घर जलाने से पहले गाय को खोल दिया और बकरी को जला दिया, क्यों कि बकरी मुस्लिम और गाय हिन्दू.....

राजीव यादव

ये निप्पल से मेमने को दूध पिलाती माँ को देख इंसान और जानवर में फर्क ख़त्म हो जाता है।
पर इस मेमने की माँ के बारे में नहीं जानना चाहेंगे आप?
जब धर्म के नशे में चूर लोगों ने गुम्मखान पुरवा की मुस्लिम बस्ती पर हमला किया जिसमें सभी 41 घरों को आग लगा दी, उसी में इस मेमने की माँ भी जलकर राख हो गयी।

पर इसी वीरान बस्ती के खाक मकानों के सामने गाय को बंधे देखा तो पूछने पर मालूम हुआ कि गाय को आग लगने से पहले खूंटे से खोल दिया।

आखिर क्यों इस मेमने की माँ को नहीं खोला?
इस सवाल के जवाब को खोजते हुए जेहन में नवम्बर 2012 में फ़ैज़ाबाद के भदरसा गांव की खाक हुयी मुस्लिम बस्ती सामने आ जाती है।

एक खाक मकान में एक गाय को बंधा देख जब पूछा गया तो एक बूढ़ी दादी ने कहा कि उन लोगों ने घर जलाने से पहले गाय को खोल दिया और बकरी को बंधे रहने दिया और आग लगा दी क्यों कि बकरी मुस्लिम और गाय हिन्दू......

ग़ालिब चचा को भी लोगों ने समझाया था कि दिवाली की बर्फी हिन्दू है और इमारती मुसलमान।