ग्रीनपीस का एफसीआरए लाइसेंस निरस्त ?
ग्रीनपीस का एफसीआरए लाइसेंस निरस्त ?
9 अप्रैल 2015 को गृह मंत्रालय ने ग्रीनपीस पर एफसीआरए नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए उसके एफसीआरए लाइसेंस को निलंबित कर दिया था और सभी बैंक खातों को भी सील कर दिया था। ग्रीनपीस ने गृह मंत्रालय की इस मनमानी कार्यवाई को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी।
27 मई 2015 को दिल्ली हाईकोर्ट ने ग्रीनपीस को अंतरिम राहत देते हुए उसे अपने दो बैंक खातों को इस्तेमाल करने की इजाजत दी थी। अदालत के इस फैसले के बाद गृह मंत्रालय को अपनी प्रतिक्रिया सौंपनी थी। इस मामले में अगली सुनवाई कल, यानि 4 सिंतबर 2015, को होनी है।
एफसीआरए पंजीकरण निरस्त करने पर ग्रीनपीस की प्रतिक्रिया
ग्रीनपीस को मिली जानकारी के अनुसार गृह मंत्रालय ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि ग्रीनपीस के एफसीआरए लाइसेंस को निरस्त कर दिया गया है। यह खबर गृह मंत्रालय के मनमानी कार्यवाई को लेकर सुनवाई के ठीक एक दिन पहले आयी है।
इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए ग्रीनपीस इंडिया की अंतरिम सह-कार्यकारी निदेशक विनुता गोपाल ने कहा, “ग्रीनपीस बिना डरे अपने अभियानों को जारी रखेगा और जल्द ही सिविल सोसाइटी के उपर किये जा रहे राष्ट्रव्यापी दमन के खिलाफ एक रचनात्मक अभियान को शुरू करेगा।”
विनुता ने कहा, “हमारे एफसीआरए लाइसेंस का निरस्तीकरण इस सरकार के लगातार असहमत आवाजों को दबाने की कोशिश में अगला कदम है। यह उन सभी अभियानों को दबाने का प्रयास है जो टिकाऊ भविष्य और पारदर्शी सार्वजनिक प्रक्रियाओं के लिये चलाये जा रहे हैं।”
विनुता का कहना है, “ हमारे विदेशी खातों पर रोक लगा कर शायद इस सरकार ने सोचा हो कि हमारा काम बंद हो जाएगा। लेकिन शायद गृह मंत्रालय यह नहीं जानतe कि हमारे काम को बड़ी संख्या में भारतीयों का समर्थन प्राप्त है, और भारतीय नागरिकों से मिल रहे आर्थिक सहयोग से हमारे अधिकतर काम यथावत जारी रहेंगे। बल्कि सरकार के इस नाटकीय कार्यवाई के खिलाफ हम कल ही से एक रचनात्मक ऑनलाइन अभियान शुरू कर रहे हैं। हमें विश्वास है कि इस अभियान के द्वारा हम अपनी लड़ाई को अपने ढ़ंग से जारी रखेंगे और सत्ता में बैठे लोगों को याद दिलायेंगे कि असहमति का अधिकार लोकतंत्र का अटूट अंग है।”


