कोयला हड़ताल को यूपी के बिजली इंजीनियरों का समर्थन, उप्र के बिजली घरों के ठप्प होने का अंदेशा
कोयला हड़ताल को यूपी के बिजली इंजीनियरों का समर्थन, उप्र के बिजली घरों के ठप्प होने का अंदेशा
इलेक्ट्रिसिटी संशोधन बिल के विरोध में दिल्ली मे 25 जनवरी को तय होगी राष्ट्रव्यापी आन्दोलन की रणनीति
लखनऊ। 06 जनवरी से हो रही पांच दिन की कोयला हड़ताल का उप्र सहित पूरे देश में व्यापक असर होगा। आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने 06 जनवरी से होने वाली पांच दिन की कोयला हड़ताल को समर्थन देने की घोषणा की है जिससे बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
देश में बिजली आपूर्ति के निजीकरण हेतु लोकसभा में रखे गए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट ) बिल 2014 के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रणनीति तय करने हेतु आगामी 25 जनवरी को दिल्ली में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लायीस एण्ड इंजीनियर्स (एन सी सी ओ ई ई ई ) की सर्वोच्च समिति की बैठक होगी।
आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लायीस एण्ड इंजीनियर्स की 25 जनवरी को दिल्ली में होने वाली बैठक में आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन, आल इंडिया फेडरेशन ऑफ़ पावर डिप्लोमा इंजीनियर्स तथा विभिन्न कर्मचारी फेडरेशनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष और महामंत्री सम्मिलित होंगे।
आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने आज यहाँ बताया कि बैठक में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट ) बिल 2014 के विरोध में लोकसभा की स्टैंडिंग कमेटी के समक्ष रखे जाने वाले मसौदे को अंतिम रूप दिया जायेगा साथ ही बिल के विरोध में जनमत तैयार करने हेतु देशव्यापी जनजागरण अभियान चलाने का कार्यक्रम तय किया जायेगा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की निजीकरण की कार्पोरेट परस्त नीतियों के विरोध में संघर्ष कर रहे बैंक, बीमा, रेलवे और कोयला क्षेत्र के मज़दूर संगठनों से नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी संपर्क बनाये हुए है और यदि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट ) बिल 2014 वापस न लिया गया तो देश के 12 लाख बिजली कामगार और इन्जीनियर भी हड़ताल का फैसला लेने हेतु बाध्य होंगे।
आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि बिजली इंजीनियर कोयला खदानों के निजीकरण की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा उठाये जा रहे कदमों और आर्डिनेंस के विरोध में कोयला मज़दूरों की हड़ताल को नैतिक समर्थन देंगे और कोल इंडिया के हड़ताली कर्मचारियों पर कोयलाआपूर्ति हेतु दबाव नहीं डालेंगे जिससे बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने बताया कि उप्र में 1140 मेगावाट क्षमता के पारीछा और 660 मेगावाट क्षमता के हरदुआगंज बिजली घर के पूरी तरह ठप्प हो जाने का अंदेशा है। ध्यान रहे कि पारीछा में प्रतिदिन 17 हज़ार मीट्रिक टन कोयले की ज़रूरत होती है जबकि वहां मात्र 14 हज़ार मीट्रिक टन कोयला है जो एक दिन से भी कम है। इसी प्रकार हरदुआगंज में लगभग 8 हज़ार मीट्रिक टन कोयले की प्रतिदिन ज़रुरत होती है जबकि यहाँ लगभग 18 हज़ार टन यानी दो दिन का कोयला है। अनपारा में प्रतिदिन लगभग 27 हज़ार मीट्रिक टन कोयले की ज़रुरत होती है वहां लगभग आठ दिन का कोयला है किन्तु पांच दिन की हड़ताल के बाद अनपारा में भी कोयला समाप्त हो जायेगा। इस प्रकार कोयला हड़ताल से उप्र के बिजली घरों का उत्पादन पूरी तरह ठप्प हो जाने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
श्री दुबे ने उम्मीद जतायी कि केंद्र सरकार कर्मचारियों की भावना का सम्मान करेगी और निजीकरण की नीतियों पर पुनर्विचार करेगी अन्यथा आने वाले महीनों में देश को बैंक, कोयला, बीमा, रेल और बिजली जैसे बुनियादी क्षेत्रों में आम हड़ताल का सामना करना होगा।


