गुजरात और नरेन्द्र मोदी का गुजरात
गुजरात और नरेन्द्र मोदी का गुजरात
विष्णु प्रभाकर उपाध्याय
भारतीय जनता पार्टी ने अमेरिकी तर्ज़ पर नरेन्द्र मोदी के नाम पर भारत के प्रधानमंत्री पद के लिए मुहर लगा दी है और इसे संघ और भारतीय जनता पार्टी द्वारा खूब जोर-शोर से इसका प्रचार किया जा रहा है कि मात्र नरेन्द्र मोदी ही एक ऐसे नेता हैं जो भारत का विकास कर सकते हैं। मीडिया का एक बड़ा समूह जो यह प्रसारित करते थक नहीं रहा है और नरेन्द्र मोदी को भारत के युवाओं का चहेता बता रहा है और बड़े-बड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों और प्रबंधन संस्थानों में नरेन्द्र मोदी को बुलाया जा रहा है जहाँ वो तथाकथित गुजरात के विकास मॉडल को प्रस्तुत करते हैं। नरेन्द्र मोदी जो ये कहने में गर्व महसूस कर रहे हैं कि हम भारत को गुजरात बना देंगे। तो हम नरेन्द्र मोदी के विकसित गुजरात की तरफ रुख करते हैं और हम उन आँकड़ों से गुजरेंगे जो गुजरात की सच्चाई को बयाँ करते हैं।
रघुराजम के हालिया रिपोर्ट के अनुसार गुजरात कम विकसित राज्यों में है। किसी भी राज्य या देश के विकास को देखने के लिए जिन आँकड़ों को पैमाने के तौर पर देखा जाता है मुख्यतः वो हैं – शिशु मृत्यु दर, जीने की अपेक्षित आयु, पोषण, साक्षरता और पूँजी निवेश। ...और अगर इन पैमानों पर देखें तो गुजरात की स्थिति निम्न है
1. जब गुजरात के मुख्यमंत्री पद का कार्यभार नरेन्द्र मोदी ने संभाला था तो उस वक्त गुजरात अन्य राज्यों से विकसित था। उस वक्त प्रति व्यक्ति आय की दृष्टि से भारत में गुजरात चौथे स्थान पर था और हरियाणा पहले पर। जबकि गुजरात चौथे स्थान से खिसककर छठवे स्थान पर है।
2. नेशनल कौंसिल ऑफ़ एप्लाइड इकोनॉमिक्स रिसर्च इस नतीजे पर पहुँचा है कि भुखमरी और कुपोषण की दृष्टि से गुजरात उत्तर प्रदेश से पीछे है और गुजरात के 44.6% बच्चे कुपोषित हैं और शून्य से 5 वर्ष की आयु के 66% बच्चे गम्भीर रूप से कुपोषित हैं। गुजरात में उत्तर प्रदेश की अपेक्षा रात में भूखे सोने वालो की संख्या ज्यादा है। 3. जीने की अपेक्षित आयु की बात करें तो साधारण भारतीय की अपेक्षित आयु 60 वर्ष है परन्तु गुजरात की भारतीय आंकड़ो से 2 वर्ष कम है जबकि केरल वासी की अपेक्षा गुजरातवासी 10 वर्ष पहले मृत्यु का आलिंगन कर लेता है। महाराष्ट्र, पंजाब, तमिल निवासी गुजरात की तुलना में ज्यादा जीने की उम्मीद रख सकते हैं।
4. गुजरात में शिशु मृत्युदर महाराष्ट्र,तमिलनाडु और कर्नाटक से ज्यादा है।
5. साक्षरता के मामले में गुजरात 16वें स्थान से खिसककर 18वें स्थान पर चला गया है। यह गिरावट नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्रित्व काल में आई है।
6. अगर पूँजी निवेश की बात करे तो यह खूब जोर-शोर से कहा जा रहा है कि मोदी के शासनकाल में 876 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ है जबकि सम्पूर्ण चाइना में 300 बिलियन डोलर का निवेश 2012 में हुआ है। अब आप इन आँकड़ों को देखकर खुद कल्पना कर सकते हैं कि ये आँकड़े कहाँ तक सही हैं क्योंकि आज चाइना कहाँ है और गुजरात कहाँ है। नरेन्द्र मोदी के इस आकड़े को रिज़र्व बैंक ने भी झूठा कह दिया है। अगर रिज़र्व बैंक की मानें तो इसके अनुसार गुजरात में 5 से 7 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ है जो भारत में निवेश का 5 प्रतिशत है जबकि कर्नाटका और तमिलनाडु में हुआ पूँजी निवेश भारत में हुये पूँजी निवेश का 6 प्रतिशत है और महाराष्ट्र का पूँजी निवेश भारत के पूँजीनिवेश का 35 प्रतिशत है। इन सारे आँकड़ों को देखकर आप खुद अनुमान लगा सकते हैं कि गुजरात में कितना निवेश हुआ है। इस विकास को देखकर मुझे आदम गोंडवी की कविता याद आती है
तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है
मगर ये आँकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है
उधर जमहूरियत का ढोल पीटे जा रहे हैं
वो इधर परदे के पीछे बर्बरीयत है, नवाबी है
लगी है होड़-सी देखो अमीरी औ' गरीबी में
ये गांधीवाद के ढाँचे की बुनियादी खराबी है
तुम्हारी मेज चाँदी की तुम्हारे ज़ाम सोने के
यहाँ जुम्मन के घर में आज भी फूटी रक़ाबी है


