Kanhaiya dares evil political forces of this country !
नई दिल्ली। जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार का एक और भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
7 मार्च को यह भाषण जेएनयू में छात्र संघ की बैठक से पहले दिया गया है, जिसमें कन्हैया कुमार मुख्य रूप से निम्न बातें कह रहे हैं -

हमको देंगे तो सब्सिडी और अमीरों को देंगे तो इंसेंटिव, ये नहीं चलेगा...
जेएनयू को कितनी सब्सिडी है और प्रधानमंत्री की हवाई यात्राओं पर कितना खर्च है, ये सामने आना चाहिए
हम लोगों को लग रहा था कि तोड़े दिनों बाद मीडिया का माहौल कुछ ठण्डा हो जाएगा, उसे कोई और इश्यू मिल जाएगा, लेकिन लग रहा है भाजपा को उत्तर प्रदेश चुनाव लड़ने के लिए दूसरा कोई मुद्दा नहीं है।
जेएनयू एक यूनिवर्सिटी है, जहां कमजोर तबके के लोग पढ़ने आते हैं। देखते-देखते जेएनयू को खलनायक बना दिया जाता है। लगता है देश में सारी समस्याएं खत्म हो गई हैं, उत्तर प्रदेश में इस बार चुनाव गरीबी भुखमरी पर नहीं लड़ा जाएगा, इस बार इस बात पर लड़ा जाएगा कि देश में एक संस्थान है जेएनयू, जहां देशद्रोही रहते हैं, उन देशद्रोहियों को निकालने के लिए भाजपा इस बार उत्तर प्रदेश में अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती है। इस तरीके का सिचुएशन बनाया जा रहा है।
ऐसे माहौल में हमको लगता है, हम सब लोगों को यूनाइट होना पड़ेगा और एककलेक्टिव डिसीज़न लेना पड़ेगा।
मीडिया की भाषा में देखते-देखते केंद्र सरकार मोदी सरकार बन जाता है। पूरी व्यवस्था को एक व्यक्ति के पीछे केंद्रित कर दिया गया है, हम इस केंद्रीकरण के ख़िलाफ हैं।
मुझे टारगेट करके तुम जेएनयू को टारगेट कर रहे हो और जेएनयू को टारगेट करके तुम लोकतंत्र और संविधान को टारगेट कर रहे हो, यह तुम्हारी साज़िश है। इस साज़िश को हम नाकाम करेंगे और हम तुम्हें बार-बार एक ऑपोज़ीशन की तरह देखते हैं, जो लोग हमारे इस मॉडलके प्रति विरोध रखते हैं, जिन्हें लगता कि जेएनयूसचमुच गड़बड़ हो गया है, हमें लगता है उन्हें भी स्पेस देना चाहिए, उनसे भी बात करना चाहिए कि आपका नेशनलिज़्म का इमेजिनेशन क्या है, आप देशभक्ति कैसे समझते हैं, हम ये सुनना चाहते हैं। हम ये चाहते हैं कि लोकतांत्रिक वैल्यूज़ जेएनयूमें अपनाएं और बताएं कि राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी होने का मतलब दूसरे की ज़बान काट लेना, दूसरे की गर्दन काट लेना नहीं होता है।

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