नई दिल्ली। बिलाल कागज़ी गुजरात के जाने-माने मानवाधिकार अधिवक्ता एवं कार्यकर्ता हैं। देश के सभी नागरिकों को बराबर माना जाये इसके लिये कोशिश करते हैं, मानवाधिकार के मामलों में आवाज उठाते हैं और आदिवासियों के मानवाधिकारों को लेकर उन्होंने काफी काम किया है। कल दोपहर एक बजे कुछ लोगों ने उनके सूरत जिले में स्थित कोसम्बा गाँव में घर पर उन्हें जान से मारने की नीयत से हमला किया क्योंकि काज़ी ने एक भाजपा विधायक के रिश्तेदारों के विरुद्ध एक केस लड़ने का फैसला किया था।

बिलाल कागज़ी ने एक एसएमएस करके बताया कि हमलावरों ने उनके पिता, उनके भाई की पत्नी और उनकी सात माह की गर्भवती पत्नी पर जानलेवा हमला किया। इस सिलसिले में काज़ी की माँ रहान बानो ने कोसम्बा पुलिस स्टेशन में भारतीय दण्ड संहिता के तहत एफआईआर संख्या 98/13 दर्ज करायी है। उन्होंने कहा है कि उनके परिवार को लगातार धमकियाँ दी जा रही हैं।

बाद में कागज़ी ने दूरभाष पर हस्तक्षेप.कॉम को बताया कि एक मानवाधिकार अधिवक्ता का गुजरात में कार्य करना दुष्वार है। अपने एवं अपने परिवार की जान बचाये जाने की अपील करते हुये बिलाल कागज़ी ने बताया है कि उक्त घटना के बाद गम्भीर हालत में उनकी पत्नी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और अपनी जान बचाने के लिये उन्होंने अपना घर छोड़ दिया है जबकि भाजपा के दबाव में पुलिस ने उनके विरुद्ध फर्जी एफआईआर दर्ज़ कर ली है। उन्होंने बताया है कि राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष वह इस प्रकरण को ले गये हैं परन्तु वहाँ से न्याय की कोई आशा नहीं है।