ़-लिखकर व्यक्ति सवाल न करे।
श्री हरिश्चंद्र चौधरी ने आज की किताबी शिक्षा के बरक्स जिंदगी की शिक्षा पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को भी गाँधी की तरह जनता से जुड़ना होगा। गाँधी की तरह ही शिक्षकों को हिंसक ताकतों से निडर होकर सत्य की राह पर चलना चाहिए।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इन प्रतिरोध व्याख्यानों के माध्यम से हम हिंसक और भ्रष्ट कुलपति को संदेश देना चाहते हैं और गाँधी की कर्मभूमि चंपारण की इस धरती के वाशिंदों को भी बताना चाहते हैं कि कुलपति चाहे हम पर जितने जानलेवा हमले करवाये और चाहे जितनी धमकियाँ हमें दिलवाये किंतु हम इस तानाशाह के किसी भी हमले और किसी भी धमकी से नहीं डरने वाले और हर हमले के जबाव में, हर हत्या के प्रत्युत्तर में इसी प्रकार शांतिपूर्ण ढंग से प्रतिरोध व्याख्यान आयोजित करते रहेंगे क्यों कि हम गाँधी में विश्वास करने वाले, उनकी अहिंसा और सत्याग्रही चेतना में विश्वास करने वाले लोग हैं। हम डॉ. अरविंद अग्रवाल की जैसे षड्यंत्रकारी और हिंसक नहीं हो सकते। इन व्याख्यानों में प्रवाहित होने वाले ज्ञानामृत के आस्वादन हेतु हम आप सब पत्रकारों को भी आमंत्रित करते हैं।
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने इसी विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार पर माब लिंचिंग के माध्यम से जानलेवा हमला किया गया, डॉ. संजय कुमार आज भी इलाजरत है। उनपर हमले करवाने को लेकर कुलपति डॉ. अरविंद कुमार अग्रवाल को आरोपी बनाया गया है।
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