जन. वीके सिंह के खिलाफ सशस्त्र बल न्यायाधिकरण की कड़ी टिप्पणी
जन. वीके सिंह के खिलाफ सशस्त्र बल न्यायाधिकरण की कड़ी टिप्पणी
नई दिल्ली। सशस्त्र बल न्यायाधिकरण { आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्युनल (एएफटी) } एक फैसले से मोदी सरकार को शर्मिंदगी उठानी पड़ी है। सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने पश्चिम बंगाल के सुकना जमीन घोटाला मामले में पूर्व सेनाध्यक्ष एवं वर्तमान में केंद्र सरकार में मंत्री जनरल वी के सिंह को दोषी करार दिया है वहीं लेफिटनेंट जनरल पी के रथ को सुनाई गई सजा को खारिज कर दिया है। न्यायाधिकरण ने जांच में पाया कि लेफिटनेंट जनरल रथ पूर्व सेनाध्यक्ष की साजिश का शिकार हुये और जनरल सिंह ने उनके कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया को भी प्रभावित किया था।
न्यायाधिकरण ने यह भी पाया कि जनरल सिंह अपनी जन्मतिथि को लेकर हुये विवाद में कुछ अधिकारियों की भूमिका से नाखुश थे और उनसे बदला लेने का मौका तलाश रहे थे। इसी कडी में उन्होंने ले. जनरल रथ के खिलाफ कार्रवाई की। न्यायाधिकरण ने कहा कि उन्होंने बदले की भावना से वरिष्ठ अफसरों को प्रताड़ित कर भारतीय सेना की प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाई है। न्यायाधिकरण ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, 'याचिकाकर्ता को अनुचित प्रताड़ना का सामना करना पड़ा है। इस वजह से सम्मान को काफी चोट पहुंची है। इंसाफ का जिस तरह से मजाक उड़ाया गया उसकी भारपाई नहीं की जा सकती।'
न्यायमूर्ति सुनील हाली की अध्यक्षता वाली न्यायाधिकरण की एक पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता को सभी आरोपों से बरी किया जाता है। वह 12 फीसदी ब्याज के साथ सभी लाभ की बहाली के हकदार हैं। न्यायाधिकरण ने रथ की याचिका को मंजूरी दी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि जनरल वीके सिंह ने मामले को अनुचित महत्व दिया था, क्योंकि उन्हें तत्कालीन सैन्य सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अवधेश प्रकाश के खिलाफ 'गंभीर खुन्नस' थी।
यह मामला पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में सुकना सैन्य स्टेशन के पास की 70 एकड़ जमीन शैक्षणिक संस्थान बनाने के लिए सिलिगुड़ी के निजी बिल्डर को देने से जुड़ा है ।
कोर्ट मार्शल के दौरान ले. जनरल रथ को घोटाले में दोषी करार देते हुए उनकी दो वर्ष की वरीयता कम कर दी गयी थी। भारतीय सेना के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था जब किसी सेवारत ले. जनरल को घोटाले में लिप्त होने का दोषी पाया गया था।
लेफ्टिनेंट जनरल पी. के. रथ वह 33वीं कोर में तैनात थे। एएफटी ने सम्मान को चोट पहुंचाने के एवज में इन्हें भारतीय सेना को 1 लाख रुपए देने का निर्देश दिया है। 2011 में कोर्ट मार्शल के तहत जनरल रथ और मिलिटरी सेक्रेटरी लेफ्टिनेंट जनरल अवधेश प्रकाश को पश्चिम बंगाल के सुकना में मिलिटरी कॉन्टेन्मेंट के पास 70 एकड़ प्लॉट में शैक्षणिक संस्थान बनाने के लिए निजी बिल्डर को दिए गए नो ऑबजेक्शन सर्टिफिकेट में दोषी पाया गया था। अब ट्रिब्युनल ने सेना के इस दावे को खारिज कर दिया है कि एजुकेशनल कॉम्पलेक्स का निर्माण खतरा बन सकता था। ट्रिब्युनल ने कहा है कि सुकना स्टेशन के करीब हर तरह की सिविलियन ऐक्टिविटी सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है और इसे किसी भी सूरत में कबूल नहीं किया जा सकता है।
सुकना प्लॉट केस की जांच जनरल वी. के. सिंह ने शुरू की थी। तब वह इस्टर्न आर्मी कमांडर थे। अपनी याचिका में AFT से जनरल रथ ने कहा था कि जनरल वी. के. सिंह ने इस मामले को अनावश्यक रूप से तूल दिया क्योंकि जनरल अवधेश प्रकाश के खिलाफ उनकी गंभीर शत्रुता थी। वी. के. सिंह जन्म तिथि और अपनी सेवा विस्तार के मामले में जनरल अवधेश प्रकाश को बाधा मानते थे।
ट्रिब्युनल ने भी सिंह की जन्म तिथि के मामले में उल्लेख किया है कि जनरल वी. के. सिंह की वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कि नियुक्ति में अनदेखी हुई थी। इसका नतीजा यह हुआ कि उनके मन में प्रतिशोध की भावना आ गई। इसके लिए उन्होंने मिलिटरी सेक्रेटरी के जिम्मेदार ठहराया और बदले की भावना से काम किया। सिंह ने मौका मिलते ही अपने विरोधियों को निशाना बनाया।
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