जनवरी में किसी रविवार को फिर कहेंगे मोदी'मन की बात' {पढ़ें मोदी की पूरी 'मन की बात'}
जनवरी में किसी रविवार को फिर कहेंगे मोदी'मन की बात' {पढ़ें मोदी की पूरी 'मन की बात'}
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आकाशवाणी पर 'मन की बात' का मूल पाठ
मेरे प्यारे देशवासियों,
आज फिर मुझे आपसे मिलने का सौभाग्य मिला है। आपको लगता होगा कि प्रधानमंत्री ऐसी बातें क्यों करता है। एक तो मैं इसीलिए करता हूँ कि मैं प्रधानमंत्री हूँ, प्रधानमंत्री सेवानिवृत्त होता हूँ। बच्चे से मैं एक बात सुनता आया हूँ और शायद वही 'मन की बात' की प्रेरणा है। हम बच्चों से सुनते आये हैं कि दो बातें कम होती हैं और सुख बातें बढ़ती हैं। 'मन की बात' में, मैं कभी दो बातें भी सुनता हूँ, कभी सुख भी बातें होती हैं। मैं जो बातें करता हूँ वो मेरे मन में कुछ पीड़ाएँ होती हैं, उसके को आपके बीच में प्रकट करके अपने मन को हल्का करता हूँ और कभी-कभी सुख की कुछ बातें हैं जो आपके बीच बांटकर मैं उस खुशी को चौगुना करने का प्रयास करता हूँ।
मैंने पिछले बार कहा था कि लम्बे अरसे से मुझे हमारी युवा पीढ़ी की चिंता हो रही है। चिंता इसलिए नहीं हो रही है कि आपने मुझे प्रधानमंत्री बनाया है, चिंता इसीलिए हो रही है कि किसी माँ का लाल, किसी परिवार का बेटा, या बेटी ऐसी दालदली में फंस जाते हैं तो उस व्यक्ति का नहीं, वो पूरा परिवार तबाह हो जाता है। समाज, देश सब कुछ खराब हो जाता है। ड्रग्स, नशा ऐसी भयंकर बीमारियाँ हैं, ऐसी भयंकर बुराइयाँ हैं जो अच्छे-अच्छों को हिला देती हैं।
मैं जब गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में काम करता था, तो कई बार मुझे हमारे अच्छे...


