गरीबी है मुख्य कारण मानव तस्करी का
गरीबी है मुख्य कारण मानव तस्करी का
सशस्त्र सीमा बल में मानव तस्करी विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
सिलीगुड़ी। सशस्त्र सीमा बल के अतिरिक्त प्रशिक्षण केन्द्र में दिनांक 15/05/2015 को मानव तस्करी विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य भारत-नेपाल एवं भारत-भूटान सीमाओं पर तैनात एस.एस.बी. कार्मिकों को मानव तस्करी से संबंधी विभिन्न पहलुओं से अवगत कराना था। ताकि सभी एस.एस.बी. कार्मिक मानव तस्करों द्वारा अपनाये गये नित नये-नये तौर-तरीकों एवं उनके कुकृत्यों पर आसानी से पानी फेर सकें। इस कार्यशाला में सिलीगुड़ी सीमान्त के नियंत्रण में कार्यरत सभी वाहिनियों के कार्मिकों ने हिस्सा लिया। ताकि सभी कार्मिक इस बुराई के प्रति सजग-एवं सचेत रहकर अपनी दायित्वों को बेखुवी निर्वाहन कर सकें। कुलदीप सिहं, भा.पु.से. महानिरीक्षक सिलीगुड़ी सीमान्त ने इस कार्यशाला का उद्घाटन किया।
सिलीगुड़ी सीमान्त मुख्यालय के प्रचार अधिकारी के.एम. करिअप्पा ने जानकारी देते हुए बताया कि उद्घाटन समारोह में कुलदीप सिंह ने सभी आगन्तुकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि “मानव तस्करी इस क्षेत्र में एक अभिशाप बनी हुई है, जिसका मुख्य कारण गरीबी है। जिसको समूल नष्ट करना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है, इसलिए प्रत्येक एस.एस.बी. कर्मी को इस बुराई को समाप्त करने में अपनी अहम भूमिका अदा करनी चाहिए।” इस क्षेत्र में भारत-नेपाल एवं भारत-भूटान सीमाओं पर अपना दायित्व वहन कर रहे कार्मिकों को इसके प्रति और भी अधिक जिम्मेदारीपूर्वक से कार्य करना है और इस सीमाओं से गुजरने वाले सभी संदेहास्पद लोगों की गतिविधियों पर पैनी निगाहें रखना अतिआवश्यक है।” उन्होंने बताया कि आज मानव तस्करों द्वारा अपने इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रकार के तौर-तरीकों को अपनाया जा रहा है। इन सभी प्रकार के तौर-तरीकों से किस प्रकार से निजात पायी जाये, इस पर गहन-विचार विमर्श करने की आवश्यकता है। उन्होंने मानव तस्करों द्वारा अपनायी जा रही विभिन्न प्रकार की गतिविधियों एवं क्रियाकलापों से सभी कार्मिकों को अवगत कराया और सभी कार्मिकों को सलाह दी कि वे मानव तस्करों को पकड़ने के लिए विभिन्न प्रकार के तौर-तरीकों को अपने मस्तिष्क में तैयार रखें। उन्होंने बताया कि किस प्रकार से 10वीं वाहिनी, एस.एस.बी. मालबाजार ने आसानी से एक महिला को गिरफ्तार किया जो दर्जनों बच्चों को तस्करी के मंसूबे से ले जा रही थी।
श्री सिंह ने बताया कि एस.एस.बी. सिलीगुड़ी सीमान्त मुख्यालय वाहिनियों ने अब तक 31 मानव तस्करी से पीडि़तों व्यक्तियों को बचाया है और साथ ही 18 मानव तस्करों को इस सिलसिले में बन्दी भी बनाया है। उन्होंने सिलीगुड़ी सीमान्त के पिछले 4 महीनों की मानव तस्करी संबंधी उपलब्धियों पर जोर देते हुए बताया कि पिछले 04 महीनों में सिलीगुड़ी सीमान्त ने मानव तस्करी से 33 लोगों को बचाया है और इसमें लिप्त 18 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि “भारत-नेपाल सीमाओं पर हालांकि सशस्त्र सीमा बल इस अपराध पर नियंत्रण करने में अपनी पुरजोर कोशिश कर रही है, जो एस.एस.बी. कार्मिकों के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हो रही है।
कंचनजुंहा उद्धार केन्द्र, एन.जी.ओ. ने इस कार्यशाला में मानव तस्करी के उद्देश्य, संबंधित ज्वलंत मुद्दे, भारत में आने एवं जाने वाले स्थान, इससे प्रभावित व्यक्ति इत्यादि के बारे में विस्तृत चर्चा की। पुलिस कमिश्नर मेट्रोपॉलिटन पुलिस सिलीगुड़ी आफिस से आये प्रतिनिधि दल ने मानव तस्करी रोकधाम अधिनियम, बंधुआ मजदूर उन्मूलन, बाल श्रम अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम, धारा 366 (अ), और इण्डियन पेनल कोड की धारा 372 इत्यादि के विषय पर विस्तृत चर्चा की। इसके साथ राहत एनजीओ ने सरकार द्वारा मानव तस्करी बचाव हेतु मेडिकल, कानूनी इत्यादि के सहायता से संबंधित विषय पर चर्चा की।
वहीं दूसरी तरफ पुलिस कमिश्नर मेट्रोपॉलिटन पुलिस सिलीगुड़ी आफिस से आये प्रतिनिधि दल ने पुनः तस्करों की खोज और मानव तस्करी निरोधक एजेन्सियों के सामने इस विषय में आने वाली कठिनाईयों के बारे में विस्तृत चर्चा की। मेती एनजीओ नेपाल से आये प्रतिनिधित्व दल ने मानव तस्करी से किस तरह से बचाया जा सकता विषय पर, चाइल्ड नीड इंस्टीट्यूट, एन.जी.ओ. केश मैनेजमैंट, असिस्टेंट फारनेरर्स रजिस्ट्रेशन रिजीनल आफीसर, बागडोगरा, आप्रवासन मुद्दों, टीनी हैण्ड एन.जी.ओ. ने चाइल्ड सुरक्षा संबंधी मुद्दों तथा चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट, एन.जी.ओ. ने कैसे इस दिशा में अपनी कार्यक्षमता में सुधार करें इत्यादि विषय पर विस्तृत चर्चा की। कार्यशाला में मानव तस्करी निरोधक संस्था सिनी के सदस्यों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कार्यशाला में असीम कुमार, मल्लिक उपमहानिरीक्षक, रानीडंगा सेक्टर मुख्यालय, डी.के. सिन्हा, उपमहानिरीक्षक, सिलीगुड़ी सीमान्त, श्री वी. के. पाल, स्टाफ आफिसर (परिचालन एवं आसूचना), सुधीर कुमार वर्मा, सेनानायक 41वीं वाहिनी रानीडांगा, श्री के.एम. करिअप्पा, प्रचार अधिकारी, मीडिया बंधु एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं सीमान्त मुख्यालय, सिलीगुड़ी, सेक्टर मुख्यालय, रानीडांगा, 41वीं वाहिनी, रानीडांगा, अतिरिक्त प्रशिक्षण केन्द्र, रानीडांगा आदि के कार्मिक भी उपस्थित थे। कार्यशाला का समापन समारोह असीम कुमार मल्लिक, उपमहानिरीक्षक रानीडंगा सेक्टर के हाथों किया गया। उन्होंने एस.एस.बी. के कार्यों की जमकर सराहना करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में भारत-नेपाल सीमा पर तैनात एस.एस.बी. कार्मिक अपनी अतिसराहनीय सेवाएं दे रहे हैं तथा इसको समूल नष्ट करने का भरसक प्रयास कर रहे हैं।


