जब भाई ओम थानवी के सवाल पर अरविन्द पनगड़िया लगे चीखने चिल्लाने और बोले कि आप रास्ता बता दीजिये हम आपका पैर चूम लेंगे।
इन पनगढ़िहा को आप जानते हैं ?
ये अमरीका पलट अर्थशास्त्री हैं और योजना आयोग की जगह बनी नीति आयोग के उपाध्यक्ष हैं। ये हाल तक राजस्थान सरकार के आर्थिक सलाहकार रहे।
इनकी टकराहट जनसत्ता के संपादक ओम थानवी से उस समय हुयी जब जयपुर में आयोजित साहित्य मेले में हजारो साहित्यकार श्रोता और प्रेक्षक एकजुट हुए थे। अपनी हेठी दिखाने के लिए पनगढ़िहा ने राजस्थान के बारे में कहा कि अब राजस्थान, यू पी-बिहार-मध्य प्रदेश की तरह बीमार सूबा नहीं है। इस पर ओम भाई ने उन्हें देश की एक प्रतिष्ठित पत्रिका इकनामिक एन्ड पॉलिटिकल वीकली का हवाला दिया तो अरविंद पनगड़िया लगे चीखने चिल्लाने। इसमें दूसरे सवाल ने उन्हें आग बबूला कर दिया जब ओम जी ने राजस्थान सरकार के उस कानून का जिक्र किया जिसमे गांव पंचायत चुनाव में एक निश्चित पढ़ाई किये हुए लोग ही लड़ सकते हैं।
अरविंद पनगड़िया उस क़ानून का समर्थन करते हुए हत्थे से उखड़ गए और बोले आप रास्ता बता दीजिये हम आपका पैर चूम लेंगे।
इस पर क्या जवाब दिया होगा ओम जी ने सब को मालूम है- उसी सवाल को हल करने के लिये आपको वहाँ बैठाया गया है जैसे सवाल उठाने के लिए हमें यहां।
इस तमाशे को जयपुर ने देखा। देश ने देखा। यह है नयी नीति आयोग की दिशा।
चंचल
चंचल। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, चित्रकार व समाजवादी आंदोलन के कर्णधार हैं। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे चंचल जी रेल मंत्रालय के सलाहकार भी रहे हैं।