गुलाम मोहम्मद को सोही के हिन्दुओं पर भरोसा था “उन्हें कोई क्यों मारेगा?”, ये कत्ल उस विश्वास का हुआ
गुलाम मोहम्मद को सोही के हिन्दुओं पर भरोसा था “उन्हें कोई क्यों मारेगा?”, ये कत्ल उस विश्वास का हुआ
सोही गाँव (पहासू) बुलंदशहर से लौटकर राजीव यादव
गुलाम साहब को भरोसा था कि उन्हें कोई क्यों मारेगा...
ऊपर एक अधेड़ शख्स की फ़ोटो और नीचे रोता बिलखता एक बसा बसाया परिवार जो टूट गया.
ये बुलंदशहर के क़स्बा पहासू के गाँव सोही के गुलाम मोहम्मद साहब हैं, जिन्हें पिछली 2 मई को सूबे के मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ द्वारा बनाई गई हिन्दू युवा वाहिनी के गुंडों ने उस वक्त मारा जब वे गांव के पास के बाग़ में थे.
एक लड़के-लड़की के घर से जाने के बाद हिन्दू युवा वाहिनी के लम्पटों को मौका मिला और वे गांव के चार घर वाली मुस्लिम बस्ती में जाकर डराने-धमकाने लगे.
2 मई की सुबह जब भगवा बांधे मोटर साइकिल पर सवार वाहिनी के लफंगे गांव की तरफ आते दिखे तो मुस्लिम परिवार की महिलाएं घर छोड़ जंगल की तरफ भागने लगीं. पर इसी बीच वे वहाँ पहुंच गए और महिलाओं के साथ मार-पीट और अभद्रता करते हुए उस बाग की तरफ बढ़ गए जहाँ पेड़ की ठंडी छाँव में गुलाम आराम कर रहे थे.
फिर क्या था उन भगवाधारियों ने गुलाम को घसीटते हुए गाड़ी पर लाद लिया और कोई 500 मीटर की दूरी पर ले जाकर लोहे की रॉड, घूसे-मुक्के से मार-मारकर मार डाला...
कल Farrah Shakeb, Nehal Haider, Amalendu Upadhyaya जी के साथ सोही जाना हुआ.
गुलाम साहब के बेटे से जब चलते-चलते पूछा कि सब भाग रहे थे वो क्यों नहीं भागे तो बेटे ने कहा कि उनसे लोगों ने कहा पर उन्होंने कहा कि उन्हें कोई क्यों मरेगा?
गुलाम साहब नहीं रहे पर क्या उनकी हत्या ने उनके जवाब रूपी सवाल का जवाब दे दिया?
ख़ैर हिन्दू युवा वाहिनी के गुंडों द्वारा मारने-पीटने के बाद उस बाग के मालिक और प्रधान जो कि हिन्दू समुदाय से हैं, वहां तत्काल पहुँचे.
अब देखना होगा कि क्या हजारों हिन्दू समुदाय की आबादी वाला सोही गांव अपने गांव के चार परिवार वाले मुस्लिमों, जो कि पलायन की बात करने लगे थे, उन्हें रोक पाएगा?
क्या सोही का हिन्दू समाज उन हिन्दू युवा वाहिनी के उन लम्पटों को सजा दिलाने और गुलाम साहब के विश्वास को पुनः बहाल कर पाएगा कि उन्हें कोई क्यों मारेगा...
गुलाम मोहम्मद को सोही के हिन्दुओं पर भरोसा था “उन्हें कोई क्यों मारेगा?”, ये कत्ल उस विश्वास का हुआ
सोही गाँव (पहासू) बुलंदशहर से लौटकर राजीव यादव
गुलाम साहब को भरोसा था की उन्हें कोई क्यों मारेगा...
ऊपर एक अधेड़ शख्स की फ़ोटो और नीचे रोता बिलखता एक बसा बसाया परिवार जो टूट गया.
ये बुलंदशर के क़स्बा पहासू के गाँव सोही के गुलाम मोहम्मद साहब हैं, जिन्हें पिछली 2 मई को सूबे के मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ द्वारा बनाई गई हिन्दू युवा वाहिनी के गुंडों ने उस वक्त मारा जब वे गांव के पास के बाग़ में थे.
एक लड़के-लड़की के घर से जाने के बाद हिन्दू युवा वाहिनी के लम्पटों को मौका मिला और वे गांव के चार घर वाली मुस्लिम बस्ती में जाकर डराने-धमकाने लगे.
2 मई की सुबह जब भगवा बांधे मोटर साइकिल पर सवार वाहिनी के लफंगे गांव की तरफ आते दिखे तो मुस्लिम परिवार की महिलाएं घर छोड़ जंगल की तरफ भागने लगीं. पर इसी बीच वे वहाँ पहुंच गए और महिलाओं के साथ मार-पीट और अभद्रता करते हुए उस बाग की तरफ बढ़ गए जहाँ पेड़ की ठंडी छाँव में गुलाम आराम कर रहे थे.
फिर क्या था उन भगवाधारियों ने गुलाम को घसीटते हुए गाड़ी पर लाद लिया और कोई 500 मीटर की दूरी पर ले जाकर लोहे की रॉड, घूसे-मुक्के से मार-मारकर मार डाला...
कल Farrah Shakeb, Nehal Haider, Amalendu Upadhyaya जी के साथ सोही जाना हुआ.
गुलाम साहब के बेटे से जब चलते-चलते पूछा कि सब भाग रहे थे वो क्यों नहीं भागे तो बेटे ने कहा कि उनसे लोगों ने कहा पर उन्होंने कहा कि उन्हें कोई क्यों मरेगा?
गुलाम साहब नहीं रहे पर क्या उनकी हत्या ने उनके जवाब रूपी सवाल का जवाब दे दिया?
ख़ैर हिन्दू युवा वाहिनी के गुंडों द्वारा मारने-पीटने के बाद उस बाग के मालिक और प्रधान जो कि हिन्दू समुदाय से हैं, वहां तत्काल पहुँचे.
अब देखना होगा कि क्या हजारों हिन्दू समुदाय की आबादी वाला सोही गांव अपने गांव के चार परिवार वाले मुस्लिमों, जो कि पलायन की बात करने लगे थे, उन्हें रोक पाएगा?
क्या सोही का हिन्दू समाज उन हिन्दू युवा वाहिनी के उन लम्पटों को सजा दिलाने और गुलाम साहब के विश्वास को पुनः बहाल कर पाएगा कि उन्हें कोई क्यों मारेगा...


