एस्सार के साथ मोइली का प्रेम प्रसंग फिर उजागर
एस्सार के साथ मोइली का प्रेम प्रसंग फिर उजागर
मोईली द्वारा महान जंगल को दिए मंजूरी को ग्रीनपीस ने रद्द करने की मांग की
नई दिल्ली, 16 अप्रैल। यूपीए सरकार के समय हुए करोड़ों रुपये का एक और घोटाला सामने आया है। आज आए ताजे सबूतों ने उजागर किया है कि किस तरह पर्यावरण और पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोईली के द्वारा एस्सार को फायदा पहुंचाया गया। मोईली ने एस्सार को मुंबई तट से दूर 52, 000 करोड़ की रत्ना ऑयल फील्ड देने में समर्थन दिया।
ग्रीनपीस के जलवायु और ऊर्जा कैंपेन की प्रमुख विनुता गोपाल ने कहा कि, "इस नये सबूत से स्पष्ट हो जाता है कि मोईली ने एस्सार को अंतिम समय में मंजूरी दिया ताकि कोयला मंत्रालय द्वारा आवंटन रद्द करने की समय सीमा को पूरा किया जा सके। मोईली के पूर्ववर्ती मंत्रियों के अस्वीकृति को देखते हुए मंजूरी के निर्णय पर दुबारा गौर किया जाना चाहिए और एक स्वतंत्र, बेदाग निर्णय निर्माता द्वारा एक वास्तविक उद्देश्य के आधार पर लिया जाय। तबतक निकासी निर्णय बातिल और शून्य माना जाना चाहिए"।
खबर है कि बीती 12 फरवरी को वीरप्पा मोईली ने महान कोल लिमिटेड को दूसरे चरण का क्लियरेंस दिया था। महान कोल लिमिटेड एस्सार व हिंडाल्को का संयुक्त उपक्रम है जिसे सिंगरौली के महान जंगल में खनन के लिए क्लियरेंस दिया गया है। विनुता गोपाल ने कहा कि उस समय ग्रीनपीस ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर मोईली के इस्तीफे की मांग की थी।
ग्रीनपीस द्वारा एस्सार को प्रस्तावित कोयला खदान के विरोध के फलस्वरूप कंपनी ने ग्रीनपीस तथा महान के ग्रामीणों पर 500 करोड़ का मानहानि तथा बोलने पर प्रतिबंध का मुकदमा बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल किया था। साथ ही, कंपनी ने ग्रीनपीस पर मोईली से इस्तीफे की मांग करने पर रोक लगाने की मांग भी की थी। वीरप्पा मोईली को मनमोहन सरकार के अंतिम दिनों में पर्यावरण मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था जबकि वो पहले से ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को संभाल रहे थे। दो महीनों की छोटी सी अवधि में एक ही मंत्री द्वारा रत्ना तेल क्षेत्र की मंजूरी के साथ ही महान वन मंजूरी हितों के टकराव का एक स्पष्ट उदाहरण है। विनुता गोपाल ने कहा कि मंत्री के नियुक्ति के समय से ही ग्रीनपीस इस बात की चेतावनी दे रही थी।


