कारपोरेट घरानों की मुनाफाखोरी वाले गुजरात मॉडल का विस्तार है मोदी का विकास मॉडल
कारपोरेट घरानों की मुनाफाखोरी वाले गुजरात मॉडल का विस्तार है मोदी का विकास मॉडल
मोदी का विकास मॉडल-मजदूर विरोधी श्रम सुधार बिल वापस ले मोदी सरकार-आइपीएफ
50 फीसदी से ज्यादा असंगठित मजदूर हो जायेंगे कानूनी अधिकारों से वंचित
अनपरा-सोनभद्र, 8 फरवरी 2015, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट(आइपीएफ) द्वारा मोदी सरकार द्वारा श्रमिक अधिकारों में की जा रही कटौती के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान के तहत आज काशी मोड़ से परासी तक आयोजित पद यात्रा में भारी संख्या में मजदूर शामिल हुए। पद यात्रा के दौरान अनपरा बाजार में आयोजित आम सभा को संबोधित करते हुए आइपीएफ के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य व यू.पी. वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश महामंत्री राजेश सचान ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा गुजरात की तर्ज पर कारपोरेट हित में जो श्रम सुधार बिल लाये गये हैं, उससे असंगठित क्षेत्र के स्माल स्केल इंडस्ट्री के अधिकांश मजदूर श्रम कानून के दायरे से बहार होने से करोड़ों श्रमिको की बदहाली में इजाफा होगा, जिससे देश भर में आधे से ज्यादा असंगठित क्षेत्र के मजदूर श्रम कानून के दायरे से बाहर हो जायेंगे।
श्री सचान ने कहा कि मोदी के गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए कारपोरेट घरानों के हित में श्रम सुधार किये गये हैं जिससे वहां मजदूरों की हालात् बद से बदतर हो गयी है। उन्होंने कहा कि श्रम सुधार कर जिन 12 मिलियन रोजगार प्रति वर्ष पैदा करने का ऐलान मोदी सरकार कर रही है उसका कोई भी ठोस आधार नहीं है यह सिर्फ मजदूर हितों को कुर्बान करने के लिए की जा रही शिगूफेबाजी से ज्यादा कुछ नहीं है। सचाई यह है कि ग्रामीणों को बड़े पैमाने पर रोजगार देने की योजना मनरेगा को फिजूलखर्च बता कर मोदी सरकार खत्म कर रही है।
आइपीएफ नेता ने कहा कि 1991 में शुरू किये गये आर्थिक उदारीकरण की नीतियों से देश की अर्थव्यवस्था में कारपोरेट घरानों का वर्चस्व बढ़ा है वही दूसरी तरफ लाखों किसानों द्वारा की गयी आत्महत्यायें, मजदूरों की भुखमरी से मौतें, रोजगार विहीन विकास से बेरोजगारी की दर में बेहताशा वृद्धि हुई है उन्होंने कहा कि मोदी का विकास मॉडल गुजरात मॉडल का विस्तार है जिससे कारपोरेट घरानों की मुनाफाखोरी में और बढ़ोत्तरी होगी व आम जनता के हालात और बदतर होंगे। मोदी सरकार बैंक-बीमा,कोल,इनर्जी,रेल जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर का निजीकरण करना चाह रही है।
इस अवसर पर ठेका मजदूर यूनियन के अध्यक्ष सुरेंद्र पाल ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा श्रम सुधार बिल द्वारा असंगठित मजदूरों के जीवन सुरक्षा की जिस भी हद तक गारण्टी थी, उसे पूरी तौर पर समाप्त करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि हम सभी जानते हैं कि लम्बे संघर्षों के बाद बने कानूनों का भी क्रियान्वयन भी आम तौर पर नही होता है, जब इन श्रमिक अधिकारों में कटौती व मजदूरों को ट्रेड यूनियन बनाने के अधिकार को सीमित कर दिया जायेगा तब आसानी से समझा जा सकता है कि मजदूरों के हालात् कितने बदतर हो जायेंगे।
यूनियन उपाध्यक्ष तेजधारी गुप्ता ने कहा कि मजदूरों के आंदोजन के बाद उ0प्र0 सरकार की संस्तुति के बाद भी मोदी सरकार अनपरा-ओबरा जैसे लाखों मजदूरों वाले इन औद्योगिक क्षेत्रों में ईएसआई अस्पताल तक नही खोला जा रहा है। ईएसआई अस्पताल न होने, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के खस्ताहाल व परियोजनाओं के अस्पताल में संविदा मजदूरों के इलाज की अनुमति न होने से सैकड़ो मजदूर प्रति वर्ष इलाज के अभाव में बेमौत मरते हैं। सफाई मजदूर नेता मुन्ना ने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में देश भर में चले स्वच्छता अभियान में अरबों रू0 प्रचार में खर्च कर दिये गये, लेकिन अनपरा-ओबरा जैसे देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों में धनाभाव बताकर कालोनी व अस्पतालों की एक माह से सफाई नही करा करा सफाई मजदूरों को भूखों मारने की साजिश की जा रही है और संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा भी है। आइपीएफ कुलडोमरी प्रवक्ता सुभाष चंद्र केवट ने कहा कि आजादी के 68 वर्ष बाद भी भाठ क्षेत्र में न्यूनतम बुनियादी सुविधाओं का अभाव आज भी है। पदयात्रा में तेजधारी गुप्ता, सुभाष चंद्र केवट,राम सुधार जायसवाल, रामजीगुप्ता, केदार सिंह, गणेश सिंह, कंहैयालाल गुप्ता, ओमप्रकाश, तुलसी, सलीम, मुन्ना सहित,चंद्र शेखर पाठक, कबूतरी, रामप्रीत, अजय, सुरेंद्र सिंह, सूरज, सुदामा सहित सैकड़ों मजदूर शामिल रहे।


