ग्रीनपीस कार्यकर्ता प्रिया पिल्लई ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मनमाने और अवैध ‘ऑफलोडिंग’ को चुनौती दी
ग्रीनपीस कार्यकर्ता प्रिया पिल्लई ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मनमाने और अवैध ‘ऑफलोडिंग’ को चुनौती दी
नई दिल्ली, 27 जनवरी। ग्रीनपीस कार्यकर्ता प्रिया पिल्लई ने आज दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने अवैध और मनमाने तरीके से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर ऑफलोडिंग किये जाने को चुनौती दी है।
11 जनवरी 2015 को, प्रिया ब्रिटिश सांसदों को संबोधित करने के लिये लंदन जा रही थी। वहां वो सांसदों को सिंगरौली स्थित महान वन क्षेत्र, मध्य प्रदेश में लंदन स्थित कंपनी एस्सार द्वारा किये जा रहे मानवाधिकारों और वनाधिकार के उल्लंघन को लेकर बात करने वाली थी।
ग्रीमनीस ने कहा है कि सरकारी एजेंसी द्वारा प्रिया की अवैध ‘ऑफलोडिंग’ न सिर्फ उसके व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी के मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन है बल्कि यह उसके प्रतिष्ठा को जानबूझकर बदनाम करने का प्रयास भी है। प्रिया अपने खिलाफ जारी कथित लुकआउट सर्कुलर को भी चुनौती देंगी। सर्कुलर का कोई कानूनी आधार नहीं है क्योंकि प्रिया के खिलाफ न तो किसी तरह के आरोप सिद्ध हुए हैं और न ही वो कभी किसी केस में फरार घोषित हुई हैं।
ग्रीनपीस के कार्यकारी निदेशक समित आईच ने कहा, “प्रिया की ऑफलोडिंग ने लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया है। सरकार अपने देश के सिविल सोसाइटी के खिलाफ इस तरह का रवैया नहीं अपना सकती है। सरकार को डरने की बजाय सिविल सोसायटी के साथ मिलकर काम करना चाहिए”।
प्रिया की ऑफलोडिंग एक अकेला मामला नहीं है। पिछले सालभर से, ग्रीनपीस के कई कार्यकर्ताओं को सरकारी अधिकारियों द्वारा परेशान किया जाता रहा है। एक तरफ सिंगरौली मध्य प्रदेश में शांतिपूर्वक काम कर रहे वनाधिकार कार्यकर्ताओं को आधी रात में गिरफ्तार किया गया वहीं ग्रीनपीस ब्रिटेन के कई कार्यकर्ताओं को भारतीय एयरपोर्ट पर पूछताछ का सामना करना पड़ा। ऐसे ही एक कार्यकर्ता बेन हर्गरेव्स को वैध वीजा होने के बावजूद एयरपोर्ट से ही ब्रिटेन वापस भेज दिया गया था।
पिछले साल जून में, गृह मंत्रालय ने ग्रीनपीस इंडिया को ग्रीनपीस इंटरनेशनल और क्लाईमेट वर्क्स फाउंडेशन से मिलने वाली विदेशी फंड पर रोक लगा दी थी। ग्रीनपीस इंडिया ने सरकार के इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। पिछले हफ्ते 20 जनवरी को हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय को अवरुद्ध फंड ग्रीनपीस इंडिया के खाते में जमा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी माना कि मंत्रालय की कार्यवाही मनमाना, अवैध और असंवैधानिक है।
ग्रीनपीस इंडिया के साथ-साथ दूसरे सिविल सोसाइटी के सदस्य भी प्रिया के साथ खड़े हैं और सबने उनके इस निर्णय का समर्थन किया है। साथ ही सिविल सोसाइटी ने आग्रह किया है कि प्रिया के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर को खारिज किया जाय और उसके पासपोर्ट से ‘ऑफलोड’ शब्द को हटाया जाय।


