जिस दिये को शांति भूषण ने आकार दिया था उनका हाथ इसकी लौ को बचाएगा, बुझाएगा नहीं - योगेंद्र यादव
जिस दिये को शांति भूषण ने आकार दिया था उनका हाथ इसकी लौ को बचाएगा, बुझाएगा नहीं - योगेंद्र यादव
किरण बेदी बीजेपी को नहीं बल्कि बीजेपी उन्हें बदल देगी
नई दिल्ली। अन्ना हजारे के तथाकथित भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के प्रमुख स्तंभ और आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य शांति भूषण जी के भाजपा की दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी की प्रशंसा किए जाने पर आप के सैद्धांतिक शिल्पकार और समाजशास्त्री योगेंद्र यादव न आश्चर्य व्यक्त किया है कि उन्होंने (शांति भूषण ने) किरण जी को मुख्यमंत्री लायक कैसे मान लिया ?
बता दें कि आप के संस्थापक सदस्य शांति भूषण ने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर सवाल और कुछ अन्य सांगठनिक मसले भी उठाये थे।
श्री यादव ने कहा कि शांति भूषण जी पार्टी में हम सबके अग्रज हैं, श्रद्धेय हैं। परिवार में बुजुर्गों का फ़र्ज़ बनता है कि वे सभी बच्चों को मंगलकामनाएं दें, इस लिहाज़ से जनलोकपाल आन्दोलन से निकले सभी नायकों को शांति भूषण जी का आशीर्वाद समझ आता है। लेकिन जहाँ सिद्धांतों का सवाल हो, वहाँ व्यक्तिगत पसंद-नापसंद से मुक्त होकर सच का साथ देना ही धर्म है। शांति भूषण जी का अपना जीवन गीता की इस सीख की मिसाल है। इसीलिये आज उनके बयान से हैरानी होती है, निराशा होती है। उन्होंने कहा कि आज सवाल यह नहीं है कि किरण बेदी और अरविन्द केजरीवाल कैसे विद्यार्थी थे या कैसे अफसर थे, प्रश्न ये है कि राजनेता के रूप में उनकी समझ और क्षमताएं क्या हैं? सवाल ये है कि दिल्ली के आम आदमी की समस्यायों का उनके पास क्या समाधान है? सवाल ये है कि आज देश की राजनीति में ये दोनों चेहरे किन शक्तियों के प्रतीक हैं?
अपने फेसबुक पेज पर योगेंद्र यादव ने लिखा है किरण जी राजनीति में नयी-नयी आई हैं। कल तक वे राजनीति और राजनेताओं से नफरत करती थीं। हमें समझाती थीं कि पार्टी में जाना देश के साथ धोखा है। इसलिए, अभी कोई नहीं कह सकता कि वे अपने प्रशासनिक और सामाजिक काम के अनुभव को राजनीति में कैसे उतारेंगी। अभी तो वे अपनी नयी पार्टी को भी ठीक से नहीं पहचानतीं। पता नहीं वे समझती भी है या नहीं कि उन्हें बीजेपी ने इस मौके पर चुनावी मैदान में क्यूँ उतारा है। आज की तारीख में गुंजाईश इसी की है कि वे बीजेपी को नहीं बल्कि बीजेपी उन्हें बदल देगी।
श्री यादव ने कहा है सबसे बड़ी बात ये है कि कोई यह नहीं जानता कि दिल्ली के बड़े सवालों पर किरण जी कहाँ खड़ी हैं। बीजेपी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्ज़ा देने की बात करती रही हैं, किरण जी कहती हैं यह कोई ख़ास मुद्दा नहीं है। बीजेपी का विज्ञापन बिजली के दाम आधे करने का वादा करता है। किरण जी कहती हैं कि इस तरह की बातों में उनका भरोसा नहीं है। हम नहीं जानते कि झुग्गी झोपड़ी या 'अवैध' कॉलोनियों पर वे क्या सोचती हैं। महिला और पुलिस अफसर होने के कारण उनसे महिला सुरक्षा की उम्मीद बनती है लेकिन इस सवाल पर भी वे क्या करेंगी इसका उन्होंने खुलासा नहीं किया। हम नहीं जानते कि धर्मांतरण से लेकर गोडसे की मूर्ति जैसी खतरनाक बातों से वे कैसे निबटेंगी।
शांति भूषण जी यह सब जानते हैं। उन्हें सार्वजनिक जीवन का जितना अनुभव है उतनी तो मेरी आयु नहीं है। यूँ भी बड़ों से जुबान लड़ाना अच्छा नहीं लगता। बस इतना पूछने का मन करता है कि इन सब सवालों के जवाब जाने बिना उन्होंने किरण जी को मुख्यमंत्री लायक कैसे मान लिया। आम आदमी पार्टी जैसी पार्टी को लगातार अपने आप से सवाल पूछते रहना चाहिए। स्वराज के सिद्धांत में यकीन करने वाली पार्टी सवालों से कभी मुंह नहीं मोड़ सकती, लेकिन हर सवाल के लिए सही वक़्त और सही जगह होते हैं। शांति भूषण जी मुझसे बेहतर जानते होंगे कि क्या आज दिल्ली चुनाव के बीचों-बीच उन सब सवालों को उठाने का सही वक़्त है?
आप नेता ने कहा आज दिल्ली के रणक्षेत्र में आशा का दीप राजनीति में पैसे, बाहुबल और मीडिया के तूफ़ान से लड़ रहा है। बहुत अरसे बाद हमारे देश में यह दीप टिमटिमाया है। इसकी लौ को जलाए रखने के लिए ना जाने कितने देशवासियों ने अपने करियर छोड़े, सुख-सुविधा छोड़ी, घर-बार छोड़ा। आज की लड़ाई में इस दिए को हर हाथ की ओट की ज़रूरत है। जब यह दिया चाक पर रखा था तब शांति भूषण जी के हाथों ने इसे आकार दिया था। मुझे आज भी यकीन है कि उनका हाथ इस लौ को बचाएगा, बुझाएगा नहीं।


