खामोश …फिर भी बोले !
खामोश …फिर भी बोले !
जुगनू शारदेय
कभी रघुवीर सहाय ने लिखा था , ‘ कुछ तो होगा ..कुछ तो होगा – अगर मैं बोलूंगा !‘ तब से हमने एक ही काम किया कि सत्य बोलना बंद कर दिया । या बोले तो आलू पर जबकि जरूरत थी प्याज की । प्याज पर इस लिए न बोले कि यह रुलाता है । फिर सत्य बोलने का ठेका सरकार का था क्योंकि इसके पास बाकायदा ‘सत्यमेव जयते ‘ है । सरकार ने असत्य वाचन की शपथ ली है , इसलिए उसका पालन कर रही है । नतीजतन हम सब मोटे तौर पर खामोश हो गए । बड़ा गुस्सा चढ़ा तो जनहित याचिका के साथ अदालत में चले गए अथवा सूचना के अधिकार का सहारा लिया । हमने यह भी माना था कि सड़क पर जाने का काम राजनीतिक दलों का है । अब इनकी यह मुसीबत कि कहीं न कहीं यह सरकार में होते हैं । बस लोग खामोश होते चले गए । चलो अब लोगों ने खामोशी तोड़ कर सड़क पर आ कर बोलना शुरू कर दिया है ।
लोग इसलिए भी खामोश हो गए थे कि कभी सरकार के कांग्रेसीपन के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी ने बोलना शुरू किया था । फिर यह भी सरकार हो गई ।
सरकार होते ही भारतीय कम भ्रामक ज्यादा हो गई । याद कीजिए अटलबिहारी वाजपेयी के सरकारी दिन जब सिर्फ भाजपा ही बोलती थी । लोगों को इसने खामोश
कर रखा था । प्रतीकात्मक तौर पर इसके एक नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने तो सब जगह फिल्मी संवाद ‘खामोश ‘ बोलना आरंभ कर दिया था । नतीजतन भाजपा ने
पार्टी के अंदर उनकी बोलती ही बंद कर दी थी । अकसर वह पार्टी लाइन के खिलाफ बोलते थे । अभी फिर बोले कि श्रीनगर में तिरंगा फहराना की बात करना ही गलत था । उनकी बात से पार्टी की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि अपने कार्यकर्ताओं को वह समझा देती है कि शत्रु जी तो डायलग बोल रहे थे ।
अब डायलग पर लगता है कि सत्यमेव जयते वाली दिल्ली की सरकार हमेशा हर बात पर डायलग ही बोलती है । खास तौर पर भ्रष्टाचार के मामले में । इस पर
बोलना इस सरकार के लिए प्याज के आंसू जैसा है । ऐसा नहीं कि यह आंसू नहीं बहाती । घड़ियाली आंसू बहाने में तो इसका कोई मुकाबला ही नहीं है । है कोई देश में सरकार के प्रधानमंत्री जैसा ईमानदार जो नियुक्त करते हैं एक दागी अफसर टॉमस को मुख्य सतर्कता आयुक्त । जिसका काम भ्रष्टाचार रोकना है ,उसी के ऊपर ही दाग । यहां सरकार मान लेती है कि कुछ अच्छा होता है तो दाग अच्छे हैं । सरकार न हुई गंदगी धोने का पाउडर हो गई । कैसा लगा आपको यह डायलग !
यह हो सकता है कि बहुत सारे लोगों के दामन पर जो दाग लगा है , वह गलत हो या भ्रष्टाचार की तेज रफ्तार गाड़ी के पहिए से जो कीचड़ का छींटा उड़ा हो , उससे लगा हो । हमारी आपकी कमीज पर जब दाग लगता है तो हम तुरत धो देते हैं । पर सरकारी सत्यमेव जयते का तरीका है कि दागदार कमीज को आप नहीं धोते । कमीज बदल लेते हैं । नई कमीज एक दम झकास । अचानक पता चलता है किसी धुलाई के चक्कर में कि एक कमीज तो दागदार ही नहीं है , बल्कि दाग से एक दम खराब हो चुकी है । अब जा कर खामोशी टूटती है । सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता । वह कहती है , ‘ खामोश ‘ – मुश्किल यह है कि अब दाग से इतनी बदबू आ रही है कि ‘ फिर भी बोले ‘ !


