हिमांशु कुमार

आज साइकिल चलाते हुए राजसमन्द और अजमेर जिले की सीमा पर स्थित नया गांव में पहुँचा।

मेज़बान एक सास बहु थीं,

बहु की उम्र 27 साल,

आठ माह पहले पति की मृत्यु हो गई,

साल भर के बच्चे को छोड़ कर मनरेगा में मज़दूरी करने जाती है।

Himanshu Kumarसरकार को इस साल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सूखाग्रस्त क्षेत्रों में मनरेगा मे सौ की बजाय डेढ़ सौ दिन काम देना था।

लोगों ने 135 दिन काम किया तो मोदी जी को सपना आया कि इन लोगों को सौ दिन से ज़्यादा का पैसा मत दो।

अब राजस्थान की भाजपा सरकार गरीब विघवाओं और मज़दूरों को मज़दूरी में दिया गया पैसा वापिस वसूल रही है।

आप अगर गांव में लोगों से बात करेंगे तो आप को महसूस होगा कि सरकार लोगों के साथ कितनी क्रूर और उनकी दुश्मन है।

एक सरकार उद्योगपतियों को पांच लाख करोड़ की सब्सिडी दे सकती है, दूसरी तरफ वही सरकार गांव वालों की काम करी हुई मज़दूरी भी वापिस वसूल रही है

इसे कहते हैं क्रूरता की इंतेहा,

गांव में पानी एक किलोमीटर दूर से लाना पड़ता है।

पानी को घी की तरह संभाल कर खर्च करना पड़ता है।

अगली बार शावर के गर्म पानी के नीचे खड़े होकर सोचियेगा ज़रूर।

सास का नाम गेंदी बाई है, वे गांव की महिलाओं में जागरूकता जगाने का काम करती हैं।

वे बताती हैं 18 साल पहले भंवरी बाई के साथ दबंगों के सामूहिक बलात्कार का विरोध करने वे धरना देने जयपुर गई थीं।

तब भैरों सिंह शेखावत की भाजपा सरकार थी।

तब गेंदी बाई ने पुलिस की लाठियां खाई थीं और जेल गई थीं।

गेंदी बाई ने बताया कि सुबह तीन बजे उठकर नज़दीक के हैण्ड पम्प पर 2 मटकी पानी निकलता है और फिर पानी खत्म हो जाता है।

लेकिन वो पानी खाना बनाने या पीने लायक नहीं है।

उन्होने मुझे वो पानी दिखाया।

गांव में मोबाइल सिग्नल नहीं आता।

मैनें कहा मोदी जी का कैशलेस यहाँ कैसे चलेगा ?

यह बात तो गांव वालों को समझ में नहीं आई, लेकिन गांव वालों ने बताया नोटबन्दी के बाद शहरों में काम करने वालों की मजदूरी 3OO से घट कर 😯 रूपये हो गई थी।

क्योंकि शहर में सेठों के पास भी नगद पैसा नहीं था।

हमारी फेसबुक की दुनिया और भारत की ज़मीनी हकीकत में बहुत दूरी है,

हम यहां जो चर्चा करते हैं, उनमें वो बातें शामिल ही नहीं होतीं जो इस देश के करोड़ों लोग रोज भोगते हैं।

मुझे आश्चर्य यही है कि ये लोग यह सब कुछ सह क्यों रहे हैं ?

ये लोग बग़ावत क्यों नहीं कर रहे ?