क्या केंद्रीय मंत्री के परिवार के अस्पताल को फायदा पहुंचाने के लिए जेवर में एयरपोर्ट खोला जा रहा है?
क्या केंद्रीय मंत्री के परिवार के अस्पताल को फायदा पहुंचाने के लिए जेवर में एयरपोर्ट खोला जा रहा है?
नई दिल्ली, 13 अगस्त। दिल्ली से सटे यूपी के गौतमबुद्धनगर में जेवर एयरपोर्ट को लेकर राजनीति में गर्माहट बढ़ने लगी है। प्रदेश सरकार ने किसानों की सहमति बगैर एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण का फैसला किया है। सवाल है कि क्या केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा के परिवार के कैलाश अस्पताल को फायदा पहुंचाने के लिए ही गौतम बुद्धनगर के जेवर में एयरपोर्ट खेलने की घोषणा की गई है? इस विषय में कोई भी दावा नहीं किया जा सकता है लेकिन आगरा की अमृत विद्या एजूकेशन फार इमोर्टिलिटी सोसायटी के सचिव अनिल शर्मा का आरोप है कि किसी मंत्री द्वारा अपने परिवार की कंपनी को लाभ पहुंचाने का यह स्पष्ट प्रकरण है, वरना 2014 तक तो खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगरा में ही इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाये जाने की घोषणा कर चुके थे।
एक ई मेल के जरिए भेजी अपनी विज्ञप्ति में अनिल शर्मा ने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में प्रदेश सरकार लोकसभा के 2019 में होने जा रहे चुनावों के दृष्टिगत 'एयरपोर्ट - एयरपोर्ट ' का निहायत घटिया खेल, खेल रही है। हिंडन, अलीगढ़, जेवर के प्रस्तावित सिविल एविएशन के फील्ड की योजनाओं को लेकर हाल में ही इस खेल का नया अध्याय शुरू हो गया है। मूल रूप से आगरा के हक और जरूरतों को नजरअंदाज कर जेवर में 'ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ के नाम पर ही एयरपोर्ट बना डालने की घोषणा कर डाली गयी। जब सरकार के फैसले की ज्यौग्रैफिकल लोकेशन संबधी अंतर्राष्ट्रीय संबधी कानूनों और प्रचलित मान्यताओं के परिप्रेक्ष्य में जग हंसाई हुई तो इसका नाम जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट कर डाला गया।
सरकारी धन की खुली लूट
अनिल शर्मा ने कहा कि पहले कहा गया कि नेशनल कैपीटल जोन एनसीआर की हवाई यात्री जरूरतों के विस्तार व समायोजन के लिये इसे बनाया जा रहा है। इसके बाद जब ढूंढने पर भी कोई निवेशक, निवेश के लिये आगे नहीं आया तो यूपी सरकार के खजाने पर ही इस प्राजेक्ट का पूरा वजन डाल दिया गया। इसके लिये पहले सरकारी कंपनी बनायी गयी फिर उसी कंपनी द्वारा सरकारी धन से ही जमीन खरीदने, किसानों को मुआवजा दिये जाने, प्रभावित परिवारो को नौकरी दिये जाने के साथ ही पुनर्वास के लिये धन खर्च करवाये जाने जैसी योजनाओं पर क्रियान्वयन करवाये जाने के प्रयास शुरू हो गये।
भूमि अधिग्रहण कानून का उल्लंघन
श्री शर्मा ने कहा कि कांगेस शासन में किसानों की जमीन अधिग्रहीत करने के लिये 'आपसी सहमति' संबंधी कानून को दर किनार कर किसानों को जबरिया अपनी जमीन बेचने के लिये विवश करने पर सरकार उतर आयी है। जबकि यही भाजपाई जब विपक्ष में थे, जरूरी योजनाओं और रक्षा प्रतिष्ठानों तक के लिये जमीन अधिग्रहण के कानून में 'अर्जेंसी क्लाज' के इस्तेमाल करने का सडक से लेकर संसद तक विरोध करते नहीं अघाते थे। फिलहाल तो जेवर एयरुील्ड प्रोजेक्ट के लिये जमीन खरीदने में सरकार जुट गयी है।
अनिल शर्मा ने कहा कि जनता के धन का इससे ज्यादा और बडा दुरुपयोग पूरे उत्तर प्रदेश में कही भी नहीं हुआ है। जैसा कि सरकार के मंत्री और नेता दोनों ही सार्वजनिक तौर पर स्वीकारते रहे हैं कि जेवर का ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट, कामर्शियल रूप से आपरेटिड इन्दिरा गांधी एयरपोर्ट (टी -3) का पूरक होगा और ऐसे में जेवर प्राजेक्ट को भी कामर्शियल प्रोजेक्ट मानने में सरकार को क्या संकोच है। ऐसे में यह अहम प्रश्न है कि आपसी सहमति सिद्धांत को ताक पर रख कर कामर्शियल आपरेशन के लिये सरकार क्यों जमीन खरीद रही है। एनसीआर के इस प्रोजेक्ट का यूपी के खजाने पर कितना भार पडेगा इसकी जनता के सामने साफ तस्वीर होनी चाहिये और इसके लिये विधानसभा का विशेष अधिवेशन बुलाया जाना ही जरूरी है। इसी के साथ हम मानते हैं कि सरकार को जेवर की जरूरत के लिये पूरक बजट भी विधानमंडल के सदनों में लाया जाना चाहिये।
आखिर जेवर क्यों
अनिल शर्मा ने कहा कि जेवर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की नहरी सिंचाई संपन्न प्रदेश की उन दर्जन भर तहसीलों में से एक है, जहां के किसान और कृषक के रूप में उपलब्धियां हमेशा सुर्खियों में रही हैं किन्तु खेती करने वालों के दिन, 2015 से जेवर में कैलाश हास्पिटल खुलने के साथ ही गहराना शुरू हो गये। दरअसल जेवर स्थित कैलाश हास्पिटल केन्द्रीय मंत्री डा. महेश शर्मा के परिवार का है। अस्पताल एयरपोर्ट अथार्टी आफ इंडिया के एम्पैनल्ड अस्पतालों की सूची में भी शामिल है। जाहिर है कि जेवर एयरपोर्ट बन जाने के बाद किसान भले ही यहां से निर्वासित हो जायें किन्तु बडी संख्या में एयरपोर्ट अथार्टी, इंटरनेशनल एयरपोर्ट संचालक सरकारी कंपनी के अधिकारी और सेवा कर्मी जरूर इसकी पहुंच में होंगे। दरअसल कैलाश समूह अस्पताल श्री महेश शर्मा के परिवार जैसे पत्नी और पुत्र आदि से युक्त बोर्ड के द्वारा संचालित कंपनी है। अन्यथा 2014 तक तो खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आगरा में ही इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाये जाने की आगरा में ही घोषणा की थी।
श्री शर्मा ने कहा कि किसी मंत्री द्वारा अपने परिवार की कंपनी को लाभ पहुंचाने का यह स्पष्ट प्रकरण है। पता नहीं क्यों उत्तर प्रदेश सरकार की योगी सरकार ने इसे संज्ञान में नहीं लिया। जबकि श्री शर्मा यू पी से ही निर्वाचित सांसद हैं और मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी समय-समय पर सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी लाये जाने की बात करते रहे हैं। खुद की कंपनी को एक मंत्री के द्वारा लाभ पहुंचाये जाने की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद मुख्यमंत्री अगर खामोश रहेंगे तो प्रदेश के अन्य राजनीतिज्ञ जब अपने पद लाभ का उपयोग करेंगे तो उन्हे भाजपा सरकारें किस नैतिक हक से रोक पायेंगीं। यह प्रश्न मेरा या सिविल सोसायटी के सदस्यों का ही नहीं उस आम नागरिक का है जो कि 'न खाऊंगा और न खाने दूंगा' के उद्घोष पर विश्वास करके वोट देता रहा है। श्री महेश शर्मा प्राइम मिनिस्टर मोदी द्वार कही गयी बात को सच करने में लगे हैं। श्री मोदी ने 2013 में उस समय की सरकार के लिये कहा था "इस सरकार में छोटा मंत्री भी अपने गाँव में एयरपोर्ट बना लेता है"।
अब आप ही सोचें कि कार्पोरेट सैक्टर के एक मंहंगे अस्पताल के लिये पूरे एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को ही आगरा से ले जाया गया। यही नहीं अब तो एयरपोर्ट अथार्टी आफ इंडिया और सरकारी एयरलाइंस खुद इस अस्पताल की एम्पैनल्ड लिस्ट में शामिल हैं।


