उपन्यासकार नूर जहीर ने पाकिस्तान के समाजी हालात पर रोशनी डाली
-प्रलेस की इंदौर इकाई ने किया उपन्यास अंश के पाठ का आयोजन
- अभय नेमा
इंदौर। मशहूर लेखिका और प्रगतिशील लेखक संघ की सक्रिय सदस्य नूर जहीर ने अपने मशहूर उपन्यास -अपना खुदा एक औरत- के चुनिंदा अंशों के पाठ किया। उन्होंने हाल ही में संपन्न अपनी पाकिस्तान यात्रा के संस्मरण भी साथियों से साझा किए। प्रगतिशील लेखक संघ की इंदौर इकाई की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम 22 जून रविवार को सुबह 11 बजे अहिल्या केंद्रीय लाइब्रेरी, रीगल चौराहे के केंद्रीय कक्ष में आयोजित हुआ था।
अपना खुदा एक औरत उपन्यास मूलतः अंग्रेजी में नूर जहीर ने लिखा है। इसका उर्दू और हिंदी तर्जुमा भी उन्हीं ने किया है। उपन्यास में हिंदुस्तान की महिलाओं को उनकी समाजिक-आर्थिक, राजनीतिक परिस्थितियों के बरक्स देखने का प्रयास किया गया है। उपन्यास में शाहबानो प्रकरण के पहले और बाद के बदलते सामाजिक और राजनीतिक हालातों की विवेचना करते हुए प्रगतिशील आंदोलन का विश्लेषण भी किया गया है।
हमारें यहां हिंदू महिलाओं को तलाक या विवाह विच्छेद के बाद पति की संपत्ति में अधिकार के साथ जीवन यापन योग्य मुआवजे का हक है, लेकिन सवाल जब मुस्लिम महिला का आता है तो पर्सनल लॉ के चलते उसके हक उसे नहीं दि्ए जाते हैं। हालांकि एक उच्च वर्गीय, शिक्षित हिंदू महिला को तमाम अधिकार मिलने के बाद भी प्रताड़ना और शोषण का शिकार होना पड़ता है, यह भी उपन्यास में बताया है। हक तो दिए गए हैं लेकिन समाज औरत को बराबरी का दर्जा देने की मानसिकता नहीं बना पाया।
प्रोग्रेसिव पर्टियों समेत राजनीतिक दलों की औरत विरोधी मानसिकता का जिक्र किया है। एक समान नागरिक संहिता के मसले को भी एक मुस्लिम महिला के नजरिए और चुनावी राजनीति की भूल भुलैया में प्रगतिशील ताकतों द्वारा इस मुद्दे पर चुप्पी की बात को भी उपन्यास में बड़े प्रभावी ढंग से उठाया गया है।
उपन्यास का उर्दू संस्करण हिंदु्स्तान में प्रकाशित करने के लिए कुछ प्रकाशकों ने आरंभ में सहमति दी थी, लेकिन उपन्यास के प्रगतिवादी तेवर देखकर वे इसे प्रकाशित करने का जोखिम नहीं ले सके। उपन्यास को पाकिस्तान के सांझ पब्लिकेशन ने प्रकाशित किया है। अंग्रेजी और हिंदी में उपन्यास को हमारे देश में हार्पर कालिंस ने प्रकाशित किया है। उर्दू तर्जुमे का विमोचन पाकिस्तान के कई शहरों में हुआ।
कार्यक्रम में नूर जहीर ने फैज द्वारा एलिस के नाम लिखे गए पत्रों का भी वाचन किया। दुनिया को बदलने के जज्वे और प्रेम के रोमांच से लबरेज पत्रों में फैज की लेखनी से नूर से रोचक अंदाज में साथियों को परिचित कराया।
नूर इस उपन्यास के विमोचन और अध्ययन के सिलसिले में तकरीबन दो माह पाकिस्तान रहीं और उन्होंने पाकिस्तान के विभिन्न इलाकों में घूम कर वहां के समाजी हालातों की पड़ताल की। नूर ने बताया कि पाकिस्तान में सूफियाना परंपरा कम्युनिस्ट दर्शन से जुड़ी सूफी परंपरा बुद्धिज्म की ओर ले जाती है जो नास्तिकता की ओर ले जाती है। उन्होंने सिंध में सर्वधर्म समभाव की साझी विरासत का जिक्र करते हुए कई उदाहरण दिए। उन्होंने बताया कि गांधीवादी निर्मला देशपांडे की अस्थियों की राख को उनकी इच्छा के अनुसार सिंध (इंडस) नदी में विसर्जित किया गया। इस मौके पर विशेष आयोजन रखा गया और दिन में नात गाई गई।
उन्होंने बताया कि लोकतंत्र के वावजूद पाकिस्तान में सेना और आईएसआई प्रगतिशील ताकतों का सख्ती से दमन जारी है, लेकिन इन विपरीत हालातों में भी वहां वामपंथी रुझान और प्रगतिवादी ताकतें खुल कर मोर्चा ले रही हैं। हाल ही में पाकिस्तान में क्वेटा से कराची तक बलूचिस्तान के 500 से ज्यादा लापता युवकों की तलाश के मसले पर एक मार्च का आयोजन वहां के वामपंथी नेता मामा कदीर ने किया था। इस मार्च में बाकी सब औरते थीं। 1400 किमी के इस मार्च को द ग्रेट रन का नाम दिया था। पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में इसका जोरदार स्वागत किया गया। इस जत्थे के खाने-पीने और ठहरने की व्यवस्था बड़े उत्साह के साथ लोगों ने की।
नूर ने बताया कि मानवाधिकार कार्यकर्ता सलमान तासीर की हत्या के मामले में कोर्ट में सुनवाई चल रही है। हत्यारे के साथ हमेशा दो से तीन हजार समर्थक ढोल ताशे के साथ हर पेशी पर मौजूद रहते हैं, लेकिन अब तासीर के समर्थक भी एकजुट हुए हैं और करीब 30-40 लोग पेशी पर पहुंचते हैं। ये 30-40 लोग तीन हजार कट्टर लोगों के सामने बड़ी दृढ़ता के साथ प्रगतिशील ताकत बन कर खड़े हुए हैं, यह बड़ी बात है।
पाकिस्तान में असंगठित क्षेत्रों के मजदूर, टैक्सी ड्राइवर, और वर्कर्स यूनियनें अपने हकों के लिए लामबंद हैं, जो कुछ एनजीओ की मदद से काम कर रही हैं।
कार्यक्रम में नूर जहीर के साथ बातचीत का सत्र भी रखा गया, जिसमें साथियों ने मुस्लिम समाज के भीतर प्रगतिशीलता के बारे में कई सवाल पूछे। कार्यक्रम में नूर का परिचय कराया प्रलेस के राज्य महासचिव विनीत तिवारी ने। कार्यक्रम का संचालन अभय नेमा ने किया। कार्यक्रम में रशीद इंदौरी, जावेद आलम, सारिका, शोभना जोशी, तपन बनर्जी, प्रदीप मिश्र, रजनीरमण शर्मा, केसरी सिंह चिढ़ार, ब्रजेश कानूनगो आदि मौजूद थे।