केस्को की तुलना में आगरा में हो रहा है 325 करोड़ रूपये का सालाना नुकसान
आगरा का फ्रेन्चाइजी करार भी निरस्त किया जाये
लखनऊ। उप्र सरकार द्वारा केस्को का फ्रेन्चाईजी करार निरस्त किये जाने का स्वागत करते हुए बिजली इन्जीनियरों ने आगरा में हो रहे भारी घाटे को देखते हुए आगरा का फ्रेन्चाइजी करार भी निरस्त किये जाने की मांग की है।
आल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे और उ प्र रा वि प अभियन्ता संघ के महासचिव डी सी दीक्षित ने एक संयुक्त बयान में कहा कि केस्को की तुलना में आगरा में फ्रेन्चाईजी से प्रति यूनिट लगभग 1.50 रूपये कम मिलने के कारण वर्ष 2014-15 में उ प्र पावर कारपोरेशन को लगभग 325 करोड़ रूपये की क्षति हुई है। इस प्रकार आगरा में फ्रेन्चाइजीकरण के बाद पांच वर्षों में पावर कारपोरेशन को लगभग 1500 करोड़ रूपये का नुकसान उठाना पड़ा है और गलत करार के चलते सीएजी में रिपोर्ट के अनुसार 5341 करोड़ रूपये का चूना लगा है। इस प्रकार 2000 करोड़ रूपये से अधिक के घाटे को देखते हुए प्रदेश सरकार को आगरा का फ्रेन्चाईजी करार रद्द कर देना चाहिए।
अभियन्ता पदाधिकारियों ने आंकड़े देते हुए बताया कि वर्ष 2014-15 में आगरा में पावर कारपोरेशन ने टोरेण्ट कम्पनी को 2148.47 मिलियन यूनिट बिजली लगभग 3.35 रूपये प्रति यूनिट की दर से दी जब कि केस्को ने वर्ष 2014-15 में लगभग 2699 मि यू बिजली बेचकर 1657.16 करोड़ रूपये का राजस्व वसूला जो रूपये 4.88 प्रति यूनिट है। इस प्रकार केस्को की तुलना में आगरा में पावर कारपोरेशन को 1.50 रूपये प्रति यूनिट का घाटा हुआ जो 2148.47 मि यू बिजली पर कुल 325 करोड़ रूपये का घाटा है। उल्लेखनीय है कि केस्को और आगरा दोनों ही शहरों का टोरेण्ट कम्पनी के साथ फ्रेन्चाईजी करार एक साथ 18 मई 2009 को हुआ था। कर्मचारियों व अभियन्ताओं के विरोध के चलते केस्को का टोरेण्ट कम्पनी को हस्तान्तरण नहीं हो पाया था जब कि आगरा की बिजली व्यवस्था 01 अप्रैल 2010 से टोरेण्ट के पास है।
उन्होंने बताया कि इस तरह राजस्व वसूली के मामले में केस्को और आगरा की तुलना करने पर स्पष्ट हो जाता है कि फ्रेन्चाईजीकरण घाटे का सौदा साबित हुआ है और केस्को की तुलना में पावर कारपोरेशन को आगरा से प्रति यूनिट रूपये 1.50 से रूपये 02 तक का घाटा उठाना पड़ा। इसी कारण प्रदेश सरकार को केस्को का करार रद्द करना पड़ा। अब आगरा का फ्रेन्चाईजी करार भी तत्काल रद्द किया जाना चाहिए जिससे पावर कारपोरेशन घाटे से उबर सके।