छत्तीसगढ़ में प्रत्याशी चयन : भाजपा ने नए कार्यकर्ताओं को लगाया चूना, उठ रहे असंतोष के स्वर
छत्तीसगढ़ में प्रत्याशी चयन : भाजपा ने नए कार्यकर्ताओं को लगाया चूना, उठ रहे असंतोष के स्वर
छत्तीसगढ़ में प्रत्याशी चयन : भाजपा ने नए कार्यकर्ताओं को लगाया चूना, उठ रहे असंतोष के स्वर
रसूखदार कद्दावर नामों ने प्रत्याशी चयन को लेकर भाजपा के नए प्रयोग "गोपनीय मतदान" को लगाया पलीता!
संभावित तीन प्रत्याशियों के नाम की जगह सिर्फ एक नाम लिखे पर्ची को निरस्त करने की मांग उठी...
रायपुर। छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद भाजपा ने उम्मीदवारों के नामों को लेकर भाजपा ने गुप्त मतदान के जरिए प्रत्याशियों का नाम तय करने का फैसला किया था जिसके तहत छत्तीसगढ़ के विभिन्न विधानसभाओं में पार्टी ने संभावित प्रत्याशियों के तीन नामों को छाँटकर गुप्त मतदान करवाया था ताकि उनमें से एक बेहतर प्रत्याशी का चयन किया जा सके।
बेहतर प्रत्याशियों के नाम तय करने के लिए भाजपा के नए प्रयोग के तहत हुए इस मतदान में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों के अलावा राष्ट्रीय पदाधिकारी, प्रदेश पदाधिकारी, जिलाध्यक्ष, महामंत्री, मंडल अध्यक्ष व महामंत्री, मोर्चा के अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य, महापौर, निगम अध्यक्ष, नगरीय निकायों के अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष व महामंत्री शामिल रहे।
न्यूज़ कॉरिडोर को इस सम्बंध में मिली जानकारी के मुताबिक इस नई प्रकिया के तहत एक पदाधिकारी अपनी पसंद के तीन संभावित प्रत्याशियों के नाम लिखना था तथा इनको वरीयता क्रम में भी देते हुए एक, दो और तीन नंबर देना जरूरी था किन्तु शातिर चुनावी राजनीति के धाकड़ प्रत्याशियों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया जिसके तहत कद्दावर बड़े चेहरों के समर्थक जिन्होंने मतदान किया उन्होंने क्रमवार तीन संभावित प्रत्याशियों के नामों को न लिख सिर्फ पसंद के एक प्रत्याशी का ही नाम लिख मतदान कर दिया है।
बेहतर प्रत्याशी चयन को लेकर गोपनीय मतदान में इस शातिराना तरीकों का इस्तेमाल होने बाद अन्य प्रभावितों के द्वारा अब सिंगल नामों वाली पर्ची को निरस्त करने की मांगों को लेकर चौतरफा विरोध की आवाज़ें उठने के संकेत मिल रहे हैं वहीं भीतर ही भीतर पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं के मध्य भारी असंतोष पनप रहा है, उनका मानना है कि पार्टी ने मतदान के नए प्रयोग को कार्यकर्ताओं के बीच महज़ सिर्फ यह संदेश को देने के लिए ही अंजाम दिया कि प्रत्याशी चयन भी कार्यकताओं के मर्जी से होता है लेकिन हकीकत अब सबके सामने आ गया है, उनका कहना है कि जब सिंगल नामों को ही तय करना था तो इस तरह के नए प्रयोगों की नौंटकी क्यों की गई है।
पार्टी के जुड़े करीबी सूत्रों ने बताया कि प्रभावित असंतुष्टों की आवाज़ों को नज़रअंदाज़ किए जाने पर चुनावों के परिणाम पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।
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