जाकिर नाइक का प्रशंसक होना कोई गर्व की बात नहीं, लेकिन...

अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए सरकार के पास मुस्लिम विरोध के अलावा दूसरे कोई उपाय ही नहीं

आलोक वाजपेई

कई मित्रों ने कहा कि जाकिर नाइक पर आपकी क्या सोच है। कुछ ने उत्सुकतावश और कुछ ने मुझे मुसलमान मान चुटकी लेने के लिए पूछा।


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सबसे पहले तो ये कहना जरूरी है कि केंद्र सरकार जाकिर नाइक के पीछे जो पड़ गयी है उसमें उसका मुस्लिम विरोध का सुनियोजित फार्मूला काम कर रहा है। अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए उसके पास मुस्लिम विरोध के अलावा दूसरे कोई उपाय ही नहीं है।

आखिर ज़ाकिर नायक की ही जांच क्यों? संघ के नेताओं की क्यों नहीं ?

जब से जाकिर नाइक टीवी पर अपने भाषणों के साथ आना शुरू हुए तो मैंने कुछ सालों तक उन्हें फॉलो किया कि बंदा क्या बताना चाहता है। मुझे ये शख्स मुसलमानो को इस्लाम की एक विशिष्ट कट्टरवादी और सर्वश्रेष्ठता वादी सोच को बढ़ाने वाला ही लगा। भोली भाली जनता को धर्म के नाम पर जिस तरह से अन्य धर्मों के मठाधीश बरगलाते रहते हैं, उन्हीं प्रकार का ये भी मामला है।

जाकिर नाइक विद्वान नहीं रट्टू हैं

जिस प्रकार से जाकिर नाइक अपने भाषणों में धर्म ग्रंथों के पन्ने आदि उद्धृत करते हैं, वह उनकी विद्वता का नहीं बल्कि रट्टेपन का प्रतीक है। यही काम दूसरे धर्म के चारण भी करते हैं कि फ़टाफ़ट संस्कृत के श्लोक बरसाती मेढकों की भांति टर्र टर्र बोलते जाएंगे और भोली जनता को चमत्कृत कर मूर्ख बनाते जाएंगे। इसमें से ज्यादातर बातें झूठ, सन्दर्भ विहीन और कट्टरवाद की पोशक होती हैं।

सिर्फ जाकिर नाईक पर प्रतिबंध क्यों ?

बीच बीच में वे सर्व धर्मसम्भाव वगैरह भी मिलाएंगे ताकि शर्म बची रहे पर उनकी बातों का समग्र प्रभाव समाज में कट्टरता, कूपमंडूकता और अलगाव फैलाने वाला ही होता है।

यह हर जागरूक व्यक्ति का दायित्व है कि वो अपने धर्म के भीतर जमी काई को दूर करे और आधुनिक चेतना संपन्न बने। धर्म का ढिंढोरा न बजाये। केवल एक नागरिक के रूप में स्वयं को विकसित करे। अपनी धार्मिक पहचान को सूक्ष्म से सूक्षतम करता जाए। समाज में खुद को एक इंसान के रूप में पेश करे और वहीँ से एक अच्छे इंसान के रूप में मान्यता पाने की कोशिश करें। अपनी वेश भूषा बातचीत अंदाज को धर्म की चाशनी में कम से कम रखें। समाज में मिलनसारिता बढ़ाएं और अपने धर्म के झंडे को दफ़न कर उसकी रक्षा का ठेका न लें।

जाकिर नाइक जैसे लोग इस प्रक्रिया में बाधक हैं।

उनके प्रशंसक होना कोई गर्व की बात नहीं है बल्कि आपकी नासमझी का सबूत ही है।

प्रज्ञा और बृजेश सिंह से मिलने वाले राजनाथ का ज़ाकिर नायक पर सवाल हास्यास्पद

मैंने शुरू में ही कह दिया कि जाकिर नाइक को टारगेट क्यों किया जा रहा है। सुनियोजित मुस्लिम विरोध हर मर्ज की दवा है उनके पास।

यह सवाल उठाया जा सकता है कि इसका विरोध किया जाना चाहिए या नहीं। अभी तक ऐसा कोई तथ्य नहीं है जो उन्हें आपराधिक बनाये। पर उनके समर्थन में आंदोलन भी नहीं किया जा सकता। असली लड़ाई हिन्दू साम्प्रदायिकता से है जिसमें इससे कमजोरी आएगी।


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Published on 2016-07-10 22:43:24