शरद कुमार त्रिपाठी

मै कई दिनों से देख रहा हूँ कि लोगो में मन में दो तरह की विचार धारा है एक ये कि क्या अन्ना का समर्थन करें या ना करें...कई वर्ग ऐसे है जिनकी इस बारे कोई एक सोच नहीं है. मेरा अपना मानना है कि आज हम सब टी वी से देख कर जीवन जी रहे है. अगर टी वी में दिखेगा की देश आबाद हो रहा है तो हम मान लेते है कि आबाद हो रहा है और हम खुशियाँ मना लेते है . आज भारत बदल गया है..आज का भारत वो भारत नहीं है जो दो हिस्सों में था जहा शहर अलग और गाँव अलग थे आज टी वी ने दोनों को जोड़ दिया है .. मै पिछले दो दिनों से गाँव का दौरा कर रहा हूँ सिर्फ ये जानने के लिए कि क्या गाँव भी अन्ना के साथ है और अगर हाँ तो क्यों साथ है..उनको क्या पता है अन्ना और उनके आन्दोलन के बारे में में..आप को जान कर आश्चर्य होगा की कुछ लोगो को गाँव में पता है कि जनलोक पल क्या है और बाकि लोगो को पता है की ये देश की पुकार है..नेताओ से वो पहले से नाराज है..अन्ना का समर्थन इसलिए कर रहे है क्योकि नेताओ का विरोध अन्ना कर रहे है.

मेरा खुद का भी यही मानना है की जो भी भीड़ रोड पर दिखती है वो अन्ना के साथ कम और नेताओ के खिलाफ ज्यादा है ..जन प्रतिनिधियों के खिलाफ है ऐसे में जब अन्ना ने उनके खिलाफ जंग छेड़ दी है तो लोग उनका साथ देकर अपने तरीके से सरकार का विरोध कर रहे है. अन्ना अगर हार भी जाये तो भी ये तो साफ़ है कि वो एक मैदान जीत ही चुके है इससे ये तो सावित हो ही गया है कि चाहे कोई भी सरकार कितने भी बहुमत से आये वो भी अपने मन का काम नहीं कर सकती है अगर आम आदमी ना चाहे..पर अगर अन्ना का आन्दोलन सार्थक हो गया लोकपाल बिल मंजूर हो गया तो ये देश की जीत होगी लोगो की जीत होगी..क्योकि रिश्वत तो हम ही देते है और सबसे पहले ये पाबन्दी हम पर लगेगी. मुझे तो समझ नहीं आता की लोग ये साधारण सी बात क्यों नहीं समझते की ये नेता ये बिल इसलिए नहीं चाहते है कि इसमें कानून है सबको जाँच के दायरे में लेन का चाहे वो खुद लोकायुक्त ही क्यों ना हो..अन्ना का विरोध करने वाले या इस लोक पल का विरोध करने वालो को क्या रिश्वत देना अच्छा लगता है ..लोग कहते है की देश का कानून संसद बनाती है हाँ मै भी खुद और अन्ना जी भी का यही कहना है कि ये कानून संसद में बने इसलिए तो अनशन है..वो कौन सा खुद ये कानून लागु कर रहे है ..जब हम वोट देकर अपना जन प्रतिनिधि चुन सकते है तो क्या हम अपने जनप्रतिनिधि से नहीं कह सकते की हमारा कानून बनाओ..ईमानदारी का कानून बनाओ..हमने आप को संसद भेजा है..आप हमारे नेता हो..हमने आप को वोट दिया है..
तो दोस्तों एक बार खुद सोचिये की क्या हम अन्ना का विरोध करें..क्या अन्ना का समर्थन ना करके हम भ्रष्टाचार को जारी रखे..ये हमें खुद तय करना है ..