“ मन की बात ”
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जानना ही पर्याप्त नहीं है, उसे लागू करना (जीवन में उतारना) भी ज़रूरी है.

चाहना ही पर्याप्त नहीं, मनुष्य को (उसके लिए कुछ) करना भी चाहिए..
Johann Wolfgang von Goethe
अनुवाद - प्रतिभा उपाध्याय