जनता के जम्हूरी सवालों को सुनने का हौसला नहीं रखती अखिलेश सरकार- मोहम्मद सलीम
जनता के जम्हूरी सवालों को सुनने का हौसला नहीं रखती अखिलेश सरकार- मोहम्मद सलीम
खालिद के हत्यारों को सजा दे सरकार ताकि
कोई दूसरा न बन सके खालिद मुजाहिद- सलीम
धरने के 100 वें दिन विधान सभा मार्च में भारी संख्या में शामिल हों- सुभाषिनी अली
लखनऊ 27 अगस्त 2013। मुलायम सिंह जैसे लोगों के लिये यह बेहद शर्मिंदगी की बात है कि अल्पसंख्यकों के हितैषी होने का दम्भ भरने वाली सपा सरकार में ही खालिद मुजाहिद जैसे बेकसूर मुस्लिम नौजवान का बेहद सोची समझी रणनीति के तहत कत्ल किया गया। इस मंच के माध्यम से हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि खालिद मुजाहिद के साथ न्याय बिल्कुल ही नहीं हुआ है और हमारी माँग है कि इस सूबे की समाजवादी सरकार उनके कातिलों को तुरन्त गिरफ्तार करे ताकि इस प्रदेश में कोई और मुस्लिम बेगुनाह खालिद मुजाहिद न बनने पाये।
उपरोक्त बातें कलकत्ता से आये मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पूर्व सांसद मोहम्मद सलीम ने मौलाना खालिद की हत्या के बाद उनके कातिलों को पकड़ने तथा आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों की रिहाई की माँग को लेकर विधानसभा पर चल रहे रिहाई मंच के अनिश्चितकालीन धरने के 98 वें दिन उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुये कहीं।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से रिहाई मंच के लोग अपने सवालों पर लगातार धरना दे रहे हैं और सरकार की ओर से कोई भी नुमांइदा आज तक उनके सवालों पर कोई जानकारी लेने भी नहीं आया इससे साबित होता है कि अखिलेश यादव की सरकार जनता के जम्हूरी सवालों को सुनने का दम नहीं रखती। उन्होंने कहा कि इस देश के ज्यादातर राजनैतिक दल जनता के सवालों के खिलाफ न केवल एकजुट हैं बल्कि आम आदमी के खिलाफ साजिशें कर रहे हैं। लोकतंत्र के लिये यह बेहद खतरनाक है कि अब सरकारें जम्हूरियत में कोई विश्वास नहीं रख रही हैं। आज इस देश के मुसलमानों के खिलाफ पूरे मुल्क में एक अजीब सा खतरनाक माहौल बना हुआ है। ये माहौल अब तो केवल लिबास देखकर लोगों को कसूरवार ठहराने में लगा हुआ है। ऐसा माहौल लोकतंत्र को समृद्ध नहीं कर सकता। हमारी पार्टी आतंकवाद के नाम पर मुस्लिम नौजवानों का जो उत्पीड़न किया जा रहा है उसके खिलाफ है। हमने लगातार यह माँग उठायी है कि जो नौजवान अदालतों से बाइज्जत बरी हुये उनके समुचित पुनर्वास की एक नीति बने तथा फर्जी मामलों में फँसाने वाले पुलिस के लोगों को तत्काल जेल भेजा जाय। जब यह साफ हो चुका है कि साम्प्रदायिक फासीवादी संगठनों के लोग इन कार्यों में लिप्त हैं तो फिर देश की सभी आतंकवादी घटनाओं की न्यायिक जाँच बहुत जरूरी है ताकि असली अपराधी जेल भेजे जा सकें और निर्दोषों का उत्पीड़न बन्द हो। उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार यह मानती है कि खालिद बेकसूर था तो फिर उसके कातिलों को अब तक गिरफ्तार क्यों नही किया गया। जाहिर है कि अखिलेश यादव कातिलों को सजा देने से कतरा रहे हैं। इस मामले में उनकी जहनियत साफ नहीं है। खालिद की हत्या ने यह साफ कर दिया है कि अब उत्तर प्रदेश और गुजरात में कोई अन्तर नहीं रह गया है। लेकिन न्याय के लिये लड़ाई लम्बी लड़नी पड़ेगी। इसके अलावा और कोई चारा नहीं है। रिहाई मंच के इस धरने के साथियों के हौसले को हम सलाम करते हैं।
धरने को सम्बोधित करते हुये माकपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने कहा कि अखिलेश यादव से हम दिसम्बर में मिले थे। हमने उन्हें इस सवाल पर एक पत्र भी सौंपा था। हमने कहा था कि जिन लोगों को फर्जी तरीके से फँसाया गया है उन्हें तुरन्त छोड़ा जाय और अगर कानूनन यह सम्भव न हो तो उन्हें जमानत पर छोड़ते हुये तेजी से अदालती ट्रायल किया जाय। लेकिन अफसोस कि आज तक अखिलेश ने उस पत्र का कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे लड़के जो उच्च न्यायालय से बेगुनाह साबित हो चुके हैं उनके केसों को भी सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती है। इससे साफ जाहिर है कि मुसलमानों के खिलाफ आतंकवाद के नाम पर की जा रही ज्यादतियों को रोकने में अखिलेश सरकार की प्रतिबद्धता बेहद संदेहास्पद है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार मुसलमानों के प्रति अपने वादे को न निभाते हुये केवल उपलब्धियों की फर्जी बयानबाजी करके इस प्रदेश में सांप्रदायिक ताकतों को केवल मजबूत करने में लगी है। उन्होंने धरने के 100 वें दिन 29 अगस्त को जनता से विधान सभा मार्च में शामिल होने की अपील की।
इस अवसर पर रिहाई मंच के प्रवक्ताओं शाहनवाज आलम और राजीव यादव ने कहा कि खालिद की हत्यारी सपा सरकार के खिलाफ धरने के 100 वेें दिन 29 अगस्त, वृहस्पतिवार को विधानसभा मार्च का आयोजन किया गया है। प्रवक्ताओं ने आम जन से अपील की कि वे इंसाफ और लोकतंत्र को बचाने के लिये आयाजित मार्च में ज्यादा से ज्यादा संख्या मे शामिल हों तथा वादा खिलाफ सपा सरकार को नेस्तनाबूद करने के लिये एक संकल्प लें।
रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा कि रिहाई मंच आम लोगों के बीच लगातार सभाएं करके प्रदेश की हत्यारी और वादा खिलाफ सपा सरकार के खिलाफ एक व्यापक जनमत बनाते हुये लोगों से धरने के 100 वें दिन ज्यादा संख्या में आने की अपील कर रहा है। इसके लिये मंच के साथियों द्वारा आम जनता के बीच व्यापक जनसम्पर्क लगातार जारी है। जिसके तहत कल 26 अगस्त को मछली मोहाल में दो सभाएं की गयीं और आज उदय गंज में सभा होगी।
आजमगढ़ से आये रिहाई मंच के नेता मसीहुद्दीन संजरी ने कहा कि 84 कोसी परिक्रमा के विवाद के सूत्रधार ही मुलायम सिंह और अशोक सिंघल हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ आज फासीवादी संघ मोदी के रूप में अपने अस्तित्व की आखिरी लड़ाई लड़ रहा है वहीं दूसरी ओर प्रदेश की सपा सरकार अपने खिलाफ उपजे जनाक्रोश को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के आधार पर खत्म करना चाह रही है जो कि बिल्कुल भी सम्भव नहीं है। प्रदेश की अवाम ने इस प्रायोजित ड्रामे में बिल्कुल ही दिलचस्पी न लेकर यह साफ कर दिया है कि वह इस खेल की असलियत जानती है।
धरने का संचालन इलाहाबाद से आये अनिल आजमी ने किया। धरने को रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुएब, मुस्लिम मजलिस के प्रवक्ता जैद अहमद फारूकी, पूर्व सांसद इलियास आजमी, डा. कमरुद्दीन कमर, इनायत उल्ला खां, भारतीय एकता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद मोईद अहमद, भागीदारी आंदोलन के पी.सी. कुरील, आजमगढ़ रिहाई मंच के प्रभारी मसीहुददीन संजरी, मो. लईक बुखारी, डा. हारिस सिद्दीकी, गुफरान खान, आमिर महफूज, मो. मुख्तार इदरीसी, समीना फिरदौस, डा. आमिल अशरफी, मो. रऊफ, शकील अहमद, साहबे आलम सहित अनेक लोगों ने संबोधित किया।


