लखनऊ, 19 जून। सरकार के दबाब में उ0 प्र0 विद्युत नियामक आयोग द्वारा बिजली की कीमतों में की गयी भारी वृद्धि को जनविरोधी बताते हुए आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) ने इसे महंगाई से पीड़ित प्रदेश की जनता पर एक और बोझ बताया है। पार्टी ने मांग की कि प्रदेश सरकार इस जनविरोधी फैसले को तत्काल वापस ले। यह बातें आइपीएफ के प्रदेश सागंठनिक महासचिव दिनकर कपूर ने आज जारी बयान में कहीं।
उन्होंने कहा कि अव्वल तो प्रदेश की जनता भीषण गर्मी में बिजली की कमी का मार झेल रही हैै। तब सरकार द्वारा इस समस्या को दूर करने के बजाए कीमतों में भारी वृद्धि कर जनता के घावों पर नमक छिड़कने का काम किया है। प्राकृतिक आपदा और बेमौसम बारिश की मार से खेती पहले ही तबाह हो चुकी है और खरीफ की बुवाई के समय बिजली की कीमतों में इतनी भारी वृद्धि से किसानों की कमर ही टूट जाएगी।
आइपीएफ नेता ने कहा कि नियामक आयोग का मूल्यवृद्धि के लिए पावर कारपोरेशन के घाटे का तर्क बेबुनियाद है। प्रदेश की सभी सार्वजनिक क्षेत्र की उत्पादन इकाइयों में ही अगर पूरी क्षमता से उत्पादन किया जाए तो जनता को बिजली की कमी से छुटकारा दिलाते हुए सस्ती बिजली मुहैया करायी जा सकती है। यहीं नहीं यदि सरकारी क्षेत्र के ही बिजली के बकाए की वसूली कर ली जाए तो पावर कारपोरेशन के घाटे को समाप्त किया जा सकता है। असल बात यह है कि सरकार जनहित की उपेक्षा कर कार्पोरेट के हित में काम कर रही है और कार्पोरेट घरानों से महंगे दर पर बिजली खरीद रही है जिससे विद्युत क्षेत्र घाटे में है।