नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार के मुखिया भले ही जापान जाकर गंगा को साफ करने का बीड़ा उठा रहे हों पर सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि गंगा की सफाई को लेकर केंद्र सरकार का जो एक्‍शन प्‍लान है, उससे आने वाले 200 सालों में भी ऐसा नहीं किया जा सकता।
केंद्र सरकार की योजनाओं की आलोचना करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि वह तीन हफ्तों के अंदर गंगा की सफाई से जुड़ा चरणबद्ध प्‍लान, पावर प्‍वॉइंट प्रेजेंटेशन बनाकर पेश करे।
बुधवार को सुनवाई के दौरान सरकार को लताड़ते हुए न्यायालय ने कहा, आपका एक्‍शन प्‍लान देखकर ऐसा लगता है कि गंगा 200 साल बाद भी साफ नहीं होगी। आपको ऐसे कदम उठाने चाहिए, जिससे गंगा को अपनी खोई हुई गरिमा वापस मिले और आने वाली पीढ़ी इसे देख सके। हमें नहीं लगता हम ऐसा होते देख पाएंगे भी कि नहीं। केंद्र सरकार की ओर से 2500 किमी में फैली इस नदी की सफाई पर दिए गए हलफनामे को न्यायालय ने अत्यधिक ब्‍यूरोक्रेटिक माना।
न्यायालय ने कहा, "हम मुद्दे को लेकर बनाई गई कमेटियों और दूसरी गहरी बातों में नहीं जाना चाहते। हम सिर्फ यह जानना चाहते हैं कि एक आम आदमी गंगा की सफाई की प्रक्रिया कैसे समझे। अच्‍छा यही होगा कि आप हमें एक पीपीटी प्रेजेंटेशन दिखा सकें। "
सरकार की ओर से बहस करते हुए सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा था कि इलाहाबाद में गंगा सबसे ज्‍यादा प्रदूषित है। उन्‍होंने कहा कि जब वह इलाहाबाद गए तो उन्‍हें डुबकी लगाने को कहा गया, लेकिन उन्‍होंने इसके प्रदूषित होने की वजह से इनकार कर दिया। बता दें कि सरकार ने अपने हलफनामे ने कहा था कि वह गंगा की सफाई को लेकर प्रतिबद्ध है और यह उसकी सर्वोच्‍च प्राथमिकता में शामिल है। हलफनामे के मुताबिक, आईआईटी के कुछ विशेषज्ञों से इस संदर्भ में मदद मांगी गई है और साल के अंत तक योजना को आखिरी रूप दे दिया जाएगा।
-0-0-0-0-
गंगा की सफाई को लेकर केंद्र सरकार का एक्‍शन प्‍लान, The Action Plan of the central government to clean up the Ganga,Supreme Court Raps Centre on Clean Ganga,Plan Will Take 200 Years to Clean Ganga,गंगा की सफाई से जुड़ा चरणबद्ध प्‍लान,पावर प्‍वॉइंट प्रेजेंटेशन,सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार,गंगा प्रदूषण,Ganga pollution,200 साल बाद भी साफ नहीं होगी गंगा, सरकार को डाँटा शीर्ष अदालत ने