गवर्नर साहब! वचनपत्र के बदले दूसरा वचनपत्र लेना मुझे मंजूर नहीं, मेरा रुपया वापस करो

रिजर्व बैंक ऑफ़ इण्डिया के गवर्नर को एक आम भारतीय नागरिक का पत्र

मधुवन दत्त चतुर्वेदी

प्रतिष्ठा में-

गवर्नर महोदय

रिजर्व बैंक ऑफ़ इण्डिया

मुम्बई (महाराष्ट्र )

बिषय : नोट का समर्पण

महोदय,

विनम्र निवेदन है कि इस पत्र के साथ आप द्वारा जारी नोट क्रमांक .......मूलरूप में संलग्न है, जिस पर आपके द्वारा वचन दिया गया है कि आप धारक को .....रूपया अदा करेंगे।

मैं इस वचनपत्र को आपको समर्पित करता हूँ इसलिए कि आप मुझे वचनानुसार .... रुपया अदा कर सकें।

सरकार द्वारा हाल ही में किये गए विमुद्रीकरण से आम लोगों में हाहाकार मचा हुआ है।

सरकार से मेरा विश्वास हट गया है। इसलिए वचनपत्र के बदले दूसरा वचनपत्र लेना मुझे मंजूर नहीं है।

मेरे पास इसके अलावा कोई मुद्रा उस समय नहीं थी जब प्रधानमंत्री ने इसे 'रद्दी' घोषित किया था। शेष रकम मेरे खाते में थी। प्रधानमंत्री ने अगले दिन बैंक और दो दिन एटीएम बंद रहने की घोषणा की थी। उन्होंने वचन दिया था कि दो दिन बाद सब सामान्य हो जायेगा। लेकिन कुछ सामान्य नहीं हुआ। उनका और उनके मंत्रियों का वायदा झूठा सिद्ध हुआ।

धीरे-धीरे ये भी पता लगा कि उनका फैसला ,तैयारी और आंकलन सब गलत था।

देश में प्रति दस हज़ार एक बैंक शाखा है। लोगों में अफरातफरी मच गयी। एटीएम ने नयी मुद्रा देना-लेना स्वीकार नहीं किया। जिन लोगों ने 2000/- रु का नोट डिजायन किया कराया वे मूर्ख सिद्ध हुए।

मेरे पास एटीएम भी है। चेकबुक भी है।

सब्जीवाला दूधवाला पानवाला कोई 100 या 50 या 20 या 10 रु का चेक लेकर माल देने को तैयार नहीं था। तब मुझे आपके द्वारा जारी इस वचनपत्र की निरर्थकता समझ आई।

ऐसे वचनपत्र किस काम के ! कब कोई सनकी शासक इन्हें रद्दी कह दे !

आप प्लीज इस वचनपत्र को वापस प्राप्त कर इसमें उल्लिखित राशि .....रूपया तत्काल मुझे अदा करें।

भवदीय

(मधुवन दत्त चतुर्वेदी का वाट्स एप संदेश)