ग़दर पार्टी के संस्‍थापक बाबा सोहन सिंह भकना के जन्‍मदिवस पर उन्‍हें याद किया गया
जनचेतना की पुस्‍तक तथा लघु पत्रिका प्रदर्शनी का उद्घाटन
लखनऊ, 4 जनवरी। गिरि विकास अध्‍ययन संस्‍थान के निदेशक व 'वैकल्पिक आर्थिक सर्वेक्षण' ग्रुप के संस्‍थापकों में से एक प्रो. सुरिन्‍दर कुमार ने कहा है कि हर तरह की दकियानूसी, कट्टरपन, संकीर्णता और प्रतिगामी मूल्‍य-मान्‍यताओं के विरुद्ध वैचारिक आन्‍दोलन में पुस्‍तकों की बड़ी भूमिका है। आज जब ऐसी संस्‍कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है जो लोगों को पढ़ने, चिन्‍तन करने और सवाल उठाने से ही दूर कर रही है, तो अच्‍छी किताबों के प्रचार-प्रसार की ज़रूरत और बढ़ गई है।
वे आज यहाँ जनचेतना की पुस्‍तक तथा लघुपत्रिका प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित कर रहे थे। हज़रतगंज में आयोजित यह प्रदर्शनी 19 जनवरी तक चलेगी।
प्रो. सुरिन्‍दर कुमार ने कहा कि आज शिक्षा व्‍यवस्‍था और मुख्‍यधारा के मीडिया में सत्ता-प्रतिष्‍ठान द्वारा पोषित विचारों को उठाने पर बन्दिशें बढ़ती जा रही हैं, ऐसे में एक वैकल्पिक मीडिया का ताना-बाना खड़ा करना बहुत ही ज़रूरी है। प्रो. कुमार ने अमेरिका में रहने के दौरान ग़दर पार्टी की परम्‍पराओं और उससे जुड़े रहे लोगों के अपने अनुभव बताते हुए कहा कि ग़दरी शहीदों की विरासत को हमें आज आगे बढ़ाना होगा।
प्रदर्शनी में विभिन्‍न प्रकाशकों की पुस्‍तकों के साथ ही हिन्‍दी की दर्जनों लघु पत्रिकाओं के पिछले कई वर्षों के अंक भी उपलब्‍ध हैं।
'बातचीत' मंच से जुड़े आशीष कुमार सिंह ने इस मौके पर वैकल्पिक मीडिया के एक सशक्‍त माध्‍यम के तौर पर उभरे लघु पत्रिका आन्‍दोलन की चर्चा की और कहा कि आज गैर-व्‍यावसायिक‍ साहित्यिक पत्रिकाओं के बीच भी ए‍क अभिजात हिस्‍सा पैदा हो गया है। एक रूप में यह भी भारतीय मध्‍यवर्ग और बुद्धिजीवी तबके, जिनके बीच लघु पत्रिका आन्‍दोलन का आधार था, के एक हिस्‍से के अभिजातीकरण का ही द्योतक है।
कार्यक्रम के दौरान आज 4 जनवरी को ग़दर पार्टी के संस्‍थापक अध्‍यक्ष महान क्रान्तिकारी बाबा सोहन सिंह भकना को उनके 144वें जन्‍मदिवस पर याद किया गया।
राहुल फाउण्‍डेशन के सत्‍यम ने कहा कि ग़दर पार्टी के क्रान्तिकारियों ने भारतीय स्‍वतन्‍त्रता संग्राम में सबसे पहले धर्म को राजनीति से अलग करने और मेहनतकशों का राज क़ायम करने की बात की थी जिसे भगतसिंह ने आगे बढ़ाया था। उन शहीदों को आज भुला दिया गया है लेकिन उनकी बातें आज और भी अधिक प्रासंगिक हो गई हैं जब धर्म के नाम पर नफ़रत फैलाने और इतिहास को पीछे ले जाने वाली ताक़तें सत्ता की शह पर नये सिरे से आक्रामक हो उठी हैं।
'प्रत्‍यूष' की सांस्‍कृतिक टोली ने इस अवसर पर महेश्‍वर के गीत 'कल का गीत लिये होठों पर आज लड़ाई जारी है' और सफ़दर की कविता 'किताबें करती हैं बातें' की प्रस्‍तुति की।
प्रदर्शनी में प्रेमचन्‍द, राहुल सांकृत्‍यायन, निराला, फ़ैज़, शरत्चन्‍द्र, गोर्की, चेखव, तोल्‍सतोय, मार्क ट्वेन, लू शुन आदि भारतीय और विदेशी लेखकों की कृतियाँ, चुनिन्‍दा समकालीन साहित्‍य, भारतीय और अन्‍तरराष्‍ट्रीय क्रान्तिकारी आन्‍दोलन का वैचारिक साहित्‍य, भगतसिंह और उनके साथियों के जीवन और विचार, इतिहास, राजनीति, दर्शन, मीडिया, संस्‍कृति आदि पर उत्‍कृष्‍ट पुस्‍तकों के अतिरिक्‍त बाल साहित्‍य का अलग खण्‍ड शामिल किया गया है। कविताओं और उद्धरणों पर बने कलात्‍मक पोस्‍टर व कार्ड भी प्रदर्शनी का एक आकर्षण हैं। प्रदर्शनी स्‍थल पर 'जनस्‍वर' नाम से एक बड़ा बोर्ड लगाया गया है जिस पर प्रति दिन किसी विषय पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ आमन्त्रित की जायेंगी। प्रदर्शनी की अवधि के दौरान बीच-बीच में कविता पाठ, पुस्‍तक चर्चा, क्रान्तिकारी गीतों की प्रस्‍तुति आदि कार्यक्रम भी आयोजित किये जायेंगे।