अखिलेश को मनाने के लिए झुके मुलायम, निकाले गए दोनों नेता वापस

पार्टीविरोधी गतिविधियों में निष्कासित अखिलेश के नज़दीकियों का निष्कासन करना पड़ा रद्द
नई दिल्ली। क्या सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव बहुत जल्द ही सपा में भाजपा के लाल कृष्ण अडवाणी की तरह मार्गदर्शक होकर दर्शक दीर्घा में बैठने वाले हैं ?
विगत एक हफ्ते में समाजवादी पार्टी की अन्दरूनी राजनीति ने जो संकेत दिए हैं, उससे यह आभास होने लगा है कि समाजवादी पार्टी अब पूरी तरह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की शरणागत हो गई है और मुलायमसिंह यादव समेत पूरी पार्टी अखिलेश को साष्टांग प्रणाम कर रही है।
दरअसल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नज़दीकी सुनील सिंह साजन, आनन्द भदौरिया व डॉ. सुबोध यादव को पंचायत चुनावों में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों का विरोध करने आरोप में सपा से निष्कासित कर दिया गया था। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस कार्रवाई से नाखुश थे और उन्होंने अपनी नाराज़गी इशारों-इशारों में पार्टी नेतृत्व से जाहिर भी कर दी थी। इस निष्कासन के विरोध में सुनील सिंह साजन और आनन्द भदौरिया के समर्थक सोशल मीडिया में मुलायम सिंह यादव व शिवपाल सिंह यादव के खिलाफ इशारों-इशारों में भड़ास निकाल रहे थे और विषवमन कर रहे थे।
अंततः अखिलेश यादव की जिद के आगे मुलायम सिंह यादव को झुकना पड़ा और अनुशासनहीनता कर रहे सुनील सिंह साजन और आनन्द भदौरिया का निष्कासन रद्द करना पड़ा।
सूत्रों के मुताबिक सुनील सिंह साजन और आनन्द भदौरिया का निष्कासन मुलायम सिंह यादव ने स्वयं किया था और निष्कासन करते समय शिवपाल सिंह यादव व अखिलेश यादव की मौजूदगी मे कहा था कि क्या सुनील सिंह साजन और आनन्द भदौरिया हमसे बड़े हो गए जो पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों का विरोध कर रहे हैं। यह कहते हुए ही मुलायम सिंह यादव ने सुनील सिंह साजन और आनन्द भदौरिया को पार्टी से निकाले जाने का फरमान सुना दिया था, जिसके विरोध में अखिलेश उठकर चले गए और उन्होंने कह दिया कि निष्कासन के पत्र पर वे (अखिलेश) हस्ताक्षर नहीं करेंगे। चर्चा है कि इसके बाद अखिलेश सैफई महोत्सव में नहीं गए। बताया जाता है कि अखिलेश सैफई इसी शर्त पर पहुंचे कि मुलायम सिंह यादव को अखिलेश के नज़दीकियों का निष्कासन रद्द करना पड़ेगा।
अब मुलायम सिंह यादव को अखिलेश यादव के सामने झुकते हुए उन सुनील सिंह साजन और आनन्द भदौरिया का निष्कासन रद्द करने का फरमान जारी करवाना पड़ा है,जिनके लिए उन्होंने खुद कहा था कि क्या वे हमसे बड़े हो गए।
इस घटनाक्रम के बाद सपा के मुलायम समर्थक बड़े-बड़े तीसमारखां सूरमाओं को होंठ खुश्क हो गए हैं, जबकि अखिलेशियन्स को हौसले और बुलन्द हो गए हैं।।