जेएनयू की जांच रिपोर्ट छात्र संघ ने की खारिज
जेएनयू की जांच रिपोर्ट छात्र संघ ने की खारिज
नई दिल्ली, 17 मार्च। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने कहा है कि वह जांच कमेटी की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं करेगा, क्योंकि प्रशासन ने छात्रों की मांगों पर विचार नहीं किया है।
छात्र संघ की उपाध्यक्ष शहला राशिद ने जांच कमेटी में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग करने वाला प्रस्ताव रखा, जिसे बुधवार को पारित किया गया।
प्रतिष्ठित समाचारपत्र देशबन्धु में प्रकाशित एक ख़बर में कहा गया है - जेएनयू छात्र संघ ने एक बयान में कहा,
"छात्र संघ की मांग के बावजूद आरोपी छात्रों को अभी तक पूरी रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है।"
छात्र संघ ने कहा,
"आरोपी छात्रों के यह तक नहीं बताया गया है कि उनके खिलाफ आरोप क्या हैं। इस पक्षपातपूर्ण जांच पर हम किसी भी प्रकार की अनुशासनिक कार्रवाई का विरोध करेंगे।"
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विश्वविद्यालय के कुलपति एम. जगदेश कुमार द्वारा गठित जांच कमेटी ने संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की बरसी मनाने के लिए बीते नौ फरवरी को आयोजित कार्यक्रम के दौरान 21 छात्रों को विश्वविद्यालय के नियमों व मानदंडों का उल्लंघन करने का दोषी पाया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विश्वविद्यालय के चीफ प्राक्टर के दफ्तर से छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इस नोटिस का जवाब देने की अवधि को शुक्रवार तक के लिए बढ़ा दी गई।
जेएनयू छात्र संघ ने उनकी चिंता का समाधान न निकालने के लिए विश्वविद्यालय की आलोचना की है।
एक छात्र नेता ने कहा,
"छात्र संघ ने उच्चस्तरीय जांच कमेटी के गठन, संदर्भ और कामकाज के मामले पर चिंता जताई है। हमने जेएनयू प्रशासन से इस पर बात की है कि कमेटी ने जांच की प्रक्रिया में स्वाभाविक न्याय के सिद्धांतों का किस प्रकार उल्लंघन किया।"
कुछ समाचार चैनलों की खबर के मुताबिक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी नारों को लेकर विश्वविद्यालय ने जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार व महासचिव रामा नागा तथा छात्रों अनंत प्रकाश नारायण, अनिर्बान भट्टाचार्य, आशुतोष, उमर खालिद, ऐश्वर्या अधिकारी तथा श्वेता राज को निलंबित कर दिया था। निलंबन को हालांकि पिछले सप्ताह वापस ले लिया गया। हालांकि चैनलों पर चलाई गई वीडियो फुटेज डॉक्टर्ड होने के आरोप हैं।


