खुर्शीद मौत का सामना तो कर सकता था, लेकिन बलात्कार का इल्जाम नहीं
खुर्शीद मौत का सामना तो कर सकता था, लेकिन बलात्कार का इल्जाम नहीं
आत्महत्या नहीं हत्या है यह, खुर्शीद दूसरा दाभोलकर था
कुमार नरेंद्र सिंह
खुर्शीद को जो लोग जानते हैं, वे यह भी जानते हैं कि वह हत्या और बलात्कार नहीं कर सकता। वैसे भी उसे ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं थी। खुर्शीद के सभी मित्र (पुरुष-महिला दोनों) जानते हैं कि वह दो पेग के बाद खाना भी खाने की स्थिति में भी नहीं रहता था और जहां जगह मिली, पसर जाता था। उसके घर में किसी ने सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल भी नहीं देखी होगी। न तो वह स्वयं सॉफ्ट ड्रिंक लेता था औऱ न दोस्तों को ही परोसता था, लेकिन मधु किश्वर ने अपने घर में बैठे देख लिया कि उसके यहां सॉफ्ट डिंक औऱ नशीली दवा दोनों का मुकम्ल इंतजाम था। इस बात को कौन स्वीकार करेगा कि जो लड़की इतनी बोल्ड हो कि वह अपने ब्वॉय फ्रेंड औऱ अन्य दोस्तों के साथ छक कर दारू पी सकती है, बार-बार जाने के लिये कहने के बावजूद दूसरे के घर में रात को रुक सकती है, वह अचानक एक छुईमूई लड़की बन जाये और बलात्कार की शिकायत की हिम्मत तक न जुटा पाये। खुर्शीद डिप्रेशन का शिकार था और पिछले लगभग दो साल से AIIMS में उसका इलाज चल रहा था। इस बात की पुष्टि किसी डॉक्टर से हो सकती है कि डिप्रेशन की दवा लेने वाले मरीज की यौन इच्छा लगभग खत्म हो जाती है। स्वाभाविक रूप से वह यौनेच्छा महसूस नहीं करता, लेकिन पता नहीं डिप्रेशन की वह कौन सी दवा थी, जो उसकी यौन इच्छा को बलात्कार करने की हद तक पहुँचाने में सफल गयी।
पूरा प्रसारण एक षड्यंत्र ही नजर आ रहा था, क्योंकि सभी पैनलिस्ट्स उसे बलात्कारी साबित करने में जुटे थे। दरअसल, खुर्शीद एक दूसरा दाभोलकर था, जिसे बर्दाश्त करना इंडिया टीवी जैसे अंधविश्वास बेचने वाले चैनल के लिये भारी पड़ रहा था। खुर्शीद की बातों में उसे अपनी मौत का सायरन सुनाई दे रहा था। ऐसे में उसकी आवाज गुम करना ही चैनल के पास एकमात्र विकल्प बचा था। षड्यंत्रकारियों ने इसके लिये दिन भी 16 दिसंबर का चुना ताकी कोई खुर्शीद के पक्ष में कोई आवाज न उठे। खुर्शीद संघी और जमात दोनों के निशाने पर था।
खुर्शीद को कई बार जान से मारने की धमकी भी मिल चुकी थी, लेकिन इन टुच्ची धमकियों से बेपरवाह अपने पथ पर लगातार बढ़ता जा रहा था। वह मौत का सामना तो कर सकता था, लेकिन बलात्कार का इल्जाम नहीं। यही कारण था कि वह अकेले अपने घर आया, लेकिन घर का दरवाजा नहीं खोला औऱ सीधी चौथी मंजिल पर छढ़कर वहां से कूद गया और हमें अकेला छोड़कर चला गया। वह निर्भया की याद में कैंडिल जलाता था। उसका ऑफिस हिंदुस्तान का एकमात्र ऐसा ऑफिस था, जो निर्भया की याद में 16 दिसंबर को बंद रहता था। इस बार जहां 16 दिसंबर की रात उसने निर्भया की याद में कैंडिल जलाई थी, वहीं उसका मृत शरीर पड़ा था। उसके खून से लाल वहां की धरती पुकार-पुकार कर कह रही थी कि वह पवित्र था और इंडिया टीवी पर जो दिखाया गया, वह अपवित्र था और अपवित्र थे प्रोग्राम पेश करने वालों के इरादे।
कायदे से इंडिया टीवी और मधु किश्वर जैसे छद्म लोगों के खिलाफ केस किया जाना चाहिए और यह होकर रहेगा। मधु किश्वर औऱ रजत शर्मा दोनों को समझ लेना होगा कि खुर्शीद के कत्ल का जवाब आपको भी देना है। आपने ही उसकी उसे आत्मह्त्या के लिये विवश किया है और हमारे देश में किसी को आत्महत्या के लिये विवश करना एक संगीन अपराध है।
खुर्शीद हम तुम्हारे कातिलों को छोड़ेंगे नहीं। चाहे वे लाख कोशिश करें, हम उन्हें उनके अंजाम तक जरूर पहुंचाएंगे। यह तुमसे मेरा वादा है। मेरे इस वादे में तुम्हारे वे तमाम दोस्त शामिल हैं, जो तुम्हें दिलोजान से चाहते हैं।


