जहरीली हवा ले रहे हैं रायपुरवासी, मस्त सो रही हैं राज्य-केंद्र सरकारें
जहरीली हवा ले रहे हैं रायपुरवासी, मस्त सो रही हैं राज्य-केंद्र सरकारें
जहरीली हवा ले रहे हैं रायपुरवासी, मस्त सो रही हैं राज्य-केंद्र सरकारें
रायपुर में कम लागत वाले वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क की शुरुआत
Air quality monitoring using Atmos in Raipur
Air Quality and its trends by - Atmos - Realtime Air Quality PM2.5 Monitoring
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने रायपुर में की कम लागत वाले वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क की शुरुआत
रायपुर, 27 नवम्बर 2018: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कम लागत वाले पहले रियल टाइम वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क की शुरुआत की गयी।
दिल्ली स्थित लंग केयर फाउंडेशन के संस्थापक एवं ट्रस्टी डॉक्टर अरविन्द कुमार ने कहा कि रायपुर के नए ‘एटमास’ मानीटर्स की मदद से यह पता चला है कि यहां के निवासी हर महीने के ज्यादातर दिनों में हानिकारक हवा में सांस ले रहे हैं। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक इस साल अक्टूबर और नवम्बर में उरला, भारत माता स्कूल, आरएलटीआरआई, एक्सआईएसए और स्टेट हेल्थ रिसोर्स सेंटर क्षेत्रों में खतरनाक पीएम2.5 कणों की मौजूदगी का स्तर आधे से ज्यादा समय तक खराब से अस्वास्थ्यकर की श्रेणी में रहा।
राज्य स्वास्थ्य संसाधन केन्द्र (एसएचआरसी) और अरबन साइंसेज की इस संयुक्त परियोजना के तहत वायु गुणवत्ता निगरानी सम्बन्धी आंकड़ों को वेबसाइट atmos.urbansciences.in/dashboard पर प्रदर्शित किया जाएगा। यह वेबसाइट इन पांचों क्षेत्रों में हवा में पीएम2.5 की मौजूदगी के स्तर के आंकड़ों को लगातार दिखाएगी।
पिछले कुछ महीनों के दौरान रायपुर में वायु गुणवत्ता सम्बन्धी आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली अरबन साइंस की रोनक सुतारिया के अनुसार ‘‘सुबह 7 बजे और शाम को 7 से 9 बजे के बीच वायु की गुणवत्ता सबसे ज्यादा खराब होती है।’’
वर्ष 2015 में पीएम2.5 के प्रदूषण से उत्पन्न बीमारियों के कारण भारत में 11 लाख लोगों की मौत हुई थी। पीएम2.5 इंसान के एक बाल से भी 20 गुना छोटे धूल के कण होते हैं। ये मानव की रक्तवाहिकाओं में दाखिल होकर सांस और दिल की बीमारियों को बढ़ा देते हैं, इसके अलावा वे फेफड़ों के कैंसर की बीमारी का कारण बनने के साथ-साथ फेफड़े की काम करने की क्षमता को भी कम कर देते हैं। साथ ही वे दमे और दिल का दौरा पड़ने का कारण भी बनते हैं। बुजुर्ग लोग, दिल और फेफड़ों की बीमारी से ग्रस्त लोग, बच्चे और गर्भवती महिलाओं के लिये भी पीएम2.5 खासतौर पर खतरनाक होता है।
डाक्टर अरविंद कुमार ने कहा कि ‘‘भारत में कोई ऐसा नहीं है जो धूम्रपान न करता हो। देश में हर मिनट 51 बच्चों का जन्म होता है और उनमें से हर बच्चा उसी वक्त से धूम्रपान को मजबूर होता है, जब वह अपनी पहली सांस लेता है।’’
उन्होंने कहा कि ‘‘विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक वायु प्रदूषण इस दुनिया पर सबसे बड़ा पर्यावरणीय खतरा है।’’
एसएचआरसी के डाक्टर प्रबीर चटर्जी ने कहा कि वायु प्रदूषण के संकट को सबसे बुरी स्थिति में पहुंचने से रोकने के मकसद से नगरीय नीति तथा आयोजना को प्रभावित करने की प्रक्रिया में स्वास्थ्य सम्बन्धी पेशेवर लोगों को जोड़ा जाना चाहिये। साथ ही अस्पतालों, कालेजों और मीडिया हाउसेज को अपने-अपने यहां ये वायु गुणवत्ता निगरानी उपकरणों की स्थापना करनी चाहिये और उनसे एकत्र आंकड़ों को एटमास वेबसाइट पर प्रदर्शित करना चाहिये ताकि शहर की वायु गुणवत्ता सम्बन्धी और अधिक आंकड़े प्राप्त किये जा सकें। इस निगरानी यंत्र की कीमत मात्र 17 हजार रुपये है और इसकी संचालनात्मक लागत भी कुछ खास नहीं है। यह भी दिलचस्प है कि इस वक्त पूरे छत्तीसगढ़ में राज्य या केन्द्र सरकार की तरफ से वायु गुणवत्ता पर निगरानी के लिये कोई काम नहीं हो रहा है।
इनमें से चार निगरानी उपकरणों की स्थापना शक्ति सस्टेनेबल एनर्जी फाउंडेशन (एसएसईएफ) ने जबकि एक उपकरण की स्थापना एसएलयू स्वीडन के सोशल साइस रिसर्चर पैट्रिक आस्करसन ने की है।
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