गोरैया : अब मकान भी चुप रहता है
गोरैया : अब मकान भी चुप रहता है
गोरैया : अब मकान भी चुप रहता है
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जब मकान थे कच्चे पक्के
घर के अंदर घर था
गोरैया का घर
लटकी फ़ोटो
छत की संधि
पड़छत्ती गट्ठर के पीछे
उसके हिस्से का भी घर था
टूटी खिड़की दफ़्ती लगाते
फिर भी घुस आती
बिखराती तिनके
झाड़ू से झिडकी देती माँ
बच्चे कहीं अंडे छू लेते
याद है सबको तब की डाँट
कभी टूट कर गिरते अंडे
मातम ही छा जाता
पंखे से टकराती
पानी पिला कर शोक मनाते
नन्हें बच्चों की चीं चीं से
घर किलकता
न जाने कब चुपके से बेदख़ल हो गई
भाईचारे की तरह
अब आत्मकेंद्रित मन
मकान भी
पिछली बार कब दिखी गोरैया
बरसों से नहीं चिंचियाई
बेटी सी घर में
अब मकान भी चुप रहता है
जसबीर चावला
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