अब सवाल कांग्रेस नहीं करेगी वह जनता करेगी जिसने बहकावे में आकर आपको गद्दी तक पहुँचाया।
चंचल
कमबख्त तीन महीने से मुतवातिर गाली सुन रहा था (हूँ )। महँगाई, भ्रष्टाचार, पड़ोसी आतंकवाद, चीन की जमीन, बिजली पानी। ऐलान हुआ- शपथ लिए नहीं कि सब बदल के रख दूँगा। चुनाव के हथकंडे थे। हम भी जानते थे। हमारी गलती रही कि हम या तो जवाब नहीं दे पाए या दिए भी तो मीडिया ने उसे सुनाया नहीं क्यों कि वह तो उनके हाथ बिकी पड़ी थी जिन्होंने “आप” को खरीदने के पहले मीडिया को खरीद रखा था। हम क्या करते ? लेकिन अब तुम जवाब दो। विदेशी निवेश के खिलाफ इतने रहे कि संसद को जाम कर रखा। अब हथियारों तक को उन्हीं के हाथ सौंप रहे हो। वालमार्ट पर बहुत चीख रहे थे, सरकार में आते ही घिघ्घी बँध गयी ? हर बड़े शहर में वालमार्ट की घेरेबंदी चालू है। विरोध में रहकर चीखना आसान होता है लेकिन सरकार में आते ही आटे-दाल की कीमत समझ में आ जायगी। हमें सरकार से कोइ तकलीफ नहीं है। जम्हूरी निजाम में आना-जाना लगा रहता है। लेकिन जो डर हमें था वह, वह रहा जनता का छला जाना। उसे सपना दिखाया। छल प्रपंच का सहारा लिया, उत्तेजक नारे दिए। अब वह किस पर यकीन करेगी ?

मित्र कांग्रेस के पास गांधी का सपना है, उसके पास एक खुली डगर है लेकिन तुम ? गांधी की ह्त्या भी करते हो और फूल चढ़ा कर याद करने का ढोंग भी करते हो ? अपनी नियति तो दुरुस्त करो। अब सवाल कांग्रेस नहीं करेगी वह जनता करेगी जिसने बहकावे में आकर आपको गद्दी तक पहुँचाया।

चंचल। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, चित्रकार व समाजवादी आंदोलन के कर्णधार हैं। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे चंचल जी रेल मंत्रालय के सलाहकार भी रहे हैं। उनकी फेसबुक वॉल से साभार।