गौहत्या या गौरक्षा... गाय के नाम पर मानव हत्या बनाम गौरक्षा
गौहत्या या गौरक्षा... गाय के नाम पर मानव हत्या बनाम गौरक्षा
(शोधार्थी दिल्ली विश्वविद्यालय)
पिछले महीने 26-27 अक्टुबर 2017 को राजस्थान के अलवर जिले में भरतपुर के गांव घाटमिका में एक Fact Finding के लिए जाना पड़ा, घटना 10 अक्टुबर की है। परन्तु व्यवस्तता के चलते समय न मिल पाने के कारण हमारी टीम थोड़ी देर से पंहुची। मैं सोच रही थी कि इतने समय के बाद जाने पर शायद इस वारदात पर पुलिस ने काफी काम कर लिया होगा और किसी नतीजे पर पंहुच ही गई होगी।
अलवर जिले के भरतपुर में दो मुस्लिम गोपालक पिकअप वाहन मे दोसा क्षेत्र से तीन गाय व तीन बछड़े खरीदकर भरतपुर अपने गांव घाटमिका जा रहे थे जहां पर कुछ अज्ञात लोगो ने उन पर हमला कर दिया, इस हमले मे उमर की मौके पर ही मौत हो गई। ताहीर के कंधे पर गोली लगी वह किसी तरह वहां से भागने में कामयाब हो सका, ड्राईवर जावेद भी तुरन्त भागा और अपनी किसी तरह अपनी जान बचाई।
पुलिस इस घटना को केवल लूटमार की घटना मान रही है और उमर व जावेद को गौतस्कर मान रही है इसी कारण उमर की मौत पर किसी भी तरह का मुआवजा न देने की बात कह रही हैं जबकि गांव के लोगो के अनुसार उमर व जावेद गोपालक है जो दुधारू गाय और उसके बछड़े को एक साथ ला रहे थे।
उमर अपने घर का अकेला कमाने वाला था उसके नौ बच्चे हैं, एक बच्चा उसकी मौत के चौथे दिन पैदा हुआ। खेती इतनी कम है कि उससे सिर्फ घर के खाने लायक अनाज ही पैदा होता है अब उसके घर वाले सोच रहे हैं कैसे उनका गुजारा होगा, अगर मुआवजे की राशि मिल जाती तो वह कुछ दिन आराम से निकाल सकते थे। गांव के लोग इस घटना को गौरक्षकों द्वारा की गई गुण्डागर्दी मान रहे हैं, जबकि पुलिस आयुक्त का साफ कहना है कि मेव लोगों का काम ही गौतस्करी करना है और घाटमिका में ही 250 से अधिक मामले गौतस्करी, लूटमार चोरी के हैं, हालांकि सबूत उन्होंने एक मामले का भी नहीं दिया। इसी कारण जावेद को गौतस्करी के मामले मे जेल मे डाल दिया है।
मेव गौपालक या गौतस्कर
मेवात मे रहने वाले मुस्लिम को मेव कहा जाता है। वर्तमान मे मेव लोग हरियाणा, राजस्थान की सीमा मे सटे जिला मेवात और अलवर के गांवो मे बसे हुए है। मेवात अलवर दक्षिणी हरियाणा व राजस्थान का वह इलाका है जो विकास और जागरूकता की दृष्टि से काफी पिछड़ा हुआ है। मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के कारण इसे उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है। हलांकि इनमें हिंदु भी होते हैं, परन्तु बहुलता मुस्लिमों की होने से मेव को गोपालक मुस्लिमों का पर्याय बना दिया।
मेव लोग बरसों से मेवात में रहते आ रहे हैं और इन्हीं के नाम पर यह इलाका मेवात कहलाता है। इससे पहले ये पहाड़ों में रहते थे, उस क्षेत्र का नाम मेवाड़ (मेव की आड़) भी इन्हीं के नाम पर पड़ा है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहा खेती की जमीन की कमी है इसी वजह से मेव लोग पूर्ण रूप से खेती पर निर्भर नहीं होते, अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए आय का मुख्य स्रोत पशुपालन है। यहां के लोग बकरी भेड़े व गाय भैंस पालते हैं तथा दूध का व्यवसाय करते हैं।
गौरक्षा चौकी तथा हिन्दू चौकियां
अलवर की पुलिस का मानना है कि मेव लोग पशुपालन की आड़ में गौतस्करी का काम करते हैं, इसी कारण भरतपुर अलवर में 49 स्थानों पर अस्थाई चौकियां खोली गईं जिन्हें ‘गौरक्षा चौकी’ नाम दिया गया। जब हम भरतपुर से अलवर जा रहे थे तब हमारी नजर ऐसी ही कई चौकियों पर पड़ी, वहां तैनात सिपाहियों से पता चला कि गौतस्करों को रोकने के लिए तीन-चार साल (जब से भाजपा की सरकार आई) से इन चौकियों का निर्माण हुआ है। ये चौकियां ऐसे स्थानो पर लगाई गईं जहां से हरियाणा जाने के कच्चे रास्ते पड़ते हैं, क्योंकि राजस्थान से हरियाणा के जरिये गौतस्करी करना आसान हो जाता है। सईदन मोड़, सीकरी फाटक नगर, दुदावल मोड़, गारौली के पास चौराहा, बेढब की प्याउ, टोडा मे छात्रवास पर, पास्ता मोड़, धमारी मोड़, गुलपाडा धावक, अमरूका चौराहा, ताजुल्लावास, सोनोश्वर की गौरक्षा चौकियों को स्थाई किया गया है।
जब हमने पूछा कि अब तक कितने गौतस्करी के मामले पकड़े गए उनका जवाब था ‘‘अब तक एक भी ऐसा मामला किसी चौकी पर नहीं आया, गौतस्कर अब चालाक हो गए हैं, वे रात में तस्करी करते हैं’’।
अलवर का विधायक भाजपा का ज्ञानदेव आहूजा है जो मुस्लिम विरोधी कार्यों के लिए हमेशा चर्चा में रहता है। उनका मानना है कि ‘पुलिस ठीक से काम नहीं करती इसलिए हमने हिन्दू चौकियां बनाई हैं जो गौतस्करों को रोकेंगी’।
विधायक जी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन हिन्दू चौकियों के निर्माण का आदेश भारत सरकार और राज्य सरकार ने कब दिया? या फिर इन हिन्दु चौकियों पर कौन से अधिकारी कार्यरत् होंगे? स्पष्ट है कि इन चौकियों पर जो युवक तैनात किए गए वे उन बेराजगार युवकों मे से होते होंगे जिन्हें नेता लोग अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करते हैं।
गाय के नाम पर मानव हत्या बनाम गौरक्षा
गौरक्षा के नाम पर व्यक्ति की हत्या का यह कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले भी राजस्थान में पहलवान पहलू खान की हत्या का मामला तूल पकड़ा था, जो कि पेशे से गोपालक था और पशु मेले से गाय खरीदकर पालने के लिए ले जा रहा था। उसे भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला। पुलिस ने तुरन्त कार्यवाही करते हुए कुछ लोगों को पकड़ा परन्तु बाद में छोड़ दिया। उमर के केस में भी दो लोगों का पकड़ा परन्तु अन्य सात लोगों को अभी तक नहीं पकड़ पाई उल्टे जावेद और उमर को गौतस्कर बता कर जावेद को जेल भेज दिया। इस केस में पुलिस ने हमें गुमराह करने की कोशिश भी की गई। हमें किसी भी तरह का साक्ष्य नहीं दिखाया गया। जिस गाड़ी में गाय लाई गई, उसकी जगह हमें वो गाड़ी दिखाई गई जो कि थाने पर कई सालों से खड़ी थी (स्थानीय लोगों से गाड़ी के बारे में पता चला)। इसी प्रकार पुलिस ने उमर व जावेद के पास से देशी कट्टे की बरामदी की बात कही परन्तु हमें किसी भी तरह की फोटो या कोई और साक्ष्य नहीं दिखाया।
राजस्थान के गौशालाओं मे गाय देख-रेख के अभाव में आए दिन गायों की मौत हो रही है। राजस्थान के जयपुर स्थित हिंगोनिया गौशाला में जुलाई-अगस्त 2016 के अन्दर ही 1500 गायों की मौत की खबर आई। राजस्थान के ही सिलहोर और जालौर जिले में भारी वर्षा से 800 गायों के मरने की खबरें आई।
इसी प्रकार हरियाणा कुरूक्षेत्र के सरकारी गौशाला मे 25 गाय मर गई। भाजपा शासित सभी राज्योे में गायों कि यही दशा है। राजस्थान सरकार गाय की सुरक्षा के नाम पर गौरक्षा बना रही है, गाय के नाम पर अलग से टैक्स वसूल रही है लेकिन गौशालाओं मे चारे आदि की व्यवस्था तथा गरीब गोपालको को किसी भी तरह की आर्थिक सुविधाएं मुहैया नहीं करवाती, जिससे गायों की उचित देखभाल हो पाये और गाएं सड़कों पर कचरा, प्लास्टिक खाने को विवश न हो। आए दिन गाय सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो रही है जिससे व्यक्ति और दोनों की ही जान जाती है।
ऐसे मे दुनिया के नबंर वन बीफ निर्यातक भारत में गौवध अथवा गौरक्षा के नाम पर बेकसूर दलितों व मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है जबकि सबसे ज्यादा गाय भाजपा शासित राज्यों में मर रही है वो भी गौतस्करो द्वारा नहीं अपितु गौशालाओं व सड़क दुर्घनाओं में।
इससे स्पष्ट है कि सरकार व इनके द्वारा पोषित इन गौरक्षकों का मकसद गाय की रक्षा करना नहीं अपितु गाय के नाम पर अल्पसंख्यकों व दलितों में दहशत डालना है तथा हमारे नेताओं का काम युवकों का जाति धर्म के नाम पर बांटकर शिक्षा, रोजगार महंगाई जैसे मुद्दों से धयान भटकाना है। अतः हमारे समाज को आवश्यक है कि आज देश के नेताओं व शासकों की मंशा को समझे तथा यह जानने का प्रयास करें की हमारे असली मुद्दे गाय की सुरक्षा होनी चाहिए या फिर महिला, व्यक्ति की सुरक्षा होनी चाहिए। हमारी आधारभूत मांग रोजगार, शिक्षा, मकान व सस्ती दैनिक वस्तुएं होनी चाहिए। आज हमें जरूरत है कि हम समाज मे भाईचारे को बना कर रखें और अपने आस-पड़ोस के इस तरह के आपराधिक मामलों मे संलिप्त लोगों को एक्सपोज करें तथा ऐसी घटनाओं का विरोध करें जिससे कि हम ऐसी फासीवादी राजनीति को खत्म कर एक नई भेदभावरहित राजनीति का निर्माण कर सकें।


