खबर मिली है कि बीती शाम को पुणे के नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ़ इण्डिया के परिसर में डॉ. नरेन्द्र दाभोलकर की स्मृति में नेशनल फिल्म एण्ड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के छात्रों द्वारा आयोजित एक सभा पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ताओं ने हमला बोल दिया जिसमें इस कार्यक्रम के आयोजक दो छात्र घायल हो गये। इस कार्यक्रम में आनन्द पटवर्धन के वित्तचित्र 'जय भीम कामरेड' का प्रदर्शन किया गया और कबीर कला मंच के कार्यकर्ताओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

मिली जानकारी के मुताबिक कार्यक्रम जब समाप्ति की ओर था उस वक़्त, रात के करीब 9 बजे, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ताओं का समूह कार्यक्रम स्थल पर पहुँचा और आयोजकों से उलझ गया। वे कार्यक्रम में कबीर कला मंच के भाग लेने का विरोध कर रहे थे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ताओं का कहना था कि कबीर कला मंच के कार्यकर्ता तो नक्सली हैं इसलिये इन्हें क्यों बुलाया गया है? उनके हमलावर रुख अख्तियार करने पर दो आयोजक घायल हो गये जिनमें से एक को सिर में चोट आयी है।

आरोप है कि वहाँ उपस्थित पुलिस ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक सिंह की छात्र शाखा द्वारा की जा रही मारपीट को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया।

ज्ञातव्य है कि पिछले दो वर्षों से महाराष्ट्र की एंटी टेरेरिज्म स्क्वाड (ए.टी.एस)माओवादी होने के आरोप लगाकर इस सांस्कृतिक संगठन के सदस्यों के पीछे पड़ी हुयी है।

ए.टी.एस के उत्पीड़न और झूठे मुकदमों के चलते उनके अनेक सदस्यों को महीनों जेल में गुजरना पड़ा। अनेकों परेशानियों को सहन करने के बावजूद ये जाबांज युवा संस्कृतिकर्मी जब अपनी अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता को त्यागने और पीछे हटने को तैयार नहीं है तो अब लगता है की धर्म के ये स्वयम्भू ठेकेदार भी उनके पीछे पड़ गये हैं।

(इनपुट व चित्र रेड टुलिप्स)