नूर महल मस्जिद का पुलिस द्वारा किया गया अपमान नाकाबिले बर्दाश्त
गौतम नवलखा और आशीष गुप्ता 6 जुलाई को करेंगे शिरकत
धरने के 45 वें दिन क्रमिक उपवास पर आजमगढ़ से आये अनिल आजमी बैठे
लखनऊ, 5 जुलाई 2013। मौलाना खालिद मुजाहिद के हत्यारे पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी, निमेष आयोग की रिपोर्ट पर तत्काल अमल करने और आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को छोड़ने की माँग के साथ चल रहा रिहाई मंच का अनिश्चितकालीन धरना आज 45 वें दिन भी जारी रहा। आज उपवास पर आजमगढ़ से आये अनिल आजमी बैठे।

रिहाई मंच के प्रवक्ताओं ने कहा कि धरने के 46 वें दिन कल 6 जुलाई को धरने के समर्थन में लोकतान्त्रिक अधिकारों को लेकर लम्बे समय से कश्मीर, पूर्वोत्तर और छत्तीसगढ़ के सवालों को उठाने वाले पत्रकार और एक्टिविस्ट गौतम नवलखा और कोआर्डिनेशन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स आर्गनाइजेशन (सीडीआरओे) के संयोजक आशीष गुप्ता आयेंगे।

रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुएब ने कहा कि ऐसा लगता है कि सूबे में कोई निजाम ही वजूद में नहीं रह गया है। जब सूबे में गुण्डों का आतंक हो गया है, रोज बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं और खालिद जैसे निर्दोष के हत्यारे पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी के लिये मुसलमान आन्दोलनरत है तब मुख्यमन्त्री का सपरिवार अमेरिका घूमने जाना शर्मनाक और नाकाबिले बर्दाश्त है। उन्होंने मुख्यमन्त्री की तुलना रोम के राजा नीरो से की, जो रोम के जलते वक्त बासुरी बजा रहा था और अवाम तबाह हो रही थी। उन्होंने कहा कि जो सरकार अपने को मुसलमानों की हिमायती कहती है, उस समुदाय के लोग और न्याय पसन्द अवाम जब पिछले 45 दिनों से धरने पर बैठी हो जिससे इस मुख्यमन्त्री ने वादा किया था कि वो मानसून सत्र में आरडी निमेष रिपोर्ट पर एक्शन रिपोर्ट लायेंगे। तब ऐसे में रोम के इस आधुनिक नीरो अखिलेश यादव द्वारा मानूसन सत्र बुलाने के बजाए घूमने के लिये अमेरिका चले जाना लोकतंत्र और अवाम की भावनाओं का मजाक उड़ाना है। उन्होंने कहा कि जिस तरह गुजरात 2002 के कत्लेआम के दौरान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्जिस जेएस वर्मा ने मोदी के रवैये पर टिप्पड़ी करते हुये उन्हें आधुनिक नीरो कहा था, ठीक वैसी परिस्थिति आज यूपी की भी है ऐसे में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को उत्तर प्रदेश के हालात पर संज्ञान लेना चाहिये।

भागीदारी आंदोलन के नेता पीसी कुरील और पिछड़ा महासभा के एहसानुल हक मलिक ने कहा कि आतंकवाद वह विध्वँसक विचार है जो पूरी दुनिया को तबाह करने का मँसूबा रखता है। अगर ऐसे विचारों के वाहक हमारी व्यवस्था में सिर्फ शामिल ही न हों बल्कि उसमें अहम किरदार निभा रहे हों तब यह देश ही नहीं दुनिया के लिये भी खतरनाक हो जाता है। ऐसा ही इशरत जहाँ प्रकरण में हुआ जहाँ आतंक की विचारधारा के वाहक आईबी के अधिकारी राजेन्द्र कुमार को बचाने में पूरा गृह मंत्रालय लग गया है और जब खुद गृह मन्त्री सुशील कुमार शिंदे भी सामने आ गये हों, तब यह स्थिति और भयावह हो जाती है।

वहीं पिछड़ा महासभा के नेता शिवनारायण कुशवाहा ने कहा कि जिस तरह से मुस्लिम समाज के साथ न्याय के सवाल पर पक्षपातपूर्ण रवैया सामने आ रहा है और जब राज्य तंत्र ही उसे रोकने पर आमादा हो तो ऐसे वक्त में वंचित तबके की एक बड़ी गोलबंदी ही इसे रोकेगी।

धरने के समर्थन में आये पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता व हस्तक्षेप.कॉम के विशेष संवाददाता फैजान मुसन्ना ने कहा कि सपा हुकूमत में सरकारी सरपरस्ती में हिन्दुत्ववादियों के हौसले बुलंद हैं जिसकी ताजा मिसाल नरही स्थित सदियों पुरानी मस्जिद नूर महल के अन्दर पुलिस द्वारा जूते पहनकर घुसने और शराब के नशे में नमाजियों के साथ गाली-गलौज करना है। जिस पर तहरीर लिखवाने और आजम खान और मुख्य सचिव जावेद उस्मानी समेत सभी आला अधिकारियों से इंसाफ की गुहार के बावजूद शासन-प्रशासन ने आपराधिक चुप्पी साध रखी है। फैजान मुसन्ना ने कहा कि सोलह-सत्रह जून की रात को मस्जिद के बगल में रहने वाले भाजपा नेता जिप्पी तिवारी के कहने पर स्थानीय पुलिस के जवान शराब के नशे में मस्जिद में घुस गये और मस्जिद में चल रहे निर्माण कार्य को रोकने की धमकी दी, यहाँ तक कि मस्जिद में अजान को रोकने की भी धमकी दी गयी। जिससे समझा जा सकता है कि प्रशासन किस तरह साम्प्रदायिक उन्माद बढ़ाने में लगा हुआ है, जबकि जिप्पी तिवारी को मस्जिद के निर्माण कार्य पर आपत्ति करने की कोई तार्किक और वैधानिक वजह भी नहीं है। क्योंकि उनकी दिवार के कुछ इंटें हीं मस्जिद के हिस्से में हैं, लेकिन बावजूद इसके प्रशासन जिप्पी तिवारी के साथ खड़ा होकर शहर का अमन-चैन बिगाड़ना चाहता है।

धरने को सम्बोधित करते हुये हाजी फहीम सिद्दीकी, इनायत उल्ला खां, जुबैर जौनपुरी, मौलाना कमर सीतापुरी ने कहा कि हम 45 दिन से विधानसभा पर बैठे हैं। गर्मी की लू से लेकर हम तेज बरसात में भी इस विधान सभा पर अपने बेगुनाह बच्चे खालिद जिस पर हुक्मरानों ने आतंक का कलंक लगाया और बेगुनाह पाए जाने पर मार डाला के इंसाफ के लिये बैठे हैं। सपा ने वादा किया था कि वो बेगुनाह बच्चों को रिहा करेगी, रिहा तो दूर हमारे बेगुनाह बच्चों को जेल में 23-23 घंटे बन्द रखा जाता है, और उत्पीड़ित किया जाता है और हमारे मुख्यमन्त्री को अमेरिका घूमने से फुरसत नहीं है।

धरने को सम्बोधित करते हुये मजदूर नेता रामकृष्ण, मुस्लिम मजलिस के जैद अहमद फारुकी, आईएनएल के मो. समी ने कहा कि जिस तरह सरकार ने बेगुनाहों को रिहा नहीं किया और अपने हिन्दुत्वादी वकीलों के माध्यम से न्यायालय में आतंकवाद के आरोप में बन्द बेगुनाहों के खिलाफ याचिकाएं करवाई ठीक उसी तरह यह सरकार पाक रमजान के महीने को देखते हुये प्रदेश का साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने के लिये लखनऊ की एक मस्जिद को लेकर याचिका करवाई जिसको न्यायालय ने स्वीकार भी कर लिया। जबकि सन् 47 के बाद से अयोध्या को छोड़कर सभी धार्मिक स्थलों पर सुप्रीम कोर्ट ने ‘स्टेटस को’ की स्थिति बनाये रखने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि जब सरकार और न्यायपालिका दोनों का ही रवैया साप्रदायिक हो गया हो तब राज्यपाल को मामले में हस्तक्षेप करना चाहिये।

रिहाई मंच के धरने का संचालन रिहाई मंच के नेता योगेन्द्र यादव ने किया। धरने में सोशलिस्ट फ्रंट के मो0 आफाक, इनायत उल्ला खां, पिछड़ा महासभा के एहसानुल हक मलिक, भागीदारी आंदोलन के पीसी कुरील, शिवनारायण कुशवाहा, मौलाना कमर सीतापुरी, भारतीय एकता पार्टी के सैयद मोइद अहमद, हाजी फहीम सिद्दीकी, जैद अहमद फारुकी, जुबैर जौनपुरी, शुऐब, हरेराम मिश्र, एसएम इदरीस, मोईद कासमी नदवी, रामकृष्ण, अवामी काउंसिल के असद हयात, अनिल आजमी, जमीर, मो शमशाद, शाहनवाज आलम, राजीव यादव शामिल रहे।