जुगनू शारदेय

आज मंगलवार का दिन भी तो संकटमोचक हनुमान जी का ही दिन है । बचपन में
परीक्षा में नकल की सफलता के लिए हमने याद कर रखा था हनुमान चालीसा ।
हनुमान चालीसा अपने देश की बौद्धिक संपदा है । जरूरी हो गया है कि इसका
पेटेंट करा लिया जाए । सिर्फ चालीसा को ही नहीं हनुमान जी को भी भी
पेटेंट करा लेना चाहिए । इन हनुमाननुमा अमेरीका भक्तों का कोई भरोसा नहीं
है । कल को पेटेंट करा लें हमारे हनुमान जी और हनुमान चालीसा को तो बड़ी
मुश्किल हो जाएगी । अगर कहीं अमेरिकियों ने जान लिया कि हनुमान जी हमारे
यहां एलएओ – लैंड एक्वीजीशन आफिसर भी हैं तो हनुमान जी के बहाने पूरे देश
पर कब्जा कर सकते हैं । हालांकि इसके लिए उन्होने अपने हनुमानों को न
जाने कब से भारत भेज रखा है ।

राम जी ने हनुमान जी को अपना आईटीसी –इनकम टैक्स कमीश्नर भी बना दिया था
। इससे प्रेरणा ले कर अमरीकी हमारी आमदनी की जांच पड़ताल भी कर सकते हैं
। जांच पड़ताल के लिए अमेरिका के पास एक वर्ल्ड बैंक भी होता है । हमारा
एक और गुण है कि हम आमदनी बढ़ा कर महंगाई से घटा भी लेते हैं । वनवास के
बाद राम जी ने जब अयोध्या वापसी की तैयारी की तो उन्हें पता चला कि
चरणपादुका पूजक भरत ने इतनी ज्यादा चरण पूजा की देश की इकॉनॉमी बहुत खराब
हो रही है । क्या कारण है कि हमारे देश में जब चरण पुजक का राजपाट होता
है तो इकॉनॉमी खराब हो जाती है । केवल हनुमान जी ही सही जांच पड़ताल कर
सकते हैं । अब यह साबित हो चुका है कि आप धनमन जी की ईमानदारी पर शक कर
सकते हैं हनुमान जी की ईमानदारी पर नहीं ।

आज कल हनुमान जी इनकम टैक्स अधिकारी या सीबीआई अधिकारी की शक्ल में भी
मिल जाते हैं । उन्होने हनुमान जी को अयोध्या भेजा कि जा कर माली हालत
की जांच कर लो । पता नहीं कि अयोध्या पहुंचते ही धरना- प्रदर्शन –बंद का
सिलसिला ना आरंभ हो जाए ।

इधर अयोध्या के कॉरपोरेटियों – उद्योगपतियों – अधिकारियो – राजनेताओं को
पता लगा कि एक बड़ा भारी ईमानदार हनुमान जांच पड़ताल के लिए आ रहा है ।
ईमानदार ही नहीं सादगी पसंद भी है । हालंकि भरत ने भी उनसे सादगी अपनाने
की अपील की थी । पर भरत की अपील को वह भारत के हनुमानी प्रधानमंत्री की
अपील से ज्यादा कुछ नहीं समझते थे ।

कॉरपोरेटियो- उद्योगपतियों – अधिकारियों ने हनुमान से निपटने की पूरी
तैयारी कर ली । मां तुझे सलाम की तर्ज पर उन्होने हनुमान चालीसा का
रिमिक्स बजाना शुरु कर दिया था । जब हनुमान जी ने छापा मारा तो दफ्तर की
दीवारों पर लाल रंग से जय श्री रामा लिखा पाया । कंप्यूटर भी लाल रंग के
कपड़े से ढंका हुआ है । फिर भी चारो तरफ लाल – लाल रंग देख कर हनुमान जी
को लगा कि कहीं यह चमचागिरी तो नहीं है । इस पर उनका कॉपीराइट था ।

उन्होने पूछा कि लाल रंग ही क्यों ? जवाब मिला कि राम भक्त हनुमान का यह
प्रिय रंग है – और हम राम भक्त हनुमान के भक्त हैं । हनुमान जी को लगा कि
उनका भक्त बेईमान कैसे हो सकता है । उन्होने राम जी को मोबाइल पर खबर दे
दी कि सब ठीक ठाक है । महंगाई का थोड़ा सा मुकाबला करना है । बस आप आते
ही मोबाइल फोन का ही भाव नहीं , उसका लाइसंस भी सस्ता कर देना ताकि लोग
जान सकें कि सस्ती चीजें कहां मिलती हैं । इस प्रकार हनुमान जी की जांच
पड़ताल पूरी हुई ।