घर बार : बच्चे की ठोस आहार की शुरुआत हो सही
घर बार : बच्चे की ठोस आहार की शुरुआत हो सही
दिव्या स्नेह जोशी
10 महीने के आहान की मां निशिता अग्रवाल पीडियाट्रिशियन से मिलने के बाद काफी दुखी व चिंतित हो गई। डाॅक्टर ने उन्हें बताया कि आहान ऐनीमिया से ग्रस्त है, क्योंकि उसके रक्त में आयरन की कमी है। निशित समझ नहीं पाई कि ऐसा कैसे हो गया? उनके लिए यह बेहद अफसोस की बात थी कि एक मां के तौर पर वह अपना फर्ज निभाने में नाकाम हो गई थीं। अपने बच्चे को फीडिंग करते समय उन्होंनेे उन सभी कारकों का ख्याल रखा था जिन पर तब ध्यान देना चाहिए जब बच्चा मां के दूध के अलावा ठोस आहार लेना शुरु करता है; लेकिन वहां पर कुछ गलत हो गया जिससे निशिता अनजान रहीं।
डाॅ. नितिन वर्मा, पीडियाट्रिशियन, मैक्स हैल्थकेयर, साकेत, नई दिल्ली के अनुसार, ’’वे माएं जो अपने बच्चे को ठोस आहार खिलाना शुरु करती हैं उनके लिए फैसला करना आसान नहीं होता। किंतु बेहद ध्यान देने से यह बदलाव सरल हो जाता है। छ महीने से पहले तक मां का दूध ही बच्चे के लिए सर्वोŸाम होता है लेकिन इसके बाद जब बच्चे को ठोस आहार शुरु किया जाता है तो पोषण में कमी की घटनाएं हो सकती हैं जैसे कि आयरन की कमी। बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए स्वास्थ्यकर तरीकों को आजमाना होता है। इसलिए बच्चे की आहार योजना बनाते वक्त कई कारकों को ख्याल में रखना चाहिए।’’
भीतर छुपी समस्या
निशिता का अनुभव बड़ी संख्या में भारतीय माताओं के अनुभव को प्रदर्शित करता है। छः महीने के बाद बढ़ते बच्चे की क्या आवश्यकताएं इस बारे में अपूर्ण जानकारी के चलते विकसित होते बच्चे के शरीर में पोषक तत्वों की कमी रह जाती हैं। यह देखा गया है कि छः महीने के बाद बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पोषण नहीं मिल पाता क्योंकि विविध प्रकार के पुष्टिकर जैसे कि आयरन, प्रोटीन, जि़ंक, विटामिन व कैल्शियम मां के दूध से नहीं मिलते।
’’जब डाॅक्टर ने मुझे बताया कि आयरन की कमी के चलते आहान को ऐनीमिया हो गया है, तो मैं बहुत डर गई। उसने कहा कि शायद ऐसा इसलिए हुआ है कि उसकी खुराक में पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा। इस बात से मैं सोच में पड़ गई और मैंने कई सारी किताबें पढ़ डालीं ताकि समझ सकूं कि इस समस्या का क्या हल हो सकता है और मैंने पाया कि अपने बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतों को समझने के लिए मेरी अब तक की जानकारी नाकाफी थी। मुझे पूरक आहार के महत्व के बारे में कुछ मालूम नहीं था। मेरे लिए अपने बच्चे को ठोस आहार देना एक सामान्य सी बात थी। लेकिन शुक्र है कि अपनी अज्ञानता से मैं बाहर आ गई। आहान को सावधानी पूवर्क पोषण दिया गया और अब वह स्वस्थ है।’’ निशिता ने हर्षपूर्वक बताया।
अगर आप माता हैं और आपका बच्चा 6 महीने का होने जा रहा है तो आपको सोचना शुरु कर देना चाहिए। छः महीने के बाद आपके बच्चे की पोषण संबंधी आवश्यकताएं काफी अधिक हो जाती हैं और आपको यह सुनिश्चित करना होता है कि आपके बच्चे को पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक खुराक मिले। आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि 6 महीने के बच्चे का पेट उसकी मुट्ठी के बराबर होता है इसलिए उसके लिए ज्यादा मात्रा में खा पाना संभव नहीं होता। इसलिए यह बहुत जरूरी हो जाता है कि बच्चे को सघन पोषण वाली चीजें, थोड़ी थोड़ी मात्रा में देनी चाहिए ताकि उसे प्रचुर पोषण मिले।
ठोस आहार का आरंभ : जानकारी के साथ
यह जानना महत्वपूर्ण है कि बच्चे को ठोस आहार देना धीमे- धीमे बढ़ने वाली प्रक्रिया है। स्तनपान से ठोस आहार की ओर आना एक बहुत बड़ी घटना है। आपके अपने बच्चे को पूरा वक्त व ध्यान देना चाहिए ताकि वह शारीरिक व भावनात्मक तौर पर इस बदलाव के प्रति व्यवस्थित हो सके।
जब आप संपूरक आहार देना आरंभ करें तो आपको यह सुनिश्चित करना होता है उस आहार से आपके बच्चे को सभी पौष्ठिक पदार्थ मिलें जिनकी उसे जरूरत है। आयरन, जिंक, कैल्शियम, विटामिन ए, विटामिन ई, और फाॅस्फोरस कुछ ऐसे पुष्टिकर हैं जो आपके बच्चे की जरूरत पूरी करने के लिए अहम हैं। खुराक कैलोरी व प्रोटीन से भरपूर होनी चाहिए। महत्वपूर्ण बात यह है कि आप वे खाद्य पदार्थ चुनें जिनसे बच्चे की ये विशिष्ट जरूरतें पूरी हो सकें। शुरुआत में आप अपने शिशु को कोमल कैलोरी युक्त खाद्य पदार्थ दे सकती हैं जैसे कि सूजी की खीर, घी वाली खिचड़ी, दलिया, कुचला हुआ केला आदि।
आपके शिशु के लिए इस उम्र में आयरन बेहद अहम है। जो शिशु मां के गर्भ में वक्त पूरा करके जन्म लेते हैं उनके शरीर में आयरन का भंडार 6 महीनों तक रहता है। उसके बाद उसके शरीर से आयरन का भंडार कम होने लगता है और उसे अपनी खुराक में आयरन चाहिए होता है। पर्याप्त आयरन न मिलने से, जैसा कि आहान के केस में हुआ, आयरन की कमी हो जाती है और शिशु ऐनीमिया से ग्रस्त हो जाता है।
डाॅ. नितिन वर्मा ने बताया, ’’राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-3 के मुताबिक 6 महीने से 3 साल की उम्र के 79 प्रतिशत भारतीय बच्चे ऐनीमिक हैं। खुराक में आयरन की कमी बच्चों में ऐनीमिया होने का सबसे बड़ा कारण है। यह समस्या बहुत जल्दी शुरु होकर काफी लंबे समय तक बनी रह सकती है और हो सकता है कि इस बात का पता न लगे। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि मां इस बात का पूरा ख्याल रखे कि उसके बच्चे की आयरन की जरूरत पूरी हो।’’
इस लिहाज से आयरन युक्त खाद्य को खास महत्व देना चाहिए। बतौर एक मां आपको यह सुनिश्चित करना है कि आप अपने शिशु के लिए सही खुराक चुनें। आप कुचली हुई सब्जियों से शुरुआत करें और फिर धीरे धीरे मांस और मछली (बोनलैस और अच्छी तरह पकाया हुआ एवं कोमल) खिलाना शुरु करें। दालें, फलियां, अंकुरित दालें, ब्रोकाॅली व बंदगोभी आयरन का अच्छा स्त्रोत हैं। घर में बने भोजन के अलावा फोर्टिफाइड फूड भी उपलब्ध हैं जो कि शिशुओं व बच्चों की खुराक की कमी पूरी करते हैं।
संपूरक आहार व संपूर्ण पोषणः साथ साथ चलते हैं
तकनीकी रूप से कहा जाए तो संपूरक आहार बहुत महत्व के हैं क्योंकि कई ऐसे पुष्टिकर हैं जो शरीर में नहीं बनते और उन्हें हम अपने भोजन से ही प्राप्त कर सकते हैं। कुछ पुष्टिकर ऐसे हैं जिनका बहुत अधिक महत्व है क्योंकि ये बच्चे की शरीर प्रणाली को अच्छी प्रकार से चलाने में भूमिका निभाते हैंः
- आयरन, बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास के अलावा हीमोग्लोबिन के उत्पादन के लिए जरूरी है। हीमोग्लोबिन कोशिकाओं को आॅक्सीजन पहुंचाने व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में प्रमुख भूमिक निभाता है।
- कैल्शियम व फाॅस्फोरस, हड्डियों की बढ़त के लिए जरूरी हैं। कैल्शियम की प्रचुर मात्रा की सिफारिश की जाती है ताकि बाद की जिंदगी में बोन फ्रैक्चर की संभावना कम हो।
- विटाामिन ए विटामिन ई, आपके बच्चे की इम्युनिटी मजबूत करने के लिए जरूरी हैं क्योंकि इनसे ऐंटीबाॅडीज़ का निर्माण होता है और इस प्रकार बच्चे सेहतमंद रहते हैं।
- प्रोटीन, समग्र वृद्धि व विकास में केन्द्रीय भूमिका निभाते हैं और यह शरीर के ऊतकों के निर्माण व मरम्मत के लिए जरूरी है। प्रोटीन की कमी के चलते बच्चे की बढ़त में कमी रह जाती है।
- ऐसेंशियल फैटी ऐसिड, डोकोसाहैक्सानोएक ऐसिड जो कि एक विशिष्ट ओमेगा-3 ऐसेंशियल फैटी ऐसिड है, सुरक्षा प्रणाली, दिमाग व दृष्टि के विकास के लिए जरूरी है।
कैलोरी से भरपूर खुराक अहम है जिससे बच्चे की ऊर्जा संबंधी जरूरतें पूरी होती हैं। अगर ऊर्जा की जरूरत पूरी न हो तो हो सकता है कि प्रोटीन को ऊर्जा के लिए प्रयोग किया जाए। यह कहने की आवश्यकता नहीं इससे समग्र विकास व वृद्धि पर विपरीत असर पडे़गा।
फोर्टिफाइड संपूरक आहार शुरुआती बचपन में बढ़ती पोषण जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है। संपूरक आहार की विविधता का एक अन्य लाभ यह है कि इससे शिशु की स्वाद ग्रंथियां जाग्रत होती हैं जो कि इस उम्र में तेजी से विकसित होती हैं।
निशिता कहती है, ’’मैं तो यही कहूंगी कि संपूरक आहार के काॅन्सैप्ट को जानना मेरे लिए बहुत अच्छा अनुभव रहा। मेरा बच्चा अब संपूर्ण पोषण प्राप्त कर रहा है और वह विविध प्रकार की चीजों को खाने का मजा भी उठा रहा है। एक मां के तौर पर इससे ज्यादा मुझे और क्या चाहिए?’’
बच्चों के विकास को आकार में देने में मांएं सबसे अहम भूमिका निभाती हैं। माताओं के लिए यह समझना अनिवार्य है कि बच्चे के विकास का पैटर्न और उसकी पोषण संबंधी आवश्यकताएं क्या हैं। स्तनपान के साथ साथ संपूरक आहार एक कारगर तरीका है जिससे बढ़ते बच्चे की पोषण संबंधी आवश्यकताएं सुनिश्चित तौर पर पूरी की जा सकती हैं। एक माता को इस बात के प्रति जागरुक रहना चाहिए कि कौन से विकल्प उपलब्ध हैं ताकि वह सक्षम हो सके कि कौन सा संपूरक आहार उसके बच्चे के लिए सही है। इस कदम से निसंदेह आपका बच्चा संपूर्ण विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ेगा।
-0-0-0-


