एस्सार वीरप्पा मोईली को बचाना क्यों चाहती है? : ग्रीनपीस
एस्सार वीरप्पा मोईली को बचाना क्यों चाहती है? : ग्रीनपीस
अविनाश कुमार चंचल
मुंबई, 7 जनवरी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें एस्सार ने ग्रीनपीस द्वारा पर्यावरण व वन मंत्री वीरप्पा मोईली से माँगे जा रहे इस्तीफे पर रोक लगाने की माँग की थी। ग्रीनपीस लगातार पर्यावरण चिंताओं को दरकिनार कर प्रोजेक्टों को स्पीडी क्लियरेंस दे रहे मोईली से इस्तीफे की माँग कर रहा है। यह केस 22 जूलाई 2014 को ग्रीनपीस द्वारा मुंबई स्थित एस्सार मुख्यालय पर प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। ग्रीनपीस ने एस्सार व हिंडाल्कों के संयुक्त उपक्रम महान कोल लिमिटेड को प्रस्तावित कोयला खदान को रद्द करने की माँग की थी जिससे लाखों लोगों को जंगल और जमीन से विस्थापित होने से बचाया जा सके। फिलहाल महान कोल ब्लॉक कोयला घोटाले की जाँच कर रही सीबीआई की जद में है।
पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जल्दबाजी में दिये जा रहे पर्यावरण क्लियरेंस को देखते हुये डर जताया जा रहा है महान कोल ब्लॉक को भी आने वाले दिनों में दूसरे चरण का क्लियरेंस दे दिया जायेगा। दूसरी तरफ कम्पनी वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 2012 में दिये गये शर्तों को तथा वनाधिकार कानून को लागू करने में भी असफल रही है।
अदालत की कार्यवाही पर जवाब देते हुये ग्रीनपीस की कैंपेनर अरुंधती मुत्थू ने कहा कि “एस्सार हर हाल में गलत तरीके से पर्यावरण क्लियरेंस दे रहे वीरप्पा मोईली को बहस से बचाना चाहती है। एक निजी कम्पनी द्वारा केन्द्रीय मंत्री के पक्ष में आना काफी संदिग्ध है। यहाँ सवाल उठाने की जरूरत है कि क्यों एस्सार माननीय न्यायालय में मोईली पर बात न करने की वकालत कर रही है? क्या यह इसलिए कि वे जानते हैं कि मोईली कम्पनी के पक्ष में निर्णय लेंगे” ?
एस्सार ने महान जंगल को बचाने के लिये शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले ग्रीनपीस और महान संघर्ष समिति पर 500 करोड़ की मानहानि तथा चुप रहने का मुकदमा दायर किया है। महान संघर्ष समिति सदस्यों ने भी कंपनी पर धोखे का दोष मढ़ा है जिसे सामाजिक संगठनों और जनजातीय मंत्रालय केसी देव द्वारा चिन्हित किया गया था। देव ने महान के ग्रामीणों के आरोपों की जाँच करवाने के लिये मध्यप्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को चिट्ठी भी लिखी थी। (1) मुत्थू आगे बताती हैं कि “एस्सार लोगों की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है और अब वो सरकार के खिलाफ उठे आवाज को भी रोकना चाहती है। यह लोकतांत्रिक मर्यादा और अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ भी है। हम लोग मजबूती से इसका विरोध करेंगे”।
ग्रीनपीस ने एस्सार को प्रस्तावित कोयला खदान को रद्द करने के साथ ही पर्यावरण की कीमत पर स्पीडी क्लियरेंस बांट रहे वीरप्पा मोईली के इस्तीफे की माँग की।


