सच छिपाने के लिये की गयी पत्रकार पर पुलिसिया कार्रवाई
एनएचआरसी व हाईकोर्ट की नोटिस मिलने पर पुलिस बचाव में कर रही लुटेरों की मदद
नोटिस जवाब में पुलिस ने सिरे से किया है उत्पीड़नात्मक कार्रवाई से इनकार
कहा- नहीं होता बालू खनन, न ही भदोही में हुआ दंगा
पुलिस के खिलाफ जुबान बंद करने के लिये पुलिस पर पत्रकार की पत्नी को धमकी देने का आरोप
भदोही। बताया जाता है कि बाहुबली सपा विधायक विजय मिश्रा पर लूट, हत्या, डकैती, अपहरण, फिरौती, गुंडा टैक्स सहित 64 मामले दर्ज हैं। लेकिन उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई इसलिये नहीं हो रही है क्योंकि सत्ता प्रमुखों का उस पर वरद्हस्त बताया जाता है। सत्ता का गुरूर इस कदर सिर चढ़कर बोल रहा है कि उसकी दबंगई के आगे कानून बौना पड़ने लगा है। उसकी काली कारतूतें जब मीडिया में सुर्खियाँ बनीं तो वह पत्रकार पर कहर बनकर टूट पड़ा। आरोप है कि सच्चाई लिखने पर बाहुबली विधायक के इशारे पर संतरविदासनगर भदोही की पुलिस वरिष्ठ पत्रकार सुरेश गांधी को न सिर्फ गुंडा एक्ट लगाकर जिला बदर कर दिया, बल्कि उनकी नामौजूदगी में 16 साल से तिनका-तिनका जुटाई गयी गृहस्थी व विवाह में मिले सामान व जेवर आदि को भी लुटवा दिया। कानूनी डंडे के सहारे सच छिपाने की हर हथकंडे आजमा चुकी पुलिस अब न्यायालय को भी गुमराह करने में जुट गई बताई जाती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट के नोटिस जवाब में पुलिस ने बगैर सबूत दो टूक कहा है कि भदोही में दंगा या हिंसा की घटना हुई ही नहीं है और न ही अवैध बालू खनन। इतना ही नहीं गुंडा एक्ट, जिलाबदर व सरेराह मार-पीटकर घर-बार लूटे जाने सहित सभी आरोपों को नकार कर -कहा पुलिस एवं प्रशासनिक कार्रवाई कानून के दायरे में की गयी है। इतना ही नहीं अपने काले कारनामों से चौरतरफा घिरी व जनता सहित मीडिया में हो रही किरकिरी को देखते हुए पुलिस ने गांधी को पत्रकार न होने की बात कह कर घर-बार लूटने वाले माफियाओं की अब खुद पैरवी करने में अपने को सेफ समझ रही है। हर घटनाओं की तरह अपनी दादागिरी के बूते पत्रकार की उत्पीड़नात्मक घटना को भी ठंडे बस्ते में दफन कर देना चाहती है, लेकिन शायद वह भूल गयी है कि एक दशक पूर्व बाहुबली सांसद धनंजय सिंह के नाम पर सरेराह इनकांउटर में चार निर्दोष युवकों की हत्या के मामले में 36 पुलिसकर्मियों को जेल के सलाखों में ढकेलने सहित दलित महिला संतोषी बलात्कार कांड के आरोपी को अपनी कलम की ताकत पर न सिर्फ जेल भेजवा चुके श्री गांधी किसी भी हाल में पीछे नहीं हटने वाले। न्यायालय में विश्वास व इंसाफ की लड़ाई लड़ने वाले गांधी का दावा है कि वह पूरे दमखम के साथ पुलिस व प्रशासनिक ज्यादितियों का मुकाबला करेंगे।

मूलतः जनपद जौनपुर के गोपालापुर निवासी श्री गांधी पिछले 16 सालों में भदोही में पत्रकारिता करते हैं। वह दैनिक समाचार पत्र हिन्दुस्तान में वर्ष 1996 से 2012 तक, वर्ष 2012 से अब तक जनसंदेश टाइम्स व 2008 से अब तक आज तक टीवी न्यूज में भदोही के ब्यूरोचीफ हैं। श्री गांधी की हजारों बाईलाइन छपी खबरों के अलावा सैकड़ों ससमसामयिक आर्टिकल व वीडियो फुटेज व अन्य घटनाओं समेत दूरसंचार कार्यालय, इनकम टैक्स, बैंक, एलआईसी के अभिलेखों आदि में अंकित व पूर्व के आरोपों में विभिन्न न्यायालयों व जनसूचना विभाग से जारी कार्डों आदि प्रमुख साक्ष्य चीख-चीखकर गवाही दे रहे हैं कि वह वरिष्ठ पत्रकार हैं। लेकिन हाल की भदोही पुलिस है उन्हें पत्रकार नहीं होने का बयान सहित हाईकोर्ट के स्थगन आदेश व जिला न्यायालय से मिली जमानत के आदेशों को भी अपने जवाबी हलफनामें में खारिज कर दी है। इतना ही नहीं जिन तीन मुकदमों को आधार बनाकर गुंडाएक्ट व जिलाबदर किया गया है उसमें खुद पुलिस ने आरटीआई रिपोर्ट में मुकदमों को खत्म होने की बात कही है। लेकिन उसे भी अपनी करतूतों को छिपाने के लिये दरकिनार कर दिया है। गत 25 नवम्बर 2012 को भड़की हिंसा के दौरान दोनों पक्षों की रपट व गिरफतारी जैसे साक्ष्य भी पुलिस व प्रशासनिक अफसरों की ओर से जारी बयान में कह दिया है कि तोड़फोड़ आदि की घटना हुई ही नहीं है, जो हुआ था उसे आपस में सलटा लिया गया है। एक दो नहीं दर्जनों लापरवाहियों को उजागर करती घटनाएं पुलिस किस कब्रगाह में दफन करेंगी। यह सवाल आज भी यक्ष प्रश्न बना हुआ है।

दरअसल, वर्ष 2012 में तत्कालीन जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी व पुलिस अधीक्षक अशोक शुक्ला के कार्यकाल में एक के बाद एक आपराधिक व हिंसक घटनाएं होती रहीं और बाहुबली विधायक के बालू खनन से लेकर सड़कों के निर्माण में धांधली, जबरन प्रमुख कुर्सी पर कब्जा, पूर्वांचल के ईनामी माफियाओं से साठ-गांठ आदि काले कारनामे समाचार पत्र प्रकाशित व चैनल में समय-समय पर चलने से पत्रकार सुरेश गांधी से पुलिस व प्रशासन कुपित था। खासकर 25 नवम्बर-12 मुहर्रम के तीन दिन पहले दरोपुर व घमहापुर में ताजिया रास्ते के विवाद को लेकर छपी खबर के बाद भी एलर्ट होने के बजाए प्रशासनिक लापरवाही से भड़की हिंसा व तोड़फोड़ की घटना अखबारों की सुर्खियाँ बनने से हुई छिछालेदर से डीएम एसपी काफी खफा हो गए थे। महाशिवरात्रि के दिन अलसुबह हुए विस्फोट और कोतवाल संजयनाथ तिवारी की लापरवाही की खबर छपने के बाद पुलिस ने सारी सीमाएं लांघकर श्री गांधी के खिलाफ बिना किसी अपराध के गुंडाएक्ट व जिलाबदर की कार्यवाही की। इस बाबत श्री गांधी ने 23 मार्च 2013 को दोपहर मे एसडीएम न्यायालय में अपना जवाब दाखिल किया कि पुलिस द्वारा दर्ज की गई की कार्यवाही के तीनों मुकदमों में पुलिस ने खुद फाइनल रिपोर्ट लगाई है या वह न्यायालय से दोषमुक्त है, तो कोतवाल संजयनाथ तिवारी ने मकान मालिक विनोद गुप्ता व सुमित गुप्ता निवासी काजीपुर रोड भदोही को साजिश में लेकर रंगदारी मांगने की झूठी रपट दर्ज कर दी। रपट में कहा गया है कि दो साल से गांधी किराए पर रहते हैं और किराया नहीं देते। 23 मार्च को काजीपुर रोड स्थित मकान मालिक के घर में घुसकर मारपीट कर 5 लाख की रंगदारी मांगी। रंगदारी न देने पर जानसे मारने की धमकी दी। इस झूठी रपट में पुलिस ने बिना छानबीन किए दो और पत्रकारों का नाम दर्जकर मकान मालिक के चहेतों की गवाही लेकर चार्जशीट लगा दी। सवाल यह कि श्री गांधी उस मकान में पिछले 15-16 सालों से रह रहे हैं। तभी से नाम व पते जगह-जगह सरकारी अभिलेखों समेत प्राइवेट संस्थानों में दर्ज हैं। अगर गांधी ने 23 मार्च को मकान मालिक के घर गए तो कॉल डिटेल के साथ ही मोबाइल लोकेशन आदि की छानबीन क्यों नहीं की गयी। जो व्यक्ति पिछले 16 सालों से पत्रकारिता कर रहा हो और तमाम प्रशासनिक अफसर आए और चले गए तब किसी को गांधी गुंडा नजर नहीं आये। किसी से रंगदारी नहीं माँगी और न ही किसी भी जनता ने कोई मुकदमा ही लिखाया। तो फिर अचानक तत्कालीन अफसरों की निगाह में कैसे गुंडा बन गया और सप्ताह भर में गुंडा एक्ट की कार्यवाही कर जिलाबदर कर दी। खास बात तो यह है कि किराए को लेकर मकान मालिक से विवाद था तो पहले क्यों नहीं रपट लिखी गयी रपट उस उक्त लिखी गयी जब पुलिस के झूठे गुंडा एक्ट की कार्रवाई पर श्री गांधी ने एसडीएम न्यायालय में चैलेंज किया।

आरोप है कि जब पत्रकार गांधी जब गुण्डाएक्ट व जिलाबदर के चलते जनपद से बाहर थे तो 7 मई 2013 को मकान मालिक विनोद गुप्ता व सुमित गुप्ता पुत्र स्व बाकेलाल निवासी काजीपुर रोड आदि ने कमरे का ताला तोड़कर विज्ञापन के 1.5 लाख नगद, जेवर, जरूरी कागजजात व तमाम साक्ष्य उठा ले गये। इस दौरान जब सायंकाल पत्रकार की पत्नी कमरे पर पहुंची तो पुलिस संरक्षण प्राप्त हौसलाबुलंद मकान मालिक ने धमकी भी दी कि अभी तो नगदी, जेवर समेत रुपया व कागजात ले जा रहे हैं यदि तुम लोगों ने मेरा कमरा नहीं छोड़ा तो ताला तोड़कर फिर से सारा सामान उठा ले जायेंगे और बेघर कर देंगे, मेरा कुछ नहीं होगा क्योंकि मेरा कोतवाल संजयनाथ तिवारी से सेटिंग है और कोतवाल से मिलकर तुम्हारे पति का भी हाथ-पैर तोड़वा देंगे। इसकी सूचना पत्रकार की पत्नी रश्मि गाँधी ने कोतवाली से लेकर एसपी तक को दी, लेकिन रपट दर्ज करना तो कोतवाल संजयनाथ तिवारी ने उनकी पत्नी को धमकी दी कि तुम्हारा पति ब़ड़का पत्रकार है उसका हाथ-पैर तो तोड़ेंगे ही तुम भी कहीं कि नहीं रह जाओगी और कोतवाली से डाटकर भगा दिया। 30 मई 2013 को लूट की प्रार्थना पत्र तैयार कर पहली जून 2013 को सुबह सीजीएम न्यायालय मे 156 (3) जाब्ता फौजदारी के अन्तर्गत याचिका दायर की और सुबह 10 बजे कमरे पर आकर अपनी मौसी के बेटे के शादी मे शामिल होने के लिये राँची चले गये। उसी दिन पुलिस की मौजूदगी मे शाम 4 बजे मकान मालिक विनोद गुप्ता व सुमित गुप्ता आदि कमरे का ताला तोड़कर 15 साल से तिनका-तिनका जुटाई गई 20 लाख से भी अधिक की सम्पत्ति व विवाह में मिले सामानों व जेवरात आदि लूट ले गए। फर्जी मुकदमों में हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बाद भी पत्नी को दी गयी धमकी को सच करने की नियत से 13 जून की शाम साढ़े 5 बजे स्टेशन रोड पीएनबी बैंक के पास से श्री गांधी को पकड़कर कोतवाल व उसके हमराहों ने सरेराह मारपीटकर बेइज्जत किया। जनता के भारी विरोध व डीजीपी के हस्तक्षेप पर 4 घंटे बाद तो छोड़ दिया लेकिन 14 जून को एक और फर्जी मुकदमा दर्ज करने के साथ ही पुलिस ने मकान मालिक द्वारा गलत तरीके से दर्ज मुकदमे में चार्जशीट लगा दी। इस उत्पीड़न की शिकायत श्री गांधी ने कोतवाली पुलिस से लेकर मुख्यमंत्री, डीजीपी, आईजी, डीआईजी व एसपी को दी, लेकिन रपट दर्ज नहीं की गयी। अब जब सुरेश गांधी व उनकी पत्नी की अलग-अलग प्रार्थना पत्र में जिला न्यायालय के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 156(3) के तहत रपट दर्ज करने का आदेश दिया तो। मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस ने मुकदमा तो दर्ज कर लिया, लेकिन माफियाओं के दवाब में कार्यवाही नहीं कर रही। आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। लूटे गए सामानों की पुलिस बरामदगी नहीं कर रही है और जब दायर याचिका के मामले में हाईकोर्ट ने प्रमुख गृह सचिव समेत डीएम, एसपी व कोतवाल से जवाब मांगा है तो न सिर्फ गांधी को पत्रकार न होने व लूटपाट न होने सहित कई भ्रामक रिपोर्ट देकर लूटपाट के आरोपी मकान मालिक को बचाने में जुट गयी है। पत्नी रश्मि गांधी के बयान दर्ज करने के बजाए पुलिस के खिलाफ न बोलने की धमकी दे रही है। श्री गांधी का कहना है कि उत्पीड़नात्मक कार्रवाई के दौरान से ही उच्चाधिकारियों समेत उच्च न्यायालय से अपने आवेदनों के जरिए कह चुके है कि पुलिस अपनी खामियों को छिपाने के लिये ही कार्रवाई कर रही है जो अब पुलि अपने बचत में खामियों को छिपाकर न्यायालय को गुमराह कर रही है। जवाब में पुलिस कह रही है कि भदोही में हिंसा का घटना हुआ ही नहीं है। केवी टेन पर पथराव व 25 नवम्बर को तोड़-फोड़ हुआ ही नहीं है। बालू खनन सहित खुलेआम गुंडागर्दी व अपराध की घटनाएं नहीं हो रही हैं। पुलिस की इस कार्रवाई न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई लिखाई चौपट हो रही है बल्कि श्री गांधी अपनी पत्रकारिता भी नहीं कर पा रहे है। वरिष्ठ अधिवक्ता आरपी यादव ने कहा है कि भदोही पुलिस बाहुबली विधायक के आगे नतमस्तक है। जिस विधायक पर हत्या लूट डकैती अपहरण आदि के 64 से अधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं उस पर कार्रवाई करने के बजाए सच्चाई उजागर करने वाले पत्रकार पर पुलिस कार्रवाई कर ब्रतानिया हुकूमत को भी मात दे दिया है।

(भदोही से एक पत्रकार की रिपोर्ट)