खालिद हत्याकाण्ड : दोषी पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी की माँग ने पकड़ा जोर
खालिद हत्याकाण्ड : दोषी पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी की माँग ने पकड़ा जोर
नई दिल्ली/ लखनऊ। कल तक जिन अखबारों के लिये खालिद मुजाहिद की हत्या मुख पृष्ठ की खबर नहीं थी अचानक आज उन अखबारों के पहले पन्ने पर न केवल 42 पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होने की खबर प्रकाशित हुयी बल्कि इन अखबारों को इस बात की चिन्ता भी सताने लगी कि इससे पुलिस का मनोबल गिरेगा। दरअसल अखबारों के इस कृत्य को सूबे की सरकार पर नाजायज दबाव बनाकर नाइंसाफी जारी रखने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
उधर मीडिया और भाजपा के दबाव में खालिद मुजाहिद हत्याकाण्ड में उत्तर प्रदेश सरकार का उदासीन रवैया कहीं उसके लिये बवाल-ए-जान न बन जाये। एक तरफ जहाँ देश के कई बड़े पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद इस हत्याकाण्ड की समयबद्ध सीबीआई जाँच की माँग कर चुके हैं वहीं आतंकवाद के नाम पर कैद निर्दोषों का रिहाई मंच ने बारह सूत्रीय माँगपत्र रखते हुये सरकार की मुसीबत बढ़ा दी है।
रिहाई मंच ने माँग की है कि खालिद मुजाहिद के चचा जहीर आलम फलाही द्वारा दर्ज करायी गयी एफआईआर में नामित डीजीपी विक्रम सिंह, एडीजी कानून व्यवस्था बृजलाल, मनोज कुमार झा, चिरंजीवनाथ सिन्हा, एस आनंद पुलिस अधिकारियों और खालिद को ले जा रहे पुलिस स्कॉर्ट को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाय, तथा आईबी समेत सभी दोषियों को तत्काल गिरफ्तार करके कानूनी कार्यवाई शुरु की जाये। सपा सरकार अपने चुनावी वादे के मुताबिक आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाह नौजवानों को तत्काल रिहा करे क्योंकि मौलाना खालिद की हत्या ने साफ कर दिया है कि जो सरकार मौलाना की हत्या करवा रही है वो किस आधार पर अन्य को सुरक्षा दे सकती है।
मंच ने कहा है कि शहीद मौलाना खालिद मुजाहिद और हकीम तारिक कासमी को निर्दोष साबित करने वाली आरडी निमेष कमीशन की रिपोर्ट को तत्काल सदन के पटल पर रखा जाये व मौलाना खालिद की हत्या की सीबीआई जाँच तत्काल शुरु की जाये साथ ही गृह सचिव, बाराबंकी जिलाधिकारी और सरकारी वकील द्वारा बाराबंकी न्यायालय में मौलाना खालिद मुजाहिद और हकीम तारिक कासमी पर से मुकदमा वापसी की प्रक्रिया में जानबूझकर की गयी आपराधिक साजिश जिसकी वजह से रिहाई सम्भव नहीं हो पायी, एवम् मौलाना खालिद की बाराबंकी में हत्या भी हो गयी, ऐसे में इन सभी शासन व प्रशासन के अधिकारियों को जाँच के दायरे में लाया जाये और कार्रवाई की जाये।
दिसंबर 2007 और मई 2013 के दौरान बाराबंकी के पूरे प्रशासनिक अमले को जाँच के दायरे में लाये जाने की माँग करते हुये रिहाई मंच ने कहा है कि मौलाना खालिद मुजाहिद और तारिक कासमी की 22 दिसंबर 2007 को बाराबंकी रेलवे स्टेशन से की गयी फर्जी गिरफ्तारी और 18 मई 2013 को मौलाना खालिद की बाराबंकी में की गयी हत्या से स्पष्ट होता है कि इस हत्या के तार बाराबंकी से गहरे जुड़े हैं।
मंच ने माँग की है कि 16 दिसंबर 2007 को मौलाना खालिद मुजाहिद को मडि़याहूं से अपहरण करने के बाद उच्च पुलिस अधिकारी अमिताभ यश, एसटीएफ के अधिकारियों समेत अन्य पुलिस अधिकारियों द्वारा जिस तरीके से उत्पीड़न किया गया और जिसके बारे में मौलाना ने शिकायत भी की थी, जिस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुयी, ऐसे में इन दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाये तथा मौलाना खालिद मुजाहिद को लगातार जेल और पेशी के दौरान जिस तरीके से एसटीएफ-एटीएस के इशारे पर स्कॉर्ट द्वारा उत्पीड़ित किया जाता था और हत्या करने की धमकी दी जाती थी, और जिसकी शिकायत भी उनके अधिवक्ताओं द्वारा लखनऊ, बाराबंकी और फैजाबाद के न्यायधीशों को शिकायती पत्रों द्वारा अवगत कराया जाता था, पर इसके बावजूद कोर्ट ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया और ना ही कोई कार्रवाई इन दोषी पुलिस वालों पर हुयी, ऐसे में इन दोषी पुलिस अधिकारियों समेत लखनऊ, बाराबंकी और फैजाबाद के जिन न्यायाधीशों ने दोषियों को बचाया, उनको भी जाँच के दायरे में लाते हुये कार्रवाई की जाये।
खालिद की हत्या के बाद जिन पुलिस अधिकारियों ने तारिक कासमी से बाराबंकी कोतवाली में दबाव देकर झूठा बयान दिलवाया कि खालिद की तबियत पहले से खराब थी (जिसे कि जेल प्रशासन और खालिद के वकील मो. शुऐब ने इंकार किया है) उन सभी अधिकारियों को जाँच के दायरे में लाते हुये कार्रवाई किये जाने की माँग करते हुये मंचने कहा है कि मौलाना खालिद मुजाहिद की हत्या इस बात की पुष्टि करती है कि सरकारी एजेंसियों एसटीएफ-एटीएस और आतंकी संगठनों में गठजोड़ है जो खालिद मुजाहिद की रिहाई को लेकर भयभीत थे जिसके चलते मौलाना खालिद की हत्या कर दी गयी ऐसे में कचहरी धमाकों समेत यूपी में हुयी आतंकी घटनाओं की जाँच करायी जाये। जिससे खुफिया एजेंसियों, एटीएस और आतंकी संगठनों का गठजोड़ सामने आ सके।
उत्तर प्रदेश के जितने युवक आतंकवाद के आरोप में दूसरे राज्यों में बन्द हैं उनकी सुरक्षा की गारंटी उत्तर प्रदेश सरकार से सुनिश्चित करने की माँग करते हुये मंच ने पीड़ित परिवार को तत्काल एक करोड़ रूपये मुआवजा दिये जाने की माँग की है।


