नयी दिल्ली, 28 फरवरी। मशहूर इतिहासकार रोमिला थापर ने कहा कि संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू की फांसी के खिलाफ आयोजित कार्यक्रम से उभरे विवाद के चलते जेएनयू को कोई धक्का नहीं लगेगा क्योंकि इसके लिए ‘‘बौद्धिक समर्थन’’ है।
रोमिला थापर ने कहा कि जब तक कोई सरकार पूरी तरह ‘‘लोकतंत्र विरोधी तानाशाही’’ में नहीं बदल जाती उसके लिए चिंतन प्रक्रिया को ‘‘नियंत्रित’’ करना मुश्किल होने जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्सके मुताबिक जेएनयू की प्रोफेसर एमेरिटा रोमिला थापर ने कहा,

‘‘जेएनयू को कोई धक्का नहीं पहुंचने वाला है क्योंकि देश में इसके लिए बहुत बौद्धिक समर्थन है। दूसरे विश्वविद्यालय भी हैं जो विविध मुद्दों पर चर्चा करते हैं जैसा जेएनयू में होता है।’’

उन्होंने कहा,

‘‘किसी विश्वविद्यालय का वजूद इस मंशा के लिए है - हर तरह के विचारों पर चर्चा करने के लिए।’’

रोमिला थापर ने कहा,
‘‘अगर कोई सरकार पूरी तरह लोकतंत्र विरोधी तानाशाही में बदल नहीं जाए तो उसके लिए इस सोचने-विचारने पर नियंत्रण करना और नियंत्रण करने की कोशिश करना बेहद कठिन होने जा रहा है। अगर वह ऐसा करती है तो वह शासन के दूसरे पहलुओं को नुकसान पहुंचाएगी जैसा जहां जहां तानाशाही स्थापित हुई है, दिखा है।’’
सुप्रसिद्ध इतिहासकार ने कहा कि विश्वविद्यालयों पर हमले लोगों के सोचने की शक्ति पर नियंत्रण करने का एक प्रयास है और यह प्रयास जब जब किया गया है, नाकाम रहा है।
सुप्रसिद्ध इतिहासकार रोमिला थापर वर्ष 1992 और 2005 में दो दो बार पद्म भूषण सम्मान स्वीकार करने से इनकार कर चुकी हैं।

JNU not to suffer setback due to Afzal Guru row, says historian Romila Thapar https://t.co/CfQD0NFjRp pic.twitter.com/OSBr0hUSHD
— The Hindu (@the_hindu) February 28, 2016

JNU Not to Suffer Setback Due to Afzal Guru Row: Romila Thapar https://t.co/Q1BHotgSrC

— New Indian Express (@NewIndianXpress) February 28, 2016

“The battle now is between religious nationalism and secular nationalism.” - Romila Thapar